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छतरपुर के पूर्व भाजपा विधायक आरडी प्रजापति ने भोपाल में साधु‑संतों और कथावाचकों पर विवादित बयान दिया . उन्होंने कहा कि उनका बयान सामाजिक मर्यादा और महिलाओं के सम्मान के लिए था, न कि संत समाज के खिलाफ . बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक‑सामाजिक बहस तेज हो गई .
छतरपुर. पूर्व भाजपा विधायक और कुछ समय पहले समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे आरडी प्रजापति ने भोपाल के ओबीसी‑एससी‑एसटी महासम्मेलन में साधु‑संतों और कथावाचकों को लेकर दिया गया विवादित बयान फिर दोहराया है. प्रजापति ने कहा कि उनका बयान महिलाओं, बहनों और बेटियों के सम्मान को लेकर था. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने संतों या साधु‑समाज के खिलाफ नहीं कहा, बल्कि उन व्यक्तियों के खिलाफ आवाज उठाई है, जो व्यास पीठ पर बैठकर में महिलाओं को अपमानजनक भाषा से संबोधित करते हैं. बार-बार बहन-बेटियों का अपमान करते हैं, ऐसे लोगों का फूलों से स्वागत नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम किसी जाति, धर्म या संत के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बहन-बेटियों का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते. ऐसा अगर मेरे पिता, मेरा बेटा या मैं स्वयं करूं तो वैसी ही सजा मिलनी चाहिए.
प्रजापति के इस बयान ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बहस तेज कर दी है, बल्कि सामाजिक संगठनों और धार्मिक पटल पर भी गहरा प्रभाव डाला है. उन्होंने कहा कि कुछ कथावाचक मंचों से महिलाओं को भोग या उपभोग की वस्तु जैसा कह रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैंने केवल 5 बाबाओं का नाम लिया. इनके वीडियो सोशल मीडिया में हैं और इसमें इन कथावाचकों ने व्यास पीठ से बहन-बेटियों के लिए अपमानजनक शब्द कहे हैं. संत समाज खुद तय करे कि क्या ऐसी बातें कहना चाहिए, क्या यह जरूरी है? समाज की मर्यादा और धार्मिक गरिमा के खिलाफ है. उनके अनुसार ऐसा बयान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता.
पांच कथावाचकों पर दिया बयान, सत्य और मर्यादा की रक्षा हो
आरडी प्रजापति ने विशेष रूप से पांच कथावाचकों और संतों का नाम लिये जाने की बात कही और कहा कि वे सत्य और मर्यादा की रक्षा के लिए बोल रहे हैं . उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संत कथाओं के दौरान महिलाओं को “उत्पादन या मनोरंजन” की वस्तु के रूप में पेश करते रहे हैं, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है. विरोध‑प्रदर्शन तेज हैं और राजनीतिक दलों, संगठनों तथा सामाजिक समूहों द्वारा प्रजापति के बयान की आलोचना जारी है. संत समाज ने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान करार दिया है.
- प्रजापति ने कहा कि उनका बयान महिलाओं के सम्मान के पक्ष में था.
- उनका लक्ष्य उन कथावाचकों पर था जो अपमानजनक टिप्पणी करते हैं.
- बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और विवाद बढ़ा.
- धार्मिक संगठनों ने टिप्पणी को मर्यादा के विरुद्ध बताया.
- कुछ समुदायों ने राजनीति में भाषा की मर्यादा पर सवाल उठाये.
ऐसे लोगों का स्वागत फूलों की माला से नहीं किया जाए
उन्होंने कहा कि जब धर्म और आस्था के मंच से ऐसे शब्द निकलते हैं, तो उसका असर समाज पर गहरा पड़ता है. खास बात यह है कि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब बेटियों और महिलाओं के सम्मान पर हमला होता है, तब खुद बहन-बेटियां और उनके समर्थक सामने क्यों नहीं आते. इसी मुद्दे को लेकर आरडी प्रजापति ने दो टूक कहा कि ऐसे लोगों का स्वागत फूलों की माला से नहीं किया जाना चाहिए.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें