रिपोर्ट: मिथिलेश गुप्ता
यहां-यहां हैं तीन मकान
रेस्क्यू के दौरान मांगीलाल ने खुद स्वीकार किया कि वह किसी से जबरदस्ती पैसा नहीं मांगता था, बल्कि लोग खुद पैसा देते थे. जांच में पता चला कि उसके पास तीन पक्के मकान हैं. पहला भगत सिंह नगर में 16×45 फीट का तीन मंजिला मकान, दूसरा शिवनगर में 600 वर्ग फीट का और तीसरा अलवास में 10×20 फीट का 1 बीएचके मकान, जो शासन ने दिया था.
तीन ऑटो, एक कार
इसके अलावा, उसके पास तीन ऑटो रिक्शा (MP09R0276, MP09R8461, MP09AN3552) हैं, जो किराए पर चलाए जाते हैं. साथ ही, एक स्विफ्ट डिजायर कार (MP09CU7438) भी है, जिसे वह खुद इस्तेमाल करने के बजाय किराए पर देता है. इसके लिए 12000 सैलरी का ड्राइवर भी रखा है.
मां की बात नहीं मानी
मांगीलाल ने यह भी कबूल किया कि उसने सराफा में कई लोगों को ब्याज पर पैसा देता है. रोजाना वसूली के लिए वहां जाता है. इस दौरान लोग उसे भीख में अतिरिक्त पैसे दे देते हैं. उसके घर पर फिलहाल उनकी मां रहती है, जिन्होंने कई बार मांगीलाल को भिक्षावृत्ति छोड़ने की सलाह दी, लेकिन उसने कभी बात नहीं मानी.
नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया, सराफा क्षेत्र से लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके आधार पर भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान के तहत रेस्क्यू किया गया. आगे की कार्रवाई शासन के निर्देशानुसार होगी. जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने कहा, ऐसी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और भिक्षावृत्ति करने या बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. फिलहाल, मांगीलाल उज्जैन के राहत केंद्र में है.
यह इंदौर में पहला ऐसा मामला नहीं है. इससे पहले भी एक महिला भिक्षुक से हजारों रुपये बरामद हुए थे. कुछ भिक्षुक तो नगर निगम में संपत्ति एवं जलकर भी जमा करते पाए गए हैं. ऐसे लोग मजबूरी का नाटक कर लोगों की भावनाओं का शोषण करते हैं, जबकि हकीकत में वे करोड़ों की संपत्ति के मालिक होते हैं.