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बिजनौर के हनुमान मंदिर में 72 घंटे से परिक्रमा करता कुत्ता सोशल मीडिया पर वायरल है. लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं. लेकिन पशु चिकित्सकों का कहना है कि यह व्यवहार किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों ने रेबीज और न्यूरोलॉजिकल संक्रमण की आशंका जताते हुए जांच और सतर्कता की सलाह दी है.
शिवकांत आचार्य
भोपाल. उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नंदपुर गांव में हनुमान मंदिर की परिक्रमा करता एक कुत्ता इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है. मंदिर परिसर में प्रतिमा के लगातार चक्कर लगाते इस कुत्ते का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है; इस पर भोपाल के पशु चिकित्सक ने चमत्कार मानने से इनकार कर दिया है. उन्होंने लोगों से सावधान रहने और कुत्ते की जांच कराने को कहा है. उनका कहना है कि ऐसी घटना किसी बीमारी के कारण भी हो सकती है. हालांकि इससे उलट बड़ी संख्या में लोग इसे आस्था, भक्ति और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं. कुछ श्रद्धालु तो कुत्ते को भैरव बाबा का रूप मानकर पूजा तक करने लगे हैं. दूर-दराज से लोग मंदिर पहुंच रहे हैं.
पशु चिकित्सकों का कहना है कि किसी जानवर का घंटों या दिनों तक एक ही दिशा में घूमते रहना सामान्य व्यवहार नहीं है. यह किसी गंभीर शारीरिक या मानसिक समस्या का संकेत हो सकता है. वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ एसके श्रीवास्तव के अनुसार, इस तरह का व्यवहार कई बार न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, ब्रेन इंफेक्शन या संतुलन तंत्र में गड़बड़ी के कारण भी होता है. ऐसे में बिना जांच और इलाज के इसे भक्ति या चमत्कार मानना न सिर्फ गलत है, बल्कि जानवर और इंसानों दोनों के लिए खतरनाक भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि लोगों को कुत्ते को सावधानी से पकड़कर पास के अस्पताल में ले जाकर उसकी जांच करानी चाहिए. अगर किसी को कुत्ते के काटने या नाखून से खरोंच लगी हो तो उसे भी तुरंत डॉक्टरी जांच करा कर रेबीज से बचाव वाला इंजेक्शन लगवाना चाहिए.
बिजनौर जिले की नगीना तहसील के नंदपुर गांव में स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर में 11 जनवरी से एक कुत्ता लगातार मूर्ति की परिक्रमा करता देखा गया. चौंकाने वाली बात यह है कि परिक्रमा के दौरान कुत्ता न तो ठीक से खाना खा रहा है और न ही पानी पी रहा है. मंदिर परिसर में भीड़ बढ़ती जा रही है. लोग वीडियो बना रहे हैं और सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.
पशु चिकित्सक क्यों जता रहे हैं चिंता
वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ एसके श्रीवास्तव का कहना है कि यह व्यवहार भक्ति नहीं, बल्कि बीमारी का लक्षण हो सकता है. उनके अनुसार कुत्तों के कान के अंदर वेस्टिबुलर सिस्टम होता है, जो संतुलन बनाए रखने का काम करता है. अगर इसमें संक्रमण, सूजन या ट्यूमर हो जाए, तो जानवर एक ही दिशा में घूमने लगता है. इसी तरह ब्रेन में सूजन या दबाव की स्थिति में भी ऐसा व्यवहार देखा जाता है.
साइंस क्या कहती है. संभावित कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के व्यवहार के पीछे कई वैज्ञानिक वजहें हो सकती हैं.
- वेस्टिबुलर डिसऑर्डर से संतुलन बिगड़ना
- ब्रेन ट्यूमर या न्यूरोलॉजिकल इंफेक्शन
- केनाइन डिस्टेंपर जैसी संक्रामक बीमारी
- रेबीज की शुरुआती अवस्था
- गंभीर मानसिक तनाव या भ्रम की स्थिति
वैज्ञानिक नजरिए से प्रमुख कारण
FRAPs या ज़ूमीज़ : इसे फ्रेनेटिक रेंडम एक्टिविटी पीरियड्स कहा जाता है. इसमें कुत्ता अचानक बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है. हालांकि यह आमतौर पर कुछ मिनटों तक ही रहता है.
ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसऑर्डर : तनाव या बोरियत के कारण कुत्तों में OCD जैसा व्यवहार दिख सकता है. वे एक ही रास्ते पर बार-बार घूमते रहते हैं.
कैनाइन डिमेंशिया : उम्रदराज कुत्तों में कैनाइन कोग्निटिव डिस्फंक्शन हो सकता है. इससे भ्रम की स्थिति बनती है और वे बिना उद्देश्य चक्कर लगाते हैं.
न्यूरोलॉजिकल बीमारी : ब्रेन में सूजन, ट्यूमर या इंफेक्शन होने पर कुत्ता एक ही दिशा में घूमता रहता है.
अब तक सामने आई ऐसी घटनाएं, लोगों के लिए जरूरी चेतावनी
भारत और दुनिया में पहले भी जानवरों के सर्कुलर मूवमेंट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. कभी इन्हें चमत्कार माना गया, तो कभी वैज्ञानिक कारण तलाशे गए. डॉ एसके श्रीवास्तव ने साफ कहा है कि इस दौरान सावधानी बेहद जरूरी है. अगर कुत्ता रेबीज या किसी अन्य संक्रामक बीमारी से पीड़ित हुआ, तो उसके संपर्क में आए लोगों को खतरा हो सकता है. उन्होंने सलाह दी है कि कुत्ते को प्रशिक्षित व्यक्ति ही पकड़े और तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय ले जाए.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें