भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में 122 मरीज पहुंचे, जिनमें डायरिया के 3 नए मरीज शामिल थे। अस्पतालों में अभी भी 7 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। उधर, गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के मामलों में बढ़ोतरी के बाद केंद्र और राज्य सरकार अलर्ट पर है। आईडीएसपी और डब्ल्यूएचओ से जुड़ी विशेषज्ञ टीम मंगलवार को इंदौर पहुंची। दिल्ली, कोलकाता और भोपाल से आए अधिकारियों ने सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति का जायजा लिया। टीम ने एमवाय अस्पताल, चाचा नेहरू अस्पताल और बॉम्बे अस्पताल का दौरा किया। न्यूरो फिजिशियन डॉ. अर्चना वर्मा सहित अन्य डॉक्टरों से मरीजों की हालत, इलाज और लक्षणों के बारे में जानकारी ली गई। इलाज और सैंपल की जांच इंदौर में जीबीएस के 11 मरीज भर्ती हैं। इनमें 7 मरीज चाचा नेहरू अस्पताल में हैं। इनमें से 2 बच्चों को वेंटिलेटर पर रखा है। टीम ने एपिडेमियोलॉजिकल जांच के लिए सैंपल भी जुटाए हैं। इंदौर के अलावा मनासा, नीमच, बैतूल, खंडवा, धार और हातोद से भी जीबीएस के मरीज सामने आए हैं। टीम वहां भी जांच के लिए पहुंची है। शरीर का इम्यून सिस्टम नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है विशेषज्ञों के मुताबिक जीबीएस दुर्लभ गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम नसों पर हमला करने लगता है। बीमारी की शुरुआत आमतौर पर पैरों से होती है और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ती है। गंभीर स्थिति में जब असर सांस से जुड़ी मांसपेशियों तक पहुंचता है, तो मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है।
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