सागर में गिद्धों की सातों प्रजातियों की मौजूदगी, बुंदेलखंड की जैव विविधता के लिए गर्व, जानें इनकी खासियत

सागर में गिद्धों की सातों प्रजातियों की मौजूदगी, बुंदेलखंड की जैव विविधता के लिए गर्व, जानें इनकी खासियत


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seven species of vultures spotted in Sagar: सर्दियों के मौसम में यह दक्षिणी अमेरिका से होते हुए एशियाई देशों में आ जाते है. जहां वह सड़क किनारे या जंगलों में पड़े मृत मवेशियों को खाते हुए नजर आ जाती है. हालांकि इनकी संख्या बहुत कम होती है. गिद्धों के बड़े झुंड में यह इक्का दुक्का ही नजर आते है. इनकी सूंघने की शक्ति थोड़ी कम होती है. इसलिए यह दूसरे गिद्धों का पीछा करके मृत जानवरों के पास तक पहुंचते है.

सागरः गिद्धों को प्रकृति का सबसे बड़ा सफाई कर्मी कहा जाता है क्योंकि यह बड़े से बड़े मृत मवेशियों का सफाया करने के लिए जाने जाते है. जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियां फैलने से रुकती है. गिद्धों की कुल सात प्रजातियां होती है और इस समय यह सातों की सात प्रजातियां बुंदेलखंड के नौरादेही की शोभा बढ़ा रही है. दिन में तीन प्रजाति प्रवासी पक्षियों की और चार इंडियन है. बुंदेलखंड के लिए यह है गर्व की बात है कि यहां न सिर्फ गिद्धों की संख्या बढ़ रही है बल्कि सभी प्रजातियों के गिद्धों के हिसाब से यहां का हेवीटेट यहां का वातावरण इनकी अनुकूल है. जिसकी वजह से विंटर सीजन में स्थानीय के साथ-साथ प्रवासी प्रजातियां भी दिखाई दे रही हैं.

इन्हीं सात प्रजातियों में आज हम काले गिद्ध के बारे में जानेंगे जो छोटे कद का और बड़े पंखों वाला होता है. लेकिन अन्य गिद्ध प्रजातियों की तरह इसमें स्वर यंत्र नहीं होता है. जिसको सिरिंक्स कहते है. यह नहीं होने की वजह से यह बहुत कम आवाज निकाल पाते है. जिसकी वजह से यह अपने गले से आवाज नहीं निकाल पाता और यह किसी कोबरा की तरह फुंफकारता है या जब छोटे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होने पर जो आवाज निकलती है वैसे ही घुरघुराहट निकालते है. जिसे सुनकर कभी-कभी इंसान भी डर जाते है.

सर्दियों के मौसम में यह दक्षिणी अमेरिका से होते हुए एशियाई देशों में आ जाते है. जहां वह सड़क किनारे या जंगलों में पड़े मृत मवेशियों को खाते हुए नजर आ जाती है. हालांकि इनकी संख्या बहुत कम होती है. गिद्धों के बड़े झुंड में यह इक्का दुक्का ही नजर आते है. इनकी सूंघने की शक्ति थोड़ी कम होती है. इसलिए यह दूसरे गिद्धों का पीछा करके मृत जानवरों के पास तक पहुंचते है.

जब यह गिद्ध मृत मवेशियों से अपना भोजन करते है. तो यह इस दौरान भी कुछ अलग नजर आते हैं क्योंकि बाकी गिद्ध अपना सिर सहित पूरा सर उस मवेशी के अंदर डालकर मांस नोच कर खाते है. लेकिन काला गिद्ध पहले जिस हिस्से को खाना चाहता है उसको फाड़ता है जगह बनाता है फिर खाता है.

वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर ए ए अंसारी बताते है कि जब यूरोप साइबेरियन जैसे देशों में मौसम बिगड़ है. बर्फबारी होती है तो ठंड से बचने के लिए ऐसे क्षेत्रों में आ जाते है जहां का तापमान चार से 10 डिग्री के आसपास होता है. साथ ही उनके रहवास में परेशानी ना हो भोजन भी आराम से मिलता रहे और प्रवासी पक्षियों की 100 से अधिक प्रजातियां इस बार टाइगर रिजर्व में अपना आशियाना बने हुए है. इन्हीं में गिद्धों की प्रजातियां भी शामिल है.

डिप्टी डायरेक्टर आगे बताते है कि जो 7 तरह के गिद्ध पाए जाते है इनमें से तीन माइग्रेटरी है. जिनको मेहमान गिद्ध कहते है. हिमालय ग्रिफॉन वल्चर, यूरेशियन ग्रिफॉन वल्चर और सिनेरियस
तीनों की आमद हो चुकी है. काफी संख्या में हिमालय और यूरेशियन ग्रिफॉन आए है और सिनेरियस के भी फोटोग्राफ लिए गए है अभी जो वॉटर वर्ड सेंसेज हुआ था उसमें भी यह कैप्चर हुआ है. इस समय ठंडी के मौसम में सातों तरह की प्रजातियां यहां पर दिख जाएंगे.

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सागर में गिद्धों की सातों प्रजातियों की मौजूदगी, जैव विविधता के लिए गर्व



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