Shivpuri News: पर्दे के पीछे से आगे आईं शिवपुरी की महिलाएं, जैविक खाद बनाकर बनाई पहचान

Shivpuri News: पर्दे के पीछे से आगे आईं शिवपुरी की महिलाएं, जैविक खाद बनाकर बनाई पहचान


शिवपुरीः ससुराल की चारदीवारी, घूंघट का पर्दा और समाज की बंदिशों के बावजूद शिवपुरी जिले की ग्रामीण महिलाओं ने वह कर दिखाया है. जिसे कभी पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था. जिले के पिछोर विकासखंड के नांगली गांव की महिलाओं ने जैविक खाद निर्माण में न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि कृषि क्षेत्र में पुरुषों से आगे निकलकर मिसाल भी कायम की है.

घर से बाहर कदम रखते ही सास-ससुर के ताने, समाज की बातें और हालात की मार हर मोड़ पर चुनौतियां थी. लेकिन इन महिलाओं का हौसला कमजोर नहीं पड़ा. मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर वे लगातार आगे बढ़ती रहीं. आज उनकी सफलता पर वही लोग गर्व कर रहे है. जिन्होंने कभी उन पर भरोसा नहीं किया था. सफलता के साथ रिश्तों में भी मिठास आई है और परिवार का सहयोग भी बढ़ा है.

DAP खाद से ज्यादा दमदार खाद
ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने ऐसी जैविक खाद तैयार की है जो रासायनिक DAP खाद से अधिक गुणकारी मानी जा रही है. यह खाद पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से बनाई गई है, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और फसल को आवश्यक पोषक तत्व संतुलित रूप में मिलते है. किसानों का कहना है कि इस खाद के उपयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार देखा जा रहा है. खास बात यह है कि इस खाद का उपयोग केवल खेतों में ही नहीं, बल्कि सब्जी, फल और अन्य पौधों में भी किया जा सकता है. इससे लागत कम होती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है.

रासायनिक खाद सस्ता ऑर्गेनिक खाद
किसान फसलों में उपयोग के लिए बाजार से कई प्रकार की रासायनिक खाद खरीदते है. जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और भूमि की उर्वर शक्ति भी धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है. महिलाओं ने बताया कि DAP जैसी रासायनिक खाद बाजार में काफी महंगी मिलती है, जबकि ऑर्गेनिक तरीके से तैयार की गई वर्मी कम्पोस्ट खाद मात्र ₹15 प्रति किलो की दर से उपलब्ध है. यह खाद न केवल सस्ती है, बल्कि मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाकर फसल उत्पादन में भी वृद्धि करती है. इससे किसानों की लागत कम होती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है.

जैविक खाद तैयार करना शुरू किया
नांगली गांव की रचना जाटव ने बताया कि उन्होंने गांव की कई महिलाओं के साथ मिलकर ऑर्गेनिक तरीके से जैविक खाद तैयार करना शुरू किया. इस प्रक्रिया में महिलाएं पहले बर्निंग कंपोस्ट तैयार करती है. जिसके बाद पूरी तरह प्राकृतिक विधि से खाद बनाई जाती है. खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक कीटनाशक या दवाओं का उपयोग नहीं किया जाता. जिससे यह खाद जैविक खेती के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है. यह खाद आप किसी भी फसल में दे सकते है.

विभिन्न सामग्री तैयार की जा रही
इसी प्रकार भारतीय लोधी बताती है कि उनके द्वारा इसी समूह से जुड़कर जैविक खाद बनाने के लिए ऑर्गेनिक तरीके से विभिन्न सामग्री तैयार की जा रही है. इस समूह में कई महिलाएं शामिल है जो मिलकर खाद का निर्माण कर रही है. ये महिलाएं जैविक खाद के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण और पर्यावरण-अनुकूल खाद उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है. ये महिलाएं हर स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है और आत्मनिर्भर बनते हुए अपनी आजीविका भी सुदृढ़ कर रही है.

घर पर ही हो गई इनकम शुरू
महिलाओं ने बताया कि अब वे घर पर रहकर ही घरेलू कामों के साथ-साथ जैविक खाद तैयार कर आमदनी प्राप्त कर रही है. कई महिलाओं की मासिक आय ₹8 से ₹10 हजार तक पहुंच गई है. उनका कहना है कि अब उन्हें किसी बाहर की नौकरी करने की जरूरत नहीं पड़ती. जैसे ही घरेलू काम से फुर्सत मिलती है, वे खाद बनाने के कार्य में जुट जाती है. इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बनी हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है.



Source link