बैतूल में संपत्ति अपराधों में 100 फीसदी दोषमुक्ति दर: एसपी ने विवेचकों पर कार्रवाई के दिए निर्देश, लापरवाही बर्दाश्त नहीं – Betul News

बैतूल में संपत्ति अपराधों में 100 फीसदी दोषमुक्ति दर:  एसपी ने विवेचकों पर कार्रवाई के दिए निर्देश, लापरवाही बर्दाश्त नहीं – Betul News




बैतूल जिले में संपत्ति संबंधी अपराधों की विवेचना की हालत बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन द्वारा कराई गई न्यायालयीन समीक्षा में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि साल 2025 में चोरी, नकबजनी, डकैती और लूट जैसे कुल 40 गंभीर अपराधों में एक भी आरोपी को सजा नहीं हो सकी। यानी जिले में 100 प्रतिशत दोषमुक्ति दर दर्ज हुई है जो न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है बल्कि अपराधियों के हौसले बढ़ाने वाली भी है। 96% गृहभेदन केसों में भी आरोपी बरी
समीक्षा रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि गृहभेदन के 43 प्रकरणों में से सिर्फ एक केस में ही सजा हो सकी, जबकि बाकी 42 में आरोपी बरी हो गए। इस तरह दोषमुक्ति दर लगभग 96 प्रतिशत रही। एसपी जैन ने इसे “सामान्य त्रुटि नहीं बल्कि गंभीर पेशेवर लापरवाही” बताते हुए कहा कि यह पुलिस विवेचना की सबसे बड़ी विफलता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “साक्ष्य संकलन, गवाहों के बयान, तकनीकी प्रमाण और कानूनी प्रक्रिया में हुई चूक सीधे अपराधियों के पक्ष में जा रही है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” लचर विवेचना पर कार्रवाई के आदेश
पुलिस अधीक्षक ने उन विवेचकों के खिलाफ अर्थदंड सहित कठोर विभागीय कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं जिनकी जांच में लापरवाही पाई गई है। इसके साथ ही जिले के सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को “अंतिम चेतावनी” जारी करते हुए कहा गया है कि विवेचना को औपचारिकता न समझें। केवल गिरफ्तारी कर देने से पुलिस की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। दोषसिद्धि सुनिश्चित करना ही वास्तविक पुलिसिंग है। “अब जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति नहीं चलेगी”
एसपी वीरेंद्र जैन ने दो टूक कहा कि यदि भविष्य में चोरी, लूट, डकैती, नकबजनी और गृहभेदन जैसे अपराधों की विवेचना में लापरवाही पाई गई तो कठोरतम विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ संदेश दिया, “लचर विवेचना और अकर्मण्यता अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जवाबदेही तय होगी और नतीजे भी दिखेंगे।” कानून व्यवस्था के विशेषज्ञों के अनुसार इतनी अधिक दोषमुक्ति दर यह संकेत देती है कि अपराध पंजीबद्ध होने के बाद भी पुलिस केस को अदालत तक मजबूत तरीके से नहीं ले जा पा रही।



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