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Bhopal Crime Data News: भोपाल में अपराध घटने के पुलिस दावों पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। समाजसेवियों और फरियादियों का आरोप है कि कई मामलों में FIR दर्ज ही नहीं की जा रही, बल्कि केवल लिखित शिकायत लेकर महीनों जांच के नाम पर मामले दबा दिए जाते हैं। FIR न होने से अपराध कागज़ों में कम दिखते हैं, जबकि आरोपी खुलेआम घूमते रहते हैं और फरियादी न्याय के लिए भटकता रहता है।
शिवकांत आचार्य/भोपाल. शहर में अपराध लगातार घट रहा है… ये हम नहीं कह रहे, ये कह रहे हैं पुलिस के सरकारी आंकड़े. अगर FIR ही दर्ज नहीं होगी, तो अपराध आएगा कहां से? क्राइम कम दिखाने का वो गजब फार्मूला, जिसमें फरियादी महीनों न्याय के लिए भटकता है और आरोपी खुलेआम घूमते रहते हैं. एक तरफ फरियादी न्याय की चौखट पर भटक रहा है, तो दूसरी तरफ आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन कागज़ों में थाना अपराध मुक्त बना हुआ है.
पहले ये देख लीजिए…
| शिकायत | दिनांक | स्टेटस |
| छवि धूमिल करने की शिकायत | 20/08/2025 | जांच जारी |
| धोखाधड़ी एंव फर्जी रजिस्ट्री | 26/10/2025 | जांच जारी |
| अनाधिक्रत कॉन्ट्रेक्ट देना | 03/08/2025 | जांच जारी |
अपराध नियंत्रण का नया मॉडल
शिकायतकर्ता और समाजसेवी महेश वशिष्ठ के अनुसार, थाना क्षेत्र में अपराध नियंत्रण का एक मॉडल सामने आया है. यहां फरियादी की FIR दर्ज करने के बजाय उससे सिर्फ लिखित शिकायत ली जाती है. फिर शुरू होती है जांच… जो 6 महीने नहीं, कई बार उससे भी ज्यादा चलती है. अन्य शिकायतकर्ता ने कहा कि FIR दर्ज नहीं, तो अपराध दर्ज नहीं और जब अपराध दर्ज नहीं, तो आंकड़े अपने आप ही शानदार हो जाते हैं. हम 6-6 महीने पहले आवेदन थाने में दे चुके हैं, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं की गई.
उसका परिणाम ये हो रहा है कि कोई अपराधी अपराध तो कर रहा है लेकिन पुलिस उस पर एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है. जब FIR दर्ज नहीं होगी तो आंकड़ों भी कम सामने आएंगे. ये आंकड़ों से बाजीगरी हो रही है. अपराधी पकड़े नहीं जा रहे और ना जांच कंप्लीट हो रही. अगर FIR दर्ज नहीं होगी इससे अपराधियों को भी संरक्षण मिलता है और अपराधी इससे और निश्चिंत हो जाता है.
क्या बोले कमिश्नर?
वहीं भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र इससे पीछे की बजह बताते हुए कहते हैं कि पुलिस किसी भी अपराध पर तत्परता से कार्रवाई करती है. शिकायतों की तत्काल समीक्षा की जाती रही है, लेकिन अगर हम देखें तो कई जगह ऐसे सिविल मामले होते हैं जिन मामलों में बगैर जांच किए उपलब्ध शिकायत के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाती. इसमें किसी को आरोपी बनाया जा सके. इसके लिए एक SOP बनाई गई है कि कुछ मामलों की जांच वरिष्ठ स्तर के अधिकारी करेंगे शिकायत में सत्यता पाए जाने पर FIR दर्ज की जाती है, ताकि धाराओं का दुरुपयोग ना हो.
अपराध दर्ज ही नहीं हो रहे
कुल मिलाकर कहा जाए तो थाना क्षेत्र में अपराध कम नहीं हुए हैं, बल्कि अपराध दर्ज ही नहीं हो रहे. FIR से पहले जांच का ये फॉर्मूला भले ही आंकड़ों में कानून-व्यवस्था को चमका दे, लेकिन ज़मीनी हकीकत में ये न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. अब देखना ये है कि वरिष्ठ अधिकारी इस शिकायतों के अंबार को सिर्फ आंकड़ों में ही दबाए रखेंगे, या फिर फरियादियों को वाकई न्याय मिलेगा.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें