Last Updated:
Public Opinion: हरचरण सिंह मुच्छाल ने कहा कि एक ओर देशभर में अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म शताब्दी मनाई जा रही है और दूसरी ओर उनकी प्रतिमा और शिवलिंग को तोड़ा जा रहा है. यह सरकार की दोहरी नीति को दिखाता है.
खरगोन. वाराणसी का प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मणिकार्णिका घाट इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. रिडेवलपमेंट के नाम पर घाट के एक हिस्से को तोड़े जाने के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. यह घाट करीब 255 साल पुराना है और इसका निर्माण देवी अहिल्याबाई होल्कर ने साल 1791 में कराया था. मणिकार्णिका घाट वाराणसी के प्रमुख 84 घाटों में शामिल है और धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. बरसों से यहां लोगों का दाह संस्कार होता आ रहा है. लोगों का आरोप है कि मणिकार्णिका घाट पर तोड़फोड़ के दौरान घाट पर स्थापित अहिल्याबाई होल्कर, शिवलिंग सहित अन्य ऐतिहासिक मूर्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि जिन मूर्तियों और संरचनाओं को तोड़ा गया है, उन्हें उनके मूल स्वरूप में फिर से स्थापित किया जाए और इस प्रोजेक्ट को बंद किया जाए ताकि घाट की ऐतिहासिक पहचान बनी रह सके.
ऐतिहासिक धरोहरों को तोड़ा नहीं जा सकता
लोकल 18 से बातचीत में खरगोन के लोगों ने भी खुलकर विरोध दर्ज कराया है. संतोष चौहान ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों को तोड़ना या नुकसान पहुंचाना गलत है. भारत में इसके लिए पहले से कानून मौजूद हैं, जिनके तहत 1947 से पहले की ऐतिहासिक धरोहरों को तोड़ा नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने पूरे भारतवर्ष में घाटों और मंदिरों का निर्माण और पुनः निर्माण कराया. मणिकार्णिका घाट भी उन्हीं की देन है. सरकार को विकास करना चाहिए लेकिन पुरानी धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए.
विकास के नाम पर विनाश करना गलत
वहीं हरचरण सिंह मुच्छाल ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, काशी विश्वनाथ सहित देशभर में ऐतिहासिक कार्य कराए. मणिकार्णिका घाट अपने आप में नश्वरता का प्रतीक है. ऐसे स्थान का विकास के नाम पर विनाश करना गलत है. उन्होंने कहा कि एक ओर देशभर में अहिल्याबाई की 300वीं जन्म शताब्दी मनाई जा रही है और दूसरी ओर उनकी मूर्ति और शिवलिंग को तोड़ा जा रहा है. यह सरकार की दोहरी नीति को दर्शाता है.
अहिल्याबाई को देवी के रूप में पूजते हैं
नवीन कुमार ने भी रिडेवलपमेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐतिहासिक घाट का निर्माण कराने वाली अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को तोड़ना बिल्कुल गलत है. यह एक पुरातात्विक धरोहर है, जिसे नुकसान पहुंचाने की बजाय संरक्षित किया जाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि इस कृत्य में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए. वहीं जितेंद्र वासुरे ने कहा कि विकास के लिए नया निर्माण करना गलत नहीं है लेकिन पुरानी धरोहरों और विरासतों को नुकसान पहुंचाना बर्दाश्त योग्य नहीं है. उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर देश की महान नायिका हैं, जिन्हें लोग देवी के रूप में पूजते हैं. उनकी धरोहर और मूर्ति को तोड़ना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.