रॉड लगे पैर, उम्र 60 साल, 1500 KM पैदल चलकर महाकाल पहुंचे जम्मू के दो दोस्त, 40 दिन में पूरी की यात्रा

रॉड लगे पैर, उम्र 60 साल, 1500 KM पैदल चलकर महाकाल पहुंचे जम्मू के दो दोस्त, 40 दिन में पूरी की यात्रा


उज्जैन. भगवान शिव के दीवाने देश-दुनिया में देखने को मिल जाते हैं. इसी कड़ी में आज उज्जैन में दो-दोस्तों की जोड़ी देखने को मिली, जिनकी यात्रा और संकल्प की कहानी बेहद खास है. दरअसल शिव भक्ति में लीन जम्मू के दो साधारण व्यापारी, लेकिन असाधारण संकल्प के साथ करीब 1500 किलोमीटर की पदयात्रा कर बाबा महाकाल की शरण में पहुंचे. यह कोई सामान्य यात्रा नहीं थी, बल्कि आस्था, विश्वास और तपस्या की जीवंत मिसाल थी.

करीब 40 दिनों की कठिन पदयात्रा के बाद दोनों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे. थके हुए कदम, लेकिन आंखों में अपार श्रद्धा और चेहरे पर सुकून. रात्रि विश्राम के बाद दोनों ने फिर बाबा महाकाल के दर्शन किए और फिर अपने अगले लक्ष्य, कुबेरश्वर धाम, जिला सीहोर की ओर पैदल ही आगे बढ़ पड़े.

40 दिन का सफर और अब आया मुकाम 
उज्जैन पहुंचने पर दोनों श्रद्धालुओं का समाजसेवियों, परिजनों और शिवभक्तों ने भावुक स्वागत किया. हर कोई इस तपस्वी यात्रा को देखकर अभिभूत नजर आया. इन दोनों भक्तों ने यात्रा की शुरुआत माता वैष्णो देवी के चरणों में शीश नवाकर की थी. वहीं से उन्हें वह शक्ति मिली, जिसने असंभव को संभव बना दिया. खास बात यह रही कि यह दोनों की पहली पदयात्रा थी, इसके बावजूद पूरे मार्ग में कहीं भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.

श्रद्धालुओं ने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह निकलते और शाम करीब 4–5 बजे तक चलते. कभी किसी मंदिर में, कभी गुरुद्वारे में विश्राम मिलता, तो कहीं अजनबी लोग अपने घरों में भोजन बनाