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Tomato cultivation: पूरन कुर्मी बताते है कि उनके पिता लंबे समय से पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों की भी खेती कर रहे थे. लेकिन टमाटर और बैंगन जैसी फसलों से 30-40 हजार रुपए का मुनाफा निकालना मुश्किल था. वे सीधी फसल लगाते थे. जिससे मौसम के प्रभाव में फसलें बर्बाद हो जाती थी. पूरन, जो उस समय पढ़ाई कर रहे थे. ने 12वीं पास करने के बाद फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया. लेकिन आर्थिक समस्याओं के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख पाए.
सागरः सागर जिले के गढ़ाकोटा, रहली, देवरी, और गौरझामर इलाके सब्जी और मसाला खेती के लिए प्रसिद्ध है. यहां की मिट्टी और पानी की भरपूर उपलब्धता के कारण किसान खेती में नए-नए प्रयोग करते रहे है. जिससे उन्हें काफी लाभ भी हुआ है. ऐसे ही एक किसान है रहली नगर के पूरन कुर्मी. जिन्होंने फर्स्ट ईयर से पढ़ाई छोड़कर अपने पिता के साथ खेती में हाथ आजमाना शुरू किया और उद्यानिकी अधिकारियों से सलाह लेकर खेती को एक नई दिशा दी.
पूरन कुर्मी बताते है कि उनके पिता लंबे समय से पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों की भी खेती कर रहे थे. लेकिन टमाटर और बैंगन जैसी फसलों से 30-40 हजार रुपए का मुनाफा निकालना मुश्किल था. वे सीधी फसल लगाते थे. जिससे मौसम के प्रभाव में फसलें बर्बाद हो जाती थी. पूरन, जो उस समय पढ़ाई कर रहे थे. ने 12वीं पास करने के बाद फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया. लेकिन आर्थिक समस्याओं के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख पाए. इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी विदेश प्रजापति से संपर्क किया. जिन्होंने टमाटर की खेती में अग्रवाल ड्रिप और मल्चिंग तकनीक को अपनाने की सलाह दी. जो फायदे का सौदा साबित हो सकता था. इसके लिए विभाग ने अनुदान भी दिया.
आज, पूरन के टमाटर अधिकतम 45 किलो तक थोक में बिकते है और उत्तर प्रदेश के व्यापारी इन्हें खेत से ही खरीद लेते है. वर्तमान में टमाटर का भाव ₹20 प्रति किलो है और अब तक वे 1200 क्रेट टमाटर बेच चुके हैं. चार साल पहले ड्रिप और मल्चिंग तकनीक को अपनाने के बाद, सामान्य खेती की तुलना में लागत थोड़ी अधिक आई. लेकिन मुनाफा चार गुना बढ़ गया. अब वे 2 एकड़ भूमि से चार लाख का टमाटर, खर्चा काट कर बेच चुके है. उनके इस सफल प्रयोग को देखकर आसपास के किसान भी इस तकनीक को अपनाने लगे है.
रहली उद्यानिकी अधिकारी विदेश प्रजापति बताते है कि आधुनिक समय में किसानों को तकनीक आधारित खेती करनी चाहिए. सामान्य खेती में मेहनत और लागत ज्यादा होती है. लेकिन उत्पादन कम मिलता है. किसानों को समय के साथ बदलाव करना चाहिए. किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 45 से 55% तक का अनुदान दिया जा रहा है. जिसमें ड्रिप, मल्चिंग और सपोर्टिंग सिस्टम पर सब्सिडी मिलती है. जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलती है.