लगातार बाल अपराधों में अव्वल मप्र अब एआई से लैस रक्षा एप से बच्चों से जुड़े अपराधों पर निगरानी कर लगाम कसेगा। हाल ही में 250 बाल अधिकार संगठनों के प्रतिनिधि समूह ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ ने रक्षा एप लॉन्च किया है। एप बाल विवाह और बच्चों की तस्करी वाले संवेदनशील क्षेत्रों और समूहों पर निगरानी रखकर बाल अपराधों की रोकथाम में मदद करेगा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में बच्चों के खिलाफ अपराधों के 177335 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 22,393 मामलों के साथ मध्य प्रदेश शीर्ष पर रहा है। बाल अपराधों में कमी लाने और निगरानी बढ़ाने के लिए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन ने एआई तकनीक से लैस एप विकसित किया है। एप का एक टूल बाल ऑनलाइन यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री के निर्माण, उसके अपलोड, डाउनलोड की मैपिंग करता है। बाल अपराधों में भोपाल आगे: एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में बाल अपराधों की दर सबसे अधिक 6% है। इंदौर में 5.6, रीवा में 5.4% है। 2023 में राजधानी में बाल अपराधों के कुल 1354 मामले दर्ज हुए थे, इंदौर में 1256 तो रीवा में 1214 मामले दर्ज हुए थे। मप्र में बाल विवाह रही है समस्या जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2023 से अगस्त 2025 के बीच मप्र के 41 जिलों में 36,838 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। वहीं, मानव तस्करी के शिकार 4,777 बच्चों को मुक्त कराया गया है। यौन शोषण के शिकार 1200 से अधिक बच्चे शिकार हुए हैं। मप्र के कुछ जिलों जैसे राजगढ़ में बाल विवाह की दर 46.0, श्योपुर में 39.5, छतरपुर में 39.2, झाबुआ में 36.5 और आगर मालवा जिले में 35.6 प्रतिशत है। राष्ट्रीय दर महज 23.1% है।
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