इतिहास के पन्नों में दर्ज बर्बरता: 40 राउंड फायरिंग से लाल हो गई थी नदी! लॉर्ड फिशर की क्रूरता की कहानी

इतिहास के पन्नों में दर्ज बर्बरता: 40 राउंड फायरिंग से लाल हो गई थी नदी! लॉर्ड फिशर की क्रूरता की कहानी


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Lord Fisher Cruelty: ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में हुई कई दिल दहला देने वाली घटनाओं में यह नदी भी गवाह रही है. लार्ड फिशर के आदेश पर की गई अंधाधुंध फायरिंग में सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान चली गई थी. कहा जाता है कि 40 राउंड गोलियां चलने से नदी का पानी खून से लाल हो गया था. इस अमानवीय घटना की याद में आज यहां एक स्मारक बना है, जो स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों की कहानी बयान करता है.

MP Jaliyanwala Bag Hatyakand. 1930 के आसपास पूरे भारत में महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन अपने पूरे शबाब पर था जिसका खासा असर बुंदेलखंड के छतरपुर में भी देखने को मिला. यहां भी विदेशी चीजों का बहिष्कार और देशी सामानों को कैसे बढ़ावा दिया जाए इसको लेकर आसपास के गांव के लोग नरम दल के लोग लगातार बैठक कर रहे थे.

1930 में छतरपुर जिले के चरण पादुका स्थित उर्मिल नदी के किनारे एक विशाल सभा का आयोजन किया गया था. जिसमें लगभग हजारों की संख्या में लोग जनसभा में शामिल हुए. इस जनसभा में आंदोलनकारी नेताओं ने अपने भाषणों में स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने, लगन भुगतान न करने की अपील की थी.

लार्ड फिशर ने जनसभा को घेर लिया 
चरण पादुका सिंहपुर के जमींदार स्व. ठाकुर प्रसाद तिवारी के पुत्र श्रवण तिवारी लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि 1930 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रेरित होकर बुंदेलखंड में अंग्रेजों द्वारा वसूले जाने वाले मड़ोई कर, चराई कर, लगान के खिलाफ उर्मिल नदी के किनारे आसपास के गांव के लोग इकट्ठे होकर आमसभा कर रहे थे. लेकिन किसी ने इस आमसभा की सूचना नौगांव छावनी के पॉलिटिकल एजेंट लार्ड फिशर को दे दी.

अंधाधुंध फायरिंग से नदी भी लाल पड़ी 
जिसके बाद लार्ड फिशर अपनी फ़ौज लेकर उर्मिल नदी चरण पादुका पहुंच गया. जहां आमसभा कर रहे सभी लोगों को चारों तरफ़ से अंग्रेजों ने घेर लिया‌ और फिर अंधाधुंध फायरिंग शुरू की. श्रवण बताते हैं कि लार्ड फिशर ने 40 राउंड गोलियां चलाईं थी, साथ ही हवाई फायरिंग भी की थी. जिससे लोगों को भागने का मौका ही नहीं मिला. ये जनसभा नदी किनारे हो रही थी.‌लोग भागने के लिए नदी में भी कूद गए लेकिन इसके बाद भी गोलियां चलती रहीं.‌ सैकड़ों लोगों के खून से नदी का पानी भी लाल पड़ गया था.

जमींदार के सहयोग से ही हुई थी आमसभा
श्रवण बताते हैं कि जमींदार स्व. ठाकुर प्रसाद तिवारी ने अंग्रेजी सरकार के टैक्स के विरोध में हो रही आमसभा में सभी शामिल लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था की थी. क्योंकि उस समय ग़रीबी बहुत थी. पिताजी जैसे ओर भी कुछ लोग थे जिन्होंने आमसभा कर रहे लोगों की मदद की थी. चरण पादुका सिंहपुर में 14 जनवरी 1931 की आमसभा की अध्यक्षता गिलौहां के सरजू प्रसाद यादव ने की थी.सभा का संचालन लल्लूराम शर्मा कर रहे थे. गिलौहां निवासी रामदीन के लेख के मुताबिक लार्ड फिशर की गोलीबारी में 100 से ज्यादा लोगों के शहीद होने का जिक्र है.

पंचायत स्तर पर ही हुआ विकास 
क्रूर अंग्रेजों द्वारा सिंहपुर में निर्दोषों की हत्या के बाद इस स्थान को चरण पादुका स्थल नाम दिया गया था.‌इसमें 21 शहीदों के नाम को सामने आए थे, इनके नाम यहां शहीद स्मारक पर अंकित भी किए गए हैं. लेकिन बाकी शहीदों के नाम सामने नहीं आ सके थे. बताया जाता है कि 11 और शहीद थे जिनके नाम का पता ही नहीं चल पाया है. दूसरी तरफ लोगों की मांग के बावजूद भी यहां सरकार या शासन ने शहीद स्मारक का निर्माण नहीं करवाया है. सिंहपुर पंचायत स्तर पर ही इस स्थान को संरक्षित कर यहां छोटा सा स्मारक का स्वरुप दिया गया है.  इस जगह को चरण पादुका शहीद स्थल नाम दिया गया हे

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Jagriti Dubey

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