शहडोल जिले में रेत माफिया पूरी तरह बेलगाम हो गए हैं। वैध ठेका न होने का फायदा उठाकर सोन नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत का उत्खनन और तस्करी की जा रही है। इस पर लगाम कसने के लिए खनिज विभाग ने Google Earth के जरिए निगरानी शुरू कर दी है। बता दें कि कुछ द
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जिले में रेत का कोई वैध ठेका नहीं होने के कारण माफिया संगठित होकर सक्रिय हो गए हैं। खासतौर पर सोन नदी के तटवर्ती इलाकों में दिन-रात रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। ट्रकों और भारी वाहनों के जरिए यह रेत शहडोल से बाहर रीवा, सतना सहित उत्तर प्रदेश तक पहुंचाई जा रही है।
प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा
अवैध कारोबार से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमला करने से भी नहीं चूक रहे हैं। माफिया खुलेआम कार्रवाई को चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी कार्रवाई के लिए खनिज विभाग ने अब तकनीकी निगरानी की रणनीति अपनाई है। विभाग अपने कार्यालय से ही Google Earth की सैटेलाइट इमेजरी और लाइव लोकेशन के जरिए संदिग्ध क्षेत्रों पर नजर रख रहा है। जिन इलाकों में रेत उत्खनन और परिवहन की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं, वहां तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।
जिले के अंतिम छोर के इलाके जैसे देवलौंद, ब्यौहारी, जयसिंहनगर, गोहपारू, बुढार और अमलाई इस समय रेत माफियाओं के प्रमुख ठिकाने बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में सोन नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है और रात के अंधेरे में इसका परिवहन किया जा रहा है।
खनिज विभाग का दावा है कि तकनीकी निगरानी के जरिए जल्द ही अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।