लड़कियों के लिए करते पुरुष करते श्रंगार, सिर पर मोर पंख, चांदी की सुतिया पहनते हैं, बैगा जनजाति की अनोखी परंपरा

लड़कियों के लिए करते पुरुष करते श्रंगार, सिर पर मोर पंख, चांदी की सुतिया पहनते हैं, बैगा जनजाति की अनोखी परंपरा


Baiga Tribes Shadi: बैगा समुदाय में बच्चों की शादी माता-पिता नहीं बल्कि खुद लड़का-लड़की एक दूसरे को पसंद करके, रात भर नाचते-गाते हुए खुद ही शादी तय करते हैं. हालांकि, इसके लिए पुरुषों को श्रंगार करके लड़कियों के साथ नाचना और गाना होता है तभी लड़की आगे बातचीत के लिए राजी होती है. डिंडोरी के रहने वाले दयाराम राठूरिया लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि हम बैगा जनजाति से आते हैं और हमारे यहां लड़का और लड़कियों की शादी एक अनोखी परंपरा से होती है. आज भी ये परंपरा जीवित है.

लड़कियों के लिए करते पुरुष करते श्रंगार

हमारे गांव में आज भी इस परंपरा को निभाया जाता है. दरअसल बैगा समुदाय में लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं फिर खुद ही गोत्र, रिश्ता निकाल कर आगे शादी की तिथि निकाल लेते हैं. हमारे समुदाय में लड़का-लड़की की शादी की ये परंपरा सालों पुरानी है. दयाराम बताते हैं कि बैगा समुदाय में जो लड़का और लड़कियों की शादी होती हैं, उसके लिए सबसे जरूरी वेशभूषा होती है. लड़कियों को रिझाने के लिए लड़कों को वेशभूषा पहनना बहुत जरूरी होता है.

लड़कों की इस वेशभूषा में सबसे पहले सिर पर मोर पंख से बनी हुई कलिगी बांधते हैं. माथे पर फेटा बांधा जाता है जिसे पगड़ी कहा जाता है. चांदी के पुराने सिक्कों से बना हवाल पहनते हैं. चांदी की सुतिया पहनते हैं. माला पहनते हैं. साथ ही बिछिया और छिलरी भी पहनते हैं. इतना श्रंगार करने के बाद हमारी वेशभूषा कंप्लीट होती है.

बिना वेशभूषा के नहीं मानती हैं लड़कियां

अगर हम यह वेशभूषा नहीं पहनते हैं तो लड़कियां हमें छोड़कर भाग जाती हैं और फिर लड़कों से बोलती हैं कि तुम बिना वेशभूषा के ही हमारे साथ नृत्य करने आ गए हो. इसके बाद वह लड़कियां हमसे हेल-मिल यानी बातचीत नहीं करेंगी यानी कि हमसे आगे बात ही नहीं करेंगी. हमारे पास वेश-भूषा में कुछ नहीं रहेगा. वह पूरी वेशभूषा के साथ नाचेंगी और हम ऐसे ही चले जाएंगे तो वह हमें छोड़कर भाग जाएंगी. हमें आगे सौदर यानी बातचीत करने के लिए मौका ही नहीं मिलेगा.

दयाराम बताते हैं की लड़कियों को रिझाने के लिए यह वेशभूषा बहुत जरूरी होती है. पूरी रात इसी वेशभूषा में नृत्य भी करना होता है. हमारे गांव में आज भी इसी वेशभूषा पहनकर लड़का और लड़की एक दूसरे को पसंद करके आगे शादी के रिश्ते की बात करते हैं. ये परंपरा आज भी हमारे गांव में चल रही है.

रात भर में शादी की बात तय

दयाराम बताते हैं कि हम आपको उदाहरण के लिए समझाते हैं. जैसे आपके खजुराहो की लड़की है और डिंडोरी का लड़का है. डिंडोरी का लड़का खजुराहो आया है तो वह रात भर यहां रुकेगा और यहां की लड़की से हेलमेल(बातचीत) करने के बाद दोनों लोग सरनेम, गोत्र, नाता और रिश्ता निकाल लेंगे. इसके बाद मिलने के लिए आगे की तिथि तय कर लेंगे. इसके बाद एक-दो बार लड़का खजुराहो मिलने आएगा और उसके बाद रिश्ता जुड़ना शुरु हो जाता है. इस तरीके से बैगा समुदाय में लड़का और लड़की खुद ही एक दूसरे को पसंद करके शादी कर लेते हैं.

इसके अलावा हमारे यहां मड़ई मेला भी लगता है. जिसमें लड़का अगर लड़की को पसंद कर लेता है तो फिर लड़की का पीछा किया जाता है. वह जरूर पूछेगी कि तुम मेरा पीछा क्यों कर रहे हो तो फिर लड़का जवाब देता है कि मुझे तुम पसंद हो और शादी करना चाहता हूं. इस तरह लड़की को रिझा कर आगे शादी के लिए मनाया जाता है.



Source link