Explained: सानिया जैसी साइना… भारत में यूं बदली बैडमिंटन की तस्वीर, महिला खेल की रियल गेम-चेंजर

Explained: सानिया जैसी साइना… भारत में यूं बदली बैडमिंटन की तस्वीर, महिला खेल की रियल गेम-चेंजर


Saina Nehwal Retirement: भारतीय खेल जगत की शीर्ष नामों में से एक साइना नेहवाल ने अपने सुनहरे करियर पर विराम लगा दिया है. उन्होंने प्रोफेशनल बैडमिंटन से अलग होने का फैसला किया. भारतीय खेल इतिहास में कुछ ही महिला खिलाड़ियों ने अपना नाम बनाया है और उनमें एक साइना नेहवाल है. इस दिग्गज खिलाड़ी ने भारत में बैडमिंटन की दिशा और दशा दोनों बदल दी. उन्होंने इस खेल में क्रांति लाने का काम किया और इसी का नतीजा है कि आज भारत के पास इस खेल में एक से बढ़कर एक महिला प्लेयर्स हैं.

सानिया और क्रिकेट आइकन्स की तरह छाईं साइना

जिस तरह सानिया मिर्जा ने भारत में महिलाओं के टेनिस की पहचान और लोकप्रियता को बदला, उसी तरह साइना ने बैडमिंटन को फिर से परिभाषित किया. इसे एक खास ओलंपिक खेल से बदलकर घर-घर की उम्मीद बना दिया. उनका रिटायरमेंट एक ऐसे युग का अंत है जिसने भारत को एक ग्लोबल बैडमिंटन पावर के रूप में उभरने की नींव रखी. आज स्थिति ऐसी है कि बैडमिंटन का सपना देखने वाली लड़कियों के पास साइना के पोस्टर हैं. वे क्रिकेट आइकन सचिन तेंदुलकर महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा की तरह साइना की तस्वीर अपने कमरे में लगा रही हैं.

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हरियाणा से हैदराबाद तक

साइना नेहवाल का सफर हरियाणा से शुरू हुआ. एक ऐसा राज्य जो अब बेहतरीन एथलीट पैदा करने के लिए जाना जाता है, लेकिन जब वह बड़ी हो रही थीं, तब यह इतना मशहूर नहीं था. उनके परिवार का हैदराबाद जाना फैसले वाला साबित हुआ. यहीं पर सही कोचिंग और बेहतर सुविधाओं के तहत साइना की कच्ची प्रतिभा को बेहतरीन मुकाबले के लिए तैयार किया गया. पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में ट्रेनिंग लेते हुए उन्होंने अनुशासन, लगातार फिटनेस और मानसिक मजबूती पर काम किया और करियर में सफलता हासिल की. 

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2012 में ओलंपिक पदक से रचा इतिहास

2000 के शुरुआती दशक में ऐसा लग रहा था कि भारत बैडमिंटन में कभी-कभी किसी को चौंकाने वाला देश है. इसके मध्य में साइना का सफर हुआ और उनकी शुरुआती इंटरनेशनल सफलता ने यह संकेत दिया कि भारत बैडमिंटन में कभी-कभी शानदार प्रदर्शन के अलावा लगातार मुकाबला कर सकता है. लंदन 2012 में उनका ओलंपिक कांस्य पदक ऐतिहासिक था, जिससे वह बैडमिंटन में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने पारंपरिक रूप से एशियाई देशों के दबदबे वाले खेलों में भारतीय महिलाओं के पोडियम पर खड़े होने को सामान्य बना दिया.

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नंबर-1 बन तोड़ा चीन का घमंड

2015 में वर्ल्ड नंबर 1 पर पहुंचना सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि एक दबदबे की कहानी थी. ऐसे समय में जब महिला बैडमिंटन में चीनी दबदबा अटूट लग रहा था, साइना की टॉप पर मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलीट शारीरिक और मानसिक रूप से किसी का भी मुकाबला कर सकते हैं. साइना से पहले भारत में बैडमिंटन ज़्यादातर प्रकाश पादुकोण और पुलेला गोपीचंद के इर्द-गिर्द घूमता था. वे आइकॉन तो थे, लेकिन अपवाद थे. साइना के बाद यह एक सिस्टम बन गया. पूरे भारत में युवा लड़कियों ने रैकेट उठाना शुरू कर दिया. उन्हें साइना में एक रोल मॉडल दिखा जो उन्हीं की तरह दिखती थी, उनकी भाषा बोलती थी और शांत आत्मविश्वास के साथ खुद को पेश करती थी.

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सानिया जैसा साइना का सफर

जैसे सानिया मिर्जा ने भारतीय महिलाओं के लिए टेनिस को एक सपने जैसा बनाया, वैसे ही साइना ने बैडमिंटन को फैशनेबल, टीवी पर दिखाए जाने वाला और कमर्शियली फायदेमंद बनाया. एंडोर्समेंट मिलने लगे, लीग्स बढ़ीं, अकादमियां कई गुना बढ़ गईं और माता-पिता बैडमिंटन को सिर्फ बेटों के लिए नहीं, बल्कि बेटियों के लिए भी एक सही करियर ऑप्शन के तौर पर देखने लगे. साइना का करियर भी मुश्किलों से लड़ने की एक मिसाल था. पुरानी चोटों, खराब फॉर्म और नई युवा खिलाड़ियों के आने से उनकी लंबी पारी की परीक्षा हुई. फिर भी वह कई ओलंपिक साइकिल तक प्रासंगिक बनी रहीं और शारीरिक सीमाओं के बढ़ने के बावजूद अपने खेल को बदलती रहीं. चोटों और मानसिक संघर्षों के बारे में खुलकर बात करने की उनकी इच्छा ने उनकी पब्लिक इमेज को और गहरा बनाया. भारत की पहली महिला बैडमिंटन सुपरस्टार ने शायद अपना आखिरी मैच खेल लिया हो, लेकिन उनके असर की गूंज आने वाले दशकों तक देश भर के कोर्ट्स में सुनाई देती रहेगी.

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साइना की उपलब्धियां

ओलंपिक: 2012 लंदन ओलंपिक में विमेंस सिंगल्स में ब्रॉन्ज मेडल.
वर्ल्ड चैंपियनशिप: 2014 और 2016 में विमेंस सिंगल्स में ब्रॉन्ज मेडल.
उबेर कप: 2014 और 2016 में विमेंस टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल.
कॉमनवेल्थ गेम्स: 2010 और 2018  विमेंस टीम इवेंट में गोल्ड मेडल. 2018 में मिक्स्ड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल. 2010 में मिक्स्ड टीम इवेंट में सिल्वर मेडल और 2006 में मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल.
एशियन गेम्स: 2010, 2016 और 2018 में विमेंस सिंगल्स में ब्रॉन्ज मेडल.

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साइना को सम्मान
2008:
बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन द्वारा मोस्ट प्रॉमिसिंग प्लेयर ऑफ द ईयर अवार्ड
2009: अर्जुन अवार्ड
2010: पद्म श्री
2009-2010: मेजर ध्यान चंद खेल रत्न
2016: पद्म भूषण



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