Indore News: इस दुर्लभ बीमारी से जूझ रही ढाई साल की अनिका, इंदौर बना उम्मीद की मिसाल, 9 करोड़ में होगा इलाज

Indore News: इस दुर्लभ बीमारी से जूझ रही ढाई साल की अनिका, इंदौर बना उम्मीद की मिसाल, 9 करोड़ में होगा इलाज


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Indore News: अनिका के इलाज के लिए Zolgensma नामक दवा की आवश्यकता है जो एक ‘जीन रिप्लेसमेंट थेरेपी’ है. यह इंजेक्शन शरीर में लापता जीन की कमी को पूरा करता है. जिससे मांसपेशियां फिर से मजबूत होने लगती है. यह बीमारी बहुत कम लोगों को होती है. इसलिए इसकी रिसर्च और दवा की मैन्युफैक्चरिंग काफी महंगी होती है. Spinal Muscular Atrophy Type-2 के मरीज इतने कम हैं कि ट्रायल के लिए भी मरीज मिलना मुश्किल होता है.

पूरे इंदौर ने एक बार फिर एक बच्ची के इलाज के लिए एकजुट होकर पहल की है. बच्ची के माता-पिता से लेकर सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स तक सैकड़ों वालंटियर्स रोजाना सड़क पर उतरकर क्राउड फंडिंग कर रहे हैं. दरअसल, इंदौर के प्रवीण शर्मा की 2.5 साल की बेटी को Spinal Muscular Atrophy (SMA) Type-2 नामक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है. यह बीमारी उन सेल्स को खत्म करने लगती है जो मांसपेशियों को नियंत्रित करते है. इससे बच्ची चलने-फिरने में असमर्थ हो जाती है और समय के साथ बैठने, निगलने और सांस लेने में भी तकलीफ होती है.

अनिका के पिता प्रवीण ने बताया कि अब तक 4 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके है. लेकिन अभी भी 5 करोड़ रुपये की आवश्यकता है. अगर समय रहते इलाज नहीं हुआ तो बेटी को बचाना मुश्किल होगा. पूरा इंदौर उन्हें दिल खोलकर समर्थन दे रहा है. जिससे यह राशि इकट्ठा हो पाई है. प्रशासन से भी मदद मिली है और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की तरफ से 75 लाख रुपये की सहायता मिली है. इंदौर के प्रतिनिधियों से आश्वासन मिला है. लेकिन फिलहाल मदद नहीं मिली है.

सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हिमांशु सोनी ने बताया कि अनिका का इलाज एम्स दिल्ली में होगा. जिसके लिए इंजेक्शन अमेरिका से आएगा. लेकिन यह समय सीमा से बंधा हुआ है. अगर उसका वजन 13 किलो से ज्यादा हो गया तो इंजेक्शन प्रभावी नहीं रहेगा. इस कारण माता-पिता उसे कम खाना खिला रहे है. उन्होंने उन लोगों से सहयोग की अपील की जो बड़ी धनराशि देने में सक्षम है.

अनिका के इलाज के लिए Zolgensma नामक दवा की आवश्यकता है जो एक ‘जीन रिप्लेसमेंट थेरेपी’ है. यह इंजेक्शन शरीर में लापता जीन की कमी को पूरा करता है. जिससे मांसपेशियां फिर से मजबूत होने लगती है. यह बीमारी बहुत कम लोगों को होती है. इसलिए इसकी रिसर्च और दवा की मैन्युफैक्चरिंग काफी महंगी होती है. Spinal Muscular Atrophy Type-2 के मरीज इतने कम हैं कि ट्रायल के लिए भी मरीज मिलना मुश्किल होता है.

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