भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदा पानी पीने से हुई मौतों के बाद इंदौर सियासी अखाड़ा बनता जा रहा है। एक ओर भाजपा सरकार अपनी त्वरित कार्रवाई को संवेदनशील उदाहरण बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रचार बताते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। डायरिया से मौतों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे, पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, नि:शुल्क इलाज और सेनिटेशन व्यवस्था को तत्काल मजबूत करने के निर्देश दिए। सरकार का दावा है कि समय पर हस्तक्षेप के चलते हालात पर नियंत्रण पाया गया है। BJP का हमला: “20 दिन बाद का दौरा संवेदना नहीं, राजनीति” जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 20 दिन बाद इंदौर दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब हालात सबसे गंभीर थे, तब न वे न कांग्रेस कहीं नजर नहीं आई। अब हालात सामान्य होने के बाद दौरा किया जा रहा है। सिलावट ने दावा किया कि जब लोग संकट में थे, तब सरकार जमीन पर थी। 20 दिन बाद का यह दौरा संवेदना नहीं, राजनीति का संदेश देता है। कांग्रेस का पलटवार: “20 दिन तक आप कहां थे?” भाजपा के इन आरोपों पर प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बोरासी ने जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के दौरे पर सवाल उठाने से पहले भाजपा यह बताए कि भागीरथपुरा त्रासदी के बाद बीते 20 दिनों तक खुद सरकार के कई मंत्री और जनप्रतिनिधि कहां थे। बोरासी ने कहा कि संकट के समय केवल एक दिन का दौरा और फोटो खिंचवाना संवेदना नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि कई दिनों तक पीड़ित परिवार मदद के लिए भटकते रहे, जबकि सरकार अब अपनी पीठ थपथपा रही है। आज आप पूछ रहे हैं राहुल गांधी 20 दिन बाद क्यों आ रहे हैं, पहले यह बताइए कि इन 20 दिनों में आप खुद क्या कर रहे थे?
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