भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए आखिरी मुकाबले में टीम इंडिया की शर्मनाक हार हुई. इस हार के साथ टीम इंडिया ने पहली बार न्यूजीलैंड के खिलाफ घर में सीरीज हारने का अपमानजनक रिकॉर्ड अपने नाम पर स्थापित कर लिया. पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 338 रन बनाए थे. जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया की ओर से विराट कोहली आखिरी सांस तक लड़े और 124 रनों के योग पर अपना विकेट दे बैठे. इसी के साथ टीम इंडिया ये मैच हार गई और घर में भारतीय टीम के वर्चस्व पर कई सवाल खड़े हो गए हैं. एक समय था टीम इंडिया अपने होम कंडीशन में राजा मानी जाती थी, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली इस हार के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. आखिर क्यों टीम इंडिया लगातार हार रही, कहां कमी रह जा रही है, क्या है असली वजह? चलिए समझते हैं डिटेल में…
पहली बार हुआ ऐसा
1988 के बाद से आठ कोशिशों में न्यूजीलैंड की भारत में यह पहली वनडे बाइलेटरल सीरीज जीत है.
इंदौर में सात वनडे मैच जीतने के बाद भारत की यह पहली हार है. इस वेन्यू पर 8 वनडे मैचों में से 6 में पहले बैटिंग करने वाली टीम जीती है.अक्टूबर 2022 के बाद यह पहली बार है, जब लगातार 13 मैच जीतने के बाद भारत टॉस जीतकर घर पर कोई वनडे मैच हारा है.
टॉप ऑर्डर को दिया दोष
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान शुभमन गिल ने अपनी बात साफ-साफ कही और बताया कि सही तरीके से खेल न दिखा पाना ही मुख्य वजह थी। जहाँ न्यूजीलैंड के डेरिल मिशेल और ग्लेन फिलिप्स ने अपनी अच्छी फॉर्म का फायदा उठाकर बड़ी सेंचुरी बनाई, वहीं भारतीय टॉप ऑर्डर नाकाम रहा.गिल ने माना, “हम सभी, सभी बल्लेबाज मुझे नहीं लगता कि हम अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदल पाए हैं. भारत में ज्यादा रन वाले मैच होते हैं और अगर बल्लेबाज, खासकर टॉप के दो बल्लेबाज, अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पाते हैं, तो हम बड़ा स्कोर नहीं बना पाएंगे.”
खराब फील्डिंग बनी वजह
कप्तान ने डिफेंसिव स्टैंडर्ड में आई भारी गिरावट की ओर भी इशारा किया. गिल ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगा कि इस सीरीज में हमारी फील्डिंग उम्मीद के मुताबिक नहीं थी. हमने कुछ अहम कैच छोड़े, और ऐसी विकेट पर गेंदबाजों के लिए मौके बनाना आसान नहीं होता. न्यूजीलैंड की फील्डिंग बेहतर थी, उन्होंने आज कम से कम 15-20 रन बचाए होंगे। इससे बहुत फर्क पड़ता है.
सीनियर प्लेयर की फॉर्म बड़ी चिंता
जबकि कप्तान ने परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया, वहीं इस सीरीज में मैनेजमेंट की तरफ से कई बड़ी “सिलेक्शन गलतियां” और टैक्टिकल क्लैरिटी की कमी सामने आई. एक बड़ी चिंता उम्रदराज सीनियर खिलाड़ियों पर ज्यादा निर्भरता है, जिनकी कंसिस्टेंसी कम हो गई है, खासकर रोहित शर्मा और रवींद्र जडेजा.
बदोनी को शामिल करना…
युवा टैलेंट को टीम में शामिल करने का भी कोई साफ प्लान नहीं था. स्पेशलिस्ट मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजों की जगह नीतीश कुमार रेड्डी को शामिल करने पर सवाल उठे, क्योंकि यह ऑलराउंडर जरूरी स्टेबिलिटी देने में नाकाम रहा. इसके अलावा, वॉशिंगटन सुंदर के “हल्के” रिप्लेसमेंट के तौर पर आयुष बदोनी को टीम में बुलाना भी गलत लगता है, क्योंकि बदोनी के पास सुंदर जैसी असली ऑफ स्पिन यूटिलिटी नहीं है, और वह असल में एक ऐसे स्लॉट में प्योर बल्लेबाज के तौर पर खेल रहे हैं जहां दोहरी भूमिका वाले खिलाड़ी की जरूरत है.
