चने की फसल पर खतरा! फूल आते ही बढ़ता इल्ली का प्रकोप, ₹700 में सुरक्षा चक्र

चने की फसल पर खतरा! फूल आते ही बढ़ता इल्ली का प्रकोप, ₹700 में सुरक्षा चक्र


सतना. रबी सीजन में चने की फसल किसानों के लिए आमदनी का बड़ा सहारा मानी जाती है लेकिन जनवरी–फरवरी का समय आते ही यह फसल सबसे नाजुक दौर में पहुंच जाती है. यही वह वक्त है, जब खेतों में चने के पौधों पर फूल आना शुरू होते हैं और उसी के साथ पाला (ठंड) और फली छेदक इल्ली जैसे खतरनाक कीटों का प्रकोप भी तेज हो जाता है. कई बार किसान इस बदलाव को समय रहते नहीं समझ पाते और जब तक नुकसान दिखाई देता है, तब तक देर हो चुकी होती है. नतीजा यह होता है कि फूल और छोटी फलियां झड़ने लगती हैं, पौधों की बढ़वार रुक जाती है और आखिरकार उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है. अगर आपकी चने की फसल भी इस समय फूल देने की अवस्था में है, तो थोड़ी सी लापरवाही आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, चने की फसल में बुवाई के लगभग 40 से 60 दिनों बाद फूल आना शुरू होते हैं. यह चरण पौधे के जीवन का सबसे संवेदनशील समय माना जाता है क्योंकि इसी दौरान पौधे को ज्यादा पोषण और सुरक्षा की जरूरत होती है. ठंड के कारण पाला पड़ने से जहां फूल झुलस सकते हैं वहीं दूसरी ओर फली छेदक इल्ली (पॉड बोरर) इस समय सबसे ज्यादा सक्रिय हो जाती है. ये इल्लियां फूलों और नई फलियों में छेद कर देती हैं, जिससे न सिर्फ फूल गिर जाते हैं बल्कि बनने वाली फलियों की संख्या भी काफी कम हो जाती है. कई किसान इसे सामान्य मौसमी असर मानकर अनदेखा कर देते हैं लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यही वह वक्त है, जब सही प्रबंधन किया जाए, तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है.

फसल को इल्ली से बचाने का उपाय
लोकल 18 से बातचीत में मध्य प्रदेश के सतना के जय श्री कृषि विकास केंद्र के पेस्टीसाइड एक्सपर्ट अमित सिंह ने बताया कि चना फसल में कीटों का प्रभाव सबसे ज्यादा फूल आने के समय दिखाई देता है. इस दौरान इल्लियां फसल पर हावी हो जाती हैं और अगर समय पर दवा का छिड़काव न किया जाए, तो नुकसान तेजी से बढ़ता है. उन्होंने बताया कि चने की इल्लियों के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी आधारित कीटनाशक काफी प्रभावी और लोकप्रिय है, जिसे कई जगह चने एक्सप्लोड के नाम से भी जाना जाता है. इसके साथ बोरॉन और सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे जिंक, आयरन आदि वाला टॉनिक मिलाकर छिड़काव करने से न सिर्फ इल्ली पर नियंत्रण पाया जा सकता है बल्कि फूल झड़ने से भी बचाव होता है.

छिड़काव का सही समय और तरीका
अमित ने कहा कि पहला छिड़काव तब करना चाहिए, जब खेत में 40–50 प्रतिशत फूल आ जाएं. इसके बाद दूसरा छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर किया जाना चाहिए. इससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है, फूल ज्यादा बनते हैं और फलियों की संख्या भी बढ़ जाती है. उन्होंने आगे कहा कि एक एकड़ खेत के लिए लगभग 400 रुपये का इमामेक्टिन बेंजोएट कीटनाशक और करीब 300 रुपये का हाइड्रोप्रोकोल्ड या पोषक टॉनिक मिलाकर एक ड्रम पानी में घोल तैयार किया जा सकता है. इस घोल का समान रूप से पूरे खेत में छिड़काव करने से इल्लियों पर प्रभावी नियंत्रण मिलता है और फसल सुरक्षित रहती है.

सिंचाई और देखभाल भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ दवा का छिड़काव ही काफी नहीं है बल्कि फूल आने से पहले हल्की सिंचाई भी बेहद जरूरी है. इससे पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है और वे कीटों के हमले को बेहतर तरीके से झेल पाते हैं. साथ ही खेत में खरपतवार न रहने दें और नियमित निरीक्षण करते रहें ताकि किसी भी तरह के कीट प्रकोप को शुरुआती अवस्था में ही पकड़ा जा सके.

समय पर उठाएं कदम
जनवरी-फरवरी में चने की फसल पर थोड़ी सी सतर्कता किसानों को बड़े नुकसान से बचा सकती है. अगर सही समय पर सिंचाई, पोषण और कीटनाशक का इस्तेमाल किया जाए, तो महज 700 रुपये के निवेश से एक एकड़ खेत को इल्ली से काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यही सही वक्त है, जब किसान अपनी फसल पर खास ध्यान दें क्योंकि यही फैसला तय करेगा कि इस सीजन में उनकी पैदावार बढ़ेगी या घट जाएगी.



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