रात का अंधेरा जब सुबह की पहली किरण से छंटने लगता है, तो अक्सर अपने साथ नई उम्मीदें लेकर आता है। लेकिन 25 सितंबर 2022 की सुबह जबलपुर के मझगवां इलाके के लिए एक सनसनीखेज खबर लेकर आई। मझगवां और कूम्हीं परसेल को जोड़ने वाली सुनसान सड़क पर, क्रूर बाबा स्थान के पास लोगों की भीड़ जमा होने लगी थी। हर किसी की आंखें सड़क किनारे पड़ी एक लाश पर टिकी थीं, जिसके चारों ओर बिखरा सामान एक अनकही कहानी बयां कर रहा था। यह एक ऐसे अपराध की कहानी है , जिसकी परतें जब खुलीं तो रिश्ते, धोखे और साजिश का एक ऐसा घिनौना चेहरा सामने आया, जिसने न सिर्फ पुलिस को बल्कि मृतक के परिवार को भी झकझोर कर रख दिया। एक ऐसी मौत, जिसे पहली नजर में हर कोई सड़क हादसा मान रहा था, लेकिन असल में वह एक सोची-समझी हत्या थी, जिसके तार मृतक के अपने ही घर से जुड़े थे। क्या थी ये कहानी…पढ़िए मप्र क्राइम फाइल्स का पार्ट-1 गुमशुदगी और सड़क पर मिली लाश
कहानी की शुरुआत 24 सितंबर 2022 की शाम से होती है। मझगवां का रहने वाला, लगभग 30 वर्षीय आशीष चौधरी कंस्ट्रक्शन का काम करता था। उस दिन वह अपने ससुराल किसी काम से गया हुआ था। शाम को जब उसकी बेटी ने फोन किया, तो उसने बस 10 मिनट में घर पहुंचने की बात कही, लेकिन घंटे बीत गए, रात गहराती गई, और आशीष घर नहीं लौटा। परिवार की चिंता बढ़ने लगी। आशीष के पिता नरोत्तम चौधरी ने अपने भतीजे धर्मेंद्र के साथ मिलकर उसे पूरी रात तलाशा। हर उस जगह फोन किया, जहां उसके होने की उम्मीद थी, लेकिन आशीष का कोई सुराग नहीं मिला। थक-हारकर, अगली सुबह यानी 25 सितंबर को, नरोत्तम चौधरी अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने मझगवां पुलिस थाने पहुंचे। ठीक उसी समय, जब नरोत्तम थाने में अपनी पीड़ा बयां कर रहे थे, मझगवां से कुछ किलोमीटर दूर एक और घटनाक्रम चल रहा था। कूम्हीं परसेल रोड पर सुबह टहलने निकले लोगों ने एक युवक का शव देखा। शव के सिर पर गहरे चोट के निशान थे और पास ही में एक मोटरसाइकिल भी क्षतिग्रस्त हालत में पड़ी थी। पहली नजर में यह एक क्लासिक रोड एक्सीडेंट का मामला लग रहा था। भीड़ में से किसी ने मृतक को पहचान लिया – “यह तो आशीष चौधरी है, पास के गांव का।” खबर आग की तरह फैली और कुछ ही देर में आशीष के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए। सामने अपने बेटे का शव देखकर नरोत्तम चौधरी पर मानो पहाड़ टूट पड़ा। पुलिस की थ्योरी: हादसा या कुछ और?