खराब टीम सिलेक्शन
जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम के मुख्य तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को महज आखिरी मैच के लिए टीम में खिलाना बेहद ही निराशाजनक रहा. लगातार शानदार परफॉर्मेंस के बाद भी महज 1 मैच में उन्हें खिलाया गया. बावजूद इसके उन्होंने 3 विकेट झटके. ऐसे में उन्हें शुरुआती मैचों में ना खिलाना बहुत बड़ा फेलियर था. यहां तक कि भरोसेमंद कुलदीप यादव भी बेअसर दिखे, तीनों मैचों में उनका औसत 60 से ज्यादा और स्ट्राइक रेट 50 रहा. गिल ने कुलदीप के बचाव में कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह इस बार ज्यादा विकेट नहीं ले पाए. इसी वजह से इस तरह की सीरीज हमें आगे बढ़ने में मदद करती हैं.”
घरेलू क्रिकेट बनी कमजोरी
हालिया गिरावट का एक मुख्य कारण घरेलू सर्किट की कमजोर होती गहराई है. ऐसी भावना बढ़ रही है कि IPL और इंटरनेशनल क्रिकेट के बीच का गैप बढ़ता जा रहा है. IPL भले ही “मैच-विनर” खिलाड़ी पैदा करता है, लेकिन यह हमेशा “संघर्ष करने वाले” खिलाड़ी पैदा नहीं करता. रणजी और विजय हजारे ट्रॉफी को अब बेहतरीन साबित होने का मैदान नहीं माना जाता, जिससे टेक्निकल स्वभाव की कमी हो रही है. कई उभरते हुए खिलाड़ी घरेलू सीजन की मुश्किलों के बजाय हाई-ऑक्टेन फ्रेंचाइजी कॉन्ट्रैक्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे वे न्यूजीलैंड जैसी टीमों द्वारा डाले जाने वाले अनुशासित, लंबे फॉर्मेट के दबाव के लिए तैयार नहीं हो पाते.
नहीं किया काम तो पड़ेगा पछताना
न्यूजीलैंड की कप्तानी और फील्ड प्लेसमेंट प्रोएक्टिव थे, जबकि भारत का तरीका रिएक्टिव लगा. स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों की जगह नीतीश कुमार रेड्डी को शामिल करने और अर्शदीप सिंह को देर से टीम में लेने से पता चलता है कि कोई साफ लॉन्ग-टर्म प्लान नहीं था. इसके अलावा, सिलेक्शन प्रोसेस में “IPL हैंगओवर” साफ दिख रहा है; खिलाड़ियों को 20-ओवर की छोटी पारियों के आधार पर चुना जा रहा है, न कि 100-गेंदों की पारी बनाने या अनुशासित 10-ओवर का स्पेल डालने की उनकी काबिलियत के बेस पर. 7 फरवरी को T20 वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने वाला है. अगर खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन की मांग के लिए फिर से मजबूत नहीं किया गया, तो अतीत का इतिहास जल्द ही महज एक याद बनकर रह जाएगा.
पहले टेस्ट फिर वनडे में शर्मनाक रिकॉर्ड
साल 2024 में गौतम गंभीर ने टीम इंडिया की कोचिंग का जिम्मा संभाला था. इसके कुछ ही महीने बाद टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ घर में व्हाइट वॉश होकर अपने नाम पर एक शर्मनाक रिकॉर्ड स्थापित किया था. गंभीर के कोचिंग में भारत पहली बार घर में टेस्ट क्रिकेट में व्हाइट वॉश हुई. वहीं, अब 37 साल बाद वनडे क्रिकेट में न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया को सीरीज हराकर आईना दिखाने का काम किया है.