इंदौर में छुपा है साड़ियों का स्वर्ग, 3 हजार में मिलती है बुनकरी साड़ी, देखने के बाद खरीदने से रोक नहीं पाएंगी

इंदौर में छुपा है साड़ियों का स्वर्ग, 3 हजार में मिलती है बुनकरी साड़ी, देखने के बाद खरीदने से रोक नहीं पाएंगी


Last Updated:

Indore Saree Market: इंदौर न सिर्फ खान-पान बल्कि पारंपरिक साड़ियों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां का यह खास बाजार ओरिजिनल माहेश्वरी, चंदेरी और इंदौरी साड़ियों का गढ़ माना जाता है. हथकरघा पर बुनी इन साड़ियों की कीमत मात्र 3 हजार रुपये से शुरू होती है. बेहतरीन बुनकरी, खूबसूरत डिजाइन और शुद्ध कपड़े की वजह से महिलाएं इन्हें देखते ही खरीदने से खुद को रोक नहीं पातीं.

इंदौर: इंदौर में मिलने वाली महेश्वरी और चंदेरी साड़ियों का क्रेज़ इतना है कि राजवाड़ा में आने वाले देश विदेश के पर्यटन इसकी ओर खींचे चले आते हैं. यहां की बुनकरी का जादू कुछ ऐसा है कि जो एक बार इन साड़ियों को देख ले, वो इनका कायल हो जाता है मालवा के ब्लैक कॉटन के सिंगल धागे पर हाथ से बुनी गई इन साड़ियों की सादगी और डिजाइन देखते ही बनती है.

राजवाड़ा महल के ठीक पास‌ आपको माहेश्वरी साड़ी की ढेरों दुकान दिख जाएंगी यह इन साड़ियों का सबसे बड़ा हब है. करीब 50 साल से यहां मौजूद लक्षमी साड़ी के मोनू माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियों के लिए जाना पहचाना नाम है इसके मोनू खत्री ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसे हाथ से बुना जाता है और महेश्वरी चंदेरी इंदौरी तीनों ही साड़ियों की डिजाइन में आपको फर्क साफ दिखाई देता है. इसे सबसे ज्यादा पर्यटक पसंद करते हैं खासकर पुणे और महाराष्ट्र से आए लोगों में महेश्वरी साड़ियों की काफी डिमांड रहती है. ‌

महेश्वरी साड़ी प्लैन बॉर्डर और रिवर्सेबल पहचान 
महेश्वरी साड़ियों की शुरुआत 18वीं सदी में इंदौर की महारानी देवी अहिल्याबाई होलकर ने की थी. उन्होंने सूरत और मांडू से बुनकरों को बुलवाया ताकि वो अपनी रियासत के लिए कुछ खास तैयार करवा सकें. ये मुख्य रूप से कॉटन-सिल्क के मेल से बनती हैं. इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका पल्लू और बॉर्डर है जो अक्सर दोनों तरफ‌ से एक जैसी होती है यानी यह रिवर्सेबल साड़ी है जिसे आप दोनों तरफ से पहन सकते हैं.‌

इंदौरी साड़ी 25 हजार रुपए में मिल जाएगी
सबसे खास बात यह है कि बनारसी साड़ियों की तरह बहती हुई साड़ियां बहुत ज्यादा महंगी नहीं मिलती. हालांकि इनकी शुरुआत भी 3000 रुपए से ही होती है. अगर इससे कम में यह मिले तो  मिलावट की संभावना रहती है. मोनू खत्री के अनुसार अच्छी से अच्छी महेश्वरी साड़ी आपको 20 हजार में जबकि चंदेरी और इंदौरी साड़ी 25 हजार रुपए में मिल जाएगी.

हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग और बाघ प्रिंट
इंदौरी साड़ी यह की खासियत है कि यहां पर साड़ियां बत्ती नहीं बल्कि उनके ऊपर प्रिंटिंग कर उन्हें फिनिशिंग दी जाती है.‌ महेश्वर से साड़ी लाकर उनपर हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग और बाघ प्रिंट का काम किया जाता है. मोनू ने हमें बताया कि आजकल इंदौर में टिशू सिल्क’ट और मॉडर्न जियोमेट्रिक प्रिंट्स वाली साड़ियों को इन्दौरी टच के साथ खूब पसंद किया जा रहा है.

बहुत सावधानी से बुनना पड़ता
चंदेरी साड़ी ग्वालियर के पास चंदेरी से आने वाली ये साड़ी अपनी पारदर्शिता और चमक के लिए जानी जाती है. इसमें मर्सराइज्ड कॉटन, सिल्क और जरी का इस्तेमाल होता है. इसका धागा इतना बारीक होता है कि इसे बहुत सावधानी से बुनना पड़ता है. इसमें सबसे खास होती है बूटियां जो हाथ से काढ़ी जाती है और इनके बीच दूरी बहुत सलीके से होती है दिखने में काफी सुंदर होती है.
कैसे करें नकली और असली की पहचान बढ़ती मांग को देखते हुए कई लोग डुप्लीकेट और मिलावट वाली साड़ियां भी बेचते हैं अगर इसका पता लगाना चाहते हैं तो बड़े आसान तरीके से अगर आप इसके कपड़े को हल्का सा जलाते हैं तो ओरिजिनल माहेश्वरी और चंदेरी साड़ी में धागा रख बन जाता है जबकि अन्य नॉयलोन की तरह पिघल जाता है.

About the Author

Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें

homemadhya-pradesh

इंदौर का साड़ी स्वर्ग: बुनकरी की खूबसूरत साड़ियां सिर्फ 3 हजार में



Source link