किराना दुकानदार और कौओं में 12 साल से चल रहा गजब दोस्ताना, जानें माजरा

किराना दुकानदार और कौओं में 12 साल से चल रहा गजब दोस्ताना, जानें माजरा


Last Updated:

Sagar News: सागर के महेंद्र रैकवार की कौओं से दोस्ती हो गई है. वह पिछले 12 साल से कौओं को नमकीन खिला रहे हैं और पानी पिला रहे हैं. कौवे भी महेंद्र के दुकान खोलने का इंतजार करते हैं.

सागर. आपने इंसानों की जानवरों से, पशुओं से, पक्षियों से दोस्ती के होने के बारे में कई किस्से सुने होंगे लेकिन मध्य प्रदेश के सागर के रहली में महेंद्र रैकवार का कौओं से गजब का याराना बन गया है क्योंकि पितृपक्ष के अलावा लोग जिन काले कौओं का बोलना भी अशुभ मानते हैं, उन्हीं कौओं को महेंद्र बेहद प्रेम करते हैं और उन्हें रोजाना नमकीन खिलाते हैं और पानी पिलाते हैं. पिछले 12 साल से यह उनकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है. महेंद्र किराना दुकान चलाकर अपना परिवार पाल रहे हैं. वह दुकान खोलने से पहले जिस तरह से भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करते हैं, ठीक उसी तरह जब तक वह कौओं को नमकीन नहीं खिला देते, तब तक वह अपनी दुकान से सामान बेचना शुरू नहीं करते हैं. महेंद्र का तो यह भी कहना है कि जब तक वह भोलेनाथ की पूजा नहीं कर लेते, तब तक कौवे भी नमकीन का एक दाना नहीं खाते हैं.

महेंद्र रैकवार लोकल 18 को बताते हैं कि वह पिछले 15 साल से किराना दुकान चला रहे हैं और 12 साल से कौओं को रोजाना नमकीन खिला रहे हैं. वह सुबह 9 बजे दुकान खोलने के लिए आते हैं. कौवे शटर खोलने की आवाज सुनते हैं, तो सामने पेड़ पर आकर बैठ जाते हैं. वह जैसे ही नमकीन डालकर ढक्कन बजाते हैं, कौवे नीचे आ जाते हैं. उन्हें नमकीन खिलाना और पानी पिलाना उनकी दिनचर्या में शामिल है. महेंद्र की दुकान शहर के बीच स्थित है. स्थानीय लोग कहते हैं कि महेंद्र और इन कौओं में दोस्ती हो गई है, इसलिए वह दिनभर में कभी भी नमकीन डालकर ढक्कन बजा देते हैं, तो वे आवाज सुनकर ही आ जाते हैं. कौओं को बुलाने का यह तरीका जो भी देखता है, वह देखता ही रह जाता है.

कैसे हुई अनोखी दोस्ती की शुरुआत?
इस अनोखी दोस्ती की शुरुआत को लेकर महेंद्र बताते हैं कि वह शुरू से ही भगवान शिव पर बहुत विश्वास रखते हैं. 10-12 साल पहले की बात होगी कि जब भोलेनाथ का जो प्रसाद होता था, तो उसको उठाकर वह यहां डाल देते थे. एक-दो कौवे आते थे और प्रसाद खाते थे. उन्होंने यह देख कौओं को प्रसाद देना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे कौओं की संख्या बढ़ने लगी लेकिन प्रसाद उतना हो नहीं पाता था, तो फिर वह अपनी दुकान से थोड़ी-बहुत नमकीन भी डालने लगे. इस तरह से अब रोजाना 100 से अधिक कौवे आते हैं. कौओं को पानी पिलाने के लिए अलग से एक स्टील की बाल्टी भी रखी हुई है. वे नमकीन खाने के बाद पानी पीते हैं और उड़ जाते हैं. इसके बाद वे पूरे दिन कहीं दिखाई नहीं देते. दूसरे दिन फिर सुबह जैसे ही दुकान खुलने का समय होता है, तो वे आ जाते हैं.

पितृपक्ष में आते हैं लोग
उन्होंने आगे कहा कि लोग केवल पितृपक्ष में कौओं को भोजन खिलाते हैं लेकिन वह 12 महीने नमकीन के रूप में दाना खिला रहे हैं. ऐसा करने से उन्हें आत्म संतुष्टि मिलती है. भगवान की और पितरों की कृपा से उनकी दुकान अच्छी चल रही है. परिवार में कोई परेशानी नहीं है. इनको नमकीन खिलाने के लिए वह अलग से पैकेट लेकर आते हैं. पितृपक्ष में जब किसी को कहीं कौवे नहीं मिलते हैं, तो लोग हमारे यहां आकर चबूतरे पर कौओं को श्राद्ध का भोजन खिलाने आते हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

homeajab-gajab

किराना दुकानदार और कौओं में 12 साल से चल रहा गजब दोस्ताना, जानें माजरा



Source link