पुलिस के लिए यह मामला सीधा और सरल लग रहा था। एक दुर्घटनाग्रस्त बाइक, सिर पर चोट, और सुनसान सड़क। सब कुछ एक घातक सड़क दुर्घटना की ओर इशारा कर रहा था। पुलिस ने अपनी जांच इसी एंगल से शुरू की। आशीष के चाचा, जय चौधरी, वह आखिरी शख्स थे जिन्होंने उसे जीवित देखा था। उन्होंने पुलिस को बताया, ‘मैं 24 सितंबर की शाम को कुम्ही बाजार में था। करीब 7 बजे मैं समोसे खा रहा था, तभी मैंने आशीष को पास की शराब की दुकान के पास दो लोगों के साथ खड़े देखा। कुछ देर बाद उसने शराब की बोतलें खरीदीं और अपनी बाइक से चला गया।’ यह बयान पुलिस की ‘एक्सीडेंट थ्योरी’ को और पुख्ता कर रहा था। घटनास्थल से भी पुलिस को शराब की एक खाली बोतल, पानी की बोतल, प्लास्टिक के डिस्पोजल और कुछ अंडे मिले थे। पुलिस ने अनुमान लगाया कि आशीष ने दोस्तों के साथ बैठकर शराब पी होगी और नशे की हालत में बाइक चलाते समय संतुलन खो बैठा होगा, जिससे वह सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरा और सिर में चोट लगने से उसकी मौत हो गई। लेकिन इस कहानी में एक झोल था – आशीष का मोबाइल गायब था। कहानी में ट्विस्ट- प्रेम, धोखा और एक पुराना विवाद
पुलिस जब आशीष के परिवार, दोस्तों और गांव वालों से पूछताछ कर रही थी, तो एक दबी-छुपी कहानी सामने आई। पता चला कि आशीष की पत्नी, साधना चौधरी, का गांव के ही एक दूसरे आदमी के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। कुछ महीने पहले आशीष ने अपनी पत्नी को उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथों पकड़ लिया था। इस बात को लेकर घर में बहुत बड़ा विवाद हुआ था, लेकिन फिर परिवार वालों ने समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया था। यह जानकारी मिलते ही पुलिस के कान खड़े हो गए। हालांकि, साधना का अपने ससुराल वालों के साथ व्यवहार बहुत अच्छा था। वह सबका ख्याल रखती थी और एक आदर्श बहू की तरह रहती थी। तलाशी में मिला पुलिस को सीक्रेट मोबाइल
जांच आगे बढ़ रही थी, लेकिन कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लग रहा था। इसी दौरान पुलिस ने आशीष के घर की तलाशी ली। तलाशी में उन्हें एक ऐसा मोबाइल फोन मिला, जिसके बारे में परिवार में किसी को कोई जानकारी नहीं थी। पूछने पर पता चला कि यह फोन आशीष की पत्नी साधना का था, जिसे वह सबसे छिपाकर इस्तेमाल करती थी। यहां तक कि उसके ससुर नरोत्तम चौधरी को भी इस फोन के बारे में नहीं पता था। पुलिस ने तुरंत फोन जब्त कर लिया और उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकलवाई। CDR ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला था। साधना एक खास नंबर पर लगातार और बहुत लंबी-लंबी बातें करती थी। यह नंबर किसी और का नहीं, बल्कि उसके प्रेमी का था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और खून सने पत्थर
एक तरफ कॉल डिटेल से साधना पर शक गहरा रहा था, तो दूसरी तरफ दो और महत्वपूर्ण सबूत सामने आए। पहला, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जिसने साफ कर दिया कि आशीष की मौत सिर्फ गिरने से नहीं हुई थी, बल्कि उसके सिर को किसी भारी चीज से कुचला गया था। यह ‘भारी चीज’ क्या थी, इसका जवाब भी जल्द ही मिल गया। पुलिस ने घटनास्थल का दोबारा बारीकी से मुआयना किया। जहां आशीष का शव मिला था, उसी गड्ढे में पुलिस को दो बड़े-बड़े पत्थर मिले, जिन पर खून के धब्बे लगे थे। अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी थी। यह हादसा नहीं, बल्कि एक क्रूर हत्या थी। किसी ने पहले आशीष के सिर पर पत्थर से वार किया और फिर उसकी मौत को एक सड़क दुर्घटना का रूप देने के लिए बाइक को क्षतिग्रस्त कर शव के पास फेंक दिया। आरोपों का खेल और पुलिस का शिकंजा
हत्या की पुष्टि होते ही पुलिस ने अपनी जांच की दिशा बदल दी। सबसे पहली संदिग्ध आशीष की पत्नी साधना थी। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ शुरू की। साधना एक शातिर महिला थी। उसने पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। उसने रोते-बिलखते हुए गांव के कुछ लोगों पर हत्या का आरोप मढ़ दिया। पुलिस के पास अब पर्याप्त सबूत थे। साधना का सीक्रेट फोन, उसके प्रेमी से लगातार होती बातचीत, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, सब कुछ एक ही दिशा में इशारा कर रहे थे। पुलिस का शक अब यकीन में बदल चुका था कि आशीष की हत्या के पीछे उसकी पत्नी और प्रेमी का ही हाथ था। क्राइम फाइल्स पार्ट-2 में पढ़िए क्राइम फाइल सीरीज की ये खबर भी पढ़ें… स्विटजरलैंड की महिला से पार्टनर के सामने गैंगरेप:बंदूक लेकर कैंप में घुसे बदमाश, वो मदद के लिए चीखती रही दरिंदे बारी-बारी नोंचते रहे मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज बात उस केस की, जिसने न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। मध्य प्रदेश में विदेशी टूरिस्ट के साथ हुए कांड ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। भारत घूमने निकले स्विट्जरलैंड के कपल ने सोचा भी नहीं होगा कि अगले कुछ महीने उनके लिए कितने डरावने होने वाले हैं। पूरी खबर पढ़ें..
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