50000 रुपये खर्च कर महिलाएं बनें बिजनेसवुमन, घर पर बनाएं सोया मिल्क और टोफू, जानें पूरा प्रोसेस

50000 रुपये खर्च कर महिलाएं बनें बिजनेसवुमन, घर पर बनाएं सोया मिल्क और टोफू, जानें पूरा प्रोसेस


Satna News: आज के दौर में जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं, तब घर से शुरू होने वाले छोटे व्यवसाय उनकी आर्थिक मजबूती की सबसे बड़ी ताकत बन रहे हैं. खासकर ऐसे बिजनेस, जिनमें लागत कम हो, जोखिम सीमित हो और मुनाफा स्थिर मिले. ऐसा व्यापार महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है. इसी कड़ी में सोया मिल्क यानी सोयाबीन का दूध और सोया पनीर यानी टोफू की छोटी प्रोसेसिंग यूनिट एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आई है.

महज 50 हजार से 1 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी में महिलाएं घर बैठे इस लघु उद्योग की शुरुआत कर सकती हैं और नियमित आमदनी हासिल कर सकती हैं. हेल्दी फूड की बढ़ती मांग के कारण बाजार में सोया उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है, जिससे यह व्यवसाय भविष्य के लिहाज से भी काफी सुरक्षित माना जा रहा है.

कम लागत में शुरू होने वाला लाभकारी व्यवसाय
सोया मिल्क और टोफू यूनिट की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है. 30 से 50 हजार रुपये में 50 से 100 लीटर प्रति घंटा क्षमता वाली सोया मिल्क मशीन आसानी से उपलब्ध हो जाती है. इसके अलावा 10 से 20 हजार रुपये में कच्चा माल यानी सोयाबीन और अन्य जरूरी सामग्री जुटाई जा सकती है. थोड़े से बर्तन, गैस चूल्हा और साफ-सुथरी जगह के साथ यह यूनिट घर के एक कमरे से भी शुरू की जा सकती है. कम बिजली और पानी की जरूरत होने के कारण इसका संचालन खर्च भी बेहद कम रहता है.

सोयाबीन से ज्यादा उत्पादन, ज्यादा मुनाफा
सोयाबीन इस व्यवसाय का सबसे मजबूत आधार है क्योंकि यह लगभग हर क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध हो जाता है. 1 किलो सोयाबीन से करीब 7 से 8 लीटर सोया मिल्क तैयार किया जा सकता है. इसी सोया मिल्क से टोफू बनाकर उसकी कीमत और मुनाफा दोनों बढ़ाए जा सकते हैं. बाजार में सोया मिल्क और टोफू की कीमत सामान्य दूध और पनीर की तुलना में अधिक होती है, जिससे प्रति दिन अच्छी कमाई संभव है. स्थानीय बाजार, जिम, होटल, रेस्टोरेंट और हेल्थ कॉन्शस ग्राहकों के बीच इन उत्पादों की अच्छी मांग रहती है.

बढ़ती हेल्दी फूड की डिमांड से मिलेगा बाजार
आज लोग तेजी से हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ रहे हैं. प्रोटीन से भरपूर, कोलेस्ट्रॉल फ्री और शाकाहारी विकल्प होने के कारण सोया मिल्क और टोफू की मांग शहरों के साथ-साथ कस्बों में भी बढ़ रही है. डायबिटीज, वजन नियंत्रण और फिटनेस से जुड़े लोग इन उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं. यही कारण है कि इस व्यवसाय में बाजार की कमी नहीं है और सही गुणवत्ता के साथ ग्राहक आसानी से जुड़ जाते हैं.

PMFME योजना से मिलेगी सरकारी मदद
इस व्यवसाय को और आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना बड़ा सहारा बन रही है. इस योजना के तहत माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है. इससे मशीन खरीदने, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में मदद मिलती है. लोकल 18 को जानकारी देते हुए उन्नयन विकास सोहावल विकासखंड की प्रभारी अधिकारी सुधा पटेल ने बताया कि सोया मिल्क और टोफू की यूनिट आज के समय में एक मुनाफे का सौदा है क्योंकि बाजार में सोया पनीर की मांग तेजी से बढ़ रही है.

महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मजबूत राह
कम जगह, कम मेहनत और सरकारी सहयोग के साथ सोया मिल्क और टोफू यूनिट महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का मजबूत माध्यम बन सकती है. घर से काम करने की सुविधा, परिवार के साथ समय और नियमित आमदनी जैसे फायदे इस व्यवसाय को खास बनाते है. सही योजना और मेहनत के साथ यह लघु उद्योग महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बना सकता है बल्कि उन्हें एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान भी दिला सकता है.



Source link