सतनाः शहर की जानी-मानी पैथालॉजी लैब पर गलत मेडिकल रिपोर्ट देने का मामला सामने आया है. आरोप है कि जिले के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि (47) की सोनोग्राफ रिपोर्ट में यूटरस यानी बच्चेदानी दर्शा दी. इसके खुलासे पर पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है. स्वास्थ्य विभाग जांच के बाद कार्रवाई की बात कह रहा है तो दूसरी ओर यहां लैब के मालिक पर मीडिया से दुर्व्यवहार करने का आरोप है. इस घटनाक्रम की शिकायत विधिवत स्वास्थ्य विभाग से की गई है. शहर के लोगों ने कहा कि यह पैथोलॉजी सेंटर ना होकर लूट का अड्डा बन गया है. हालांकि मामले के तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य विभाग ने जांच करने और दोषियों पर सख्त एक्शन लेने की बात कही है.
दरअसल, यह मामला सीधे-सीधे मेडिकल सिस्टम की जवाबदेही, जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मरीजों की जान से जुड़े जोखिमों वाला है. यह चौंकाने वाली रिपोर्ट जिले के एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि से जुड़ी बताई जा रही है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है. इस रिपोर्ट ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या निजी डायग्नोस्टिक सेंटर बिना किसी निगरानी के मनमानी कर रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, पेट दर्द की शिकायत पर कराई गई सोनोग्राफी जांच में ऐसा तथ्य सामने आया, जो मेडिकल साइंस के बुनियादी नियमों को भी चुनौती देता है. एक पुरुष मरीज के शरीर में यूटरस दिखा देना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित रूप से जानलेवा मेडिकल फर्जीवाड़ा माना जा सकता है. इस रिपोर्ट के आधार पर गलत इलाज शुरू हो सकता था, जिससे मरीज की स्थिति और बिगड़ सकती थी. यही कारण है कि यह मामला अब केवल एक सेंटर तक सीमित नहीं रहा. इसमें जांच करने वाले डॉक्टर, रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया और निगरानी तंत्र सभी सवालों के घेरे में हैं. मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच का भरोसा दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भरोसा सिस्टम में भरोसा लौटा पाएगा.
क्या है पूरा मामला
यह मामला उचेहरा नगर पंचायत क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, नगर पंचायत के बीजेपी अध्यक्ष निरंजन प्रजापति ने 13 जनवरी को पेट दर्द की शिकायत पर सोनोग्राफी जांच कराई थी. यह जांच सतना स्थित एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में की गई. रिपोर्ट सामने आने पर पता चला कि 47 वर्षीय पुरुष के शरीर में यूटरस दर्शाया गया है.
जांच रिपोर्ट में कैसे सामने आई गंभीर गड़बड़ी
सोनोग्राफी रिपोर्ट में महिला प्रजनन अंग का उल्लेख होना सीधे तौर पर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है. मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी गलती सामान्य तकनीकी चूक नहीं मानी जा सकती.
सामने आई गड़बड़ियां
- पुरुष मरीज की रिपोर्ट में यूटरस का उल्लेख
- जांच के पैरामीटर का गलत चयन
- रिपोर्ट क्रॉस वेरिफिकेशन का अभाव
- मरीज की मेडिकल हिस्ट्री को नजरअंदाज करना
- रिपोर्ट जारी करने से पहले डॉक्टर की समीक्षा पर सवाल
मीडिया के साथ अभद्रता का आरोप
मामले की वास्तविकता जानने जब मीडिया कर्मी डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचे, तो वहां विवाद की स्थिति बन गई. आरोप है कि जांच करने वाले डॉक्टर डॉ. अरविंद सराफ और उनके बेटे अभिनव सराफ ने मीडिया कर्मियों से अभद्र व्यवहार किया. मोबाइल फोन छीने जाने और प्रशासनिक पकड़ का धौंस दिखाकर डराने के आरोप भी सामने आए हैं.
अब तक की घटनाएं
- 13 जनवरी को पेट दर्द के चलते सोनोग्राफी जांच
- पुरुष मरीज की रिपोर्ट में यूटरस दिखाया गया
- रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला उजागर
- मीडिया के पहुंचने पर विवाद और अभद्रता के आरोप
- जिला स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जांच का आश्वासन