ना पैसे थे, ना संसाधन… फिर भी मजदूरी कर बना नेशनल खिलाड़ी, संघर्ष ऐसी कि आंखें नम हो जाए!

ना पैसे थे, ना संसाधन… फिर भी मजदूरी कर बना नेशनल खिलाड़ी, संघर्ष ऐसी कि आंखें नम हो जाए!


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Burhanpur Kurash National Player: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के लालबाग क्षेत्र में रहने वाले कुरास के नेशनल खिलाड़ी की कहानी से आज हम आपको रूबरू करने जा रहे हैं. राम महाजन बचपन से ही खेल में आगे रहते थे. उनके पास खेल के लिए राशि की व्यवस्था नहीं हो पाती थी. वह दूसरों के यहां पर काम कर खेल की सामग्री जुटाते थे और उनके क्षेत्र के लोग भी उनको इस काम के लिए मदद करते थे. आज वह कुरास खेल में नेशनल खिलाड़ी हैं. आइए जानते हैं उनके संघर्ष की कहानी.

मोहन ढाकले/बुरहानपुर.मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के लालबाग इलाके से निकलकर नेशनल लेवल तक पहुंचने वाले कुरास खिलाड़ी राम महाजन की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. गरीबी, संसाधनों की कमी और हालातों से जूझते हुए राम ने वो कर दिखाया, जो आज हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन गया है.

राम महाजन बचपन से ही खेलों के शौकीन रहे. मिट्टी के मैदान, खुले ग्राउंड और सीमित साधनों में खेलते हुए उन्होंने कुरास खेल को अपना जुनून बना लिया. लेकिन जुनून के साथ सबसे बड़ी परेशानी थी पैसों की. खेल का सामान खरीदने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था.

मजदूरी करके जुटाए पैसे, सपने नहीं छोड़े
राम बताते हैं कि उन्होंने दूसरों के यहां छोटे-मोटे काम किए, मजदूरी की और उसी पैसे से खेल का सामान खरीदा. कई बार हालात ऐसे रहे कि या तो पेट भरने का सवाल था या खेल का. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उनके इलाके के कुछ लोगों और गुरुओं ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और जितना हो सका, मदद की. राम कहते हैं कि अगर मेरे गुरु और मोहल्ले के लोग साथ न देते, तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता.

गुरु और समाज बना ताकत
जब राम के गुरुओं ने उनमें कुरास की काबिलियत देखी, तो उन्होंने तकनीकी ट्रेनिंग दी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. बिना किसी अकादमी, बिना महंगे कोच और बिना सुविधाओं के राम ने लगातार मेहनत की. इसी मेहनत का नतीजा रहा कि आज वे कुरास खेल में नेशनल खिलाड़ी बन चुके हैं.

अब बच्चों को मुफ्त सिखा रहे हैं खेल
नेशनल खिलाड़ी बनने के बाद राम ने तय किया कि अब वे अपने इलाके के बच्चों के लिए वही करेंगे, जो कभी किसी ने उनके लिए किया था. वे गुजराती समाज मार्केट और आसपास के इलाकों में गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को निशुल्क कुरास ट्रेनिंग देते हैं. जहां भी मैच या ट्रेनिंग कैंप लगता है, वे बच्चों को लेकर पहुंचते हैं, ताकि उन्हें बड़े मंच का अनुभव मिल सके. राम का एक ही सपना है कि मेरे इलाके का हर प्रतिभाशाली बच्चा बड़ा मैदान देखे, नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर खेले.”

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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ना पैसे थे, ना संसाधन… फिर भी मजदूरी कर बना नेशनल खिलाड़ी, पढ़ें कहानी!



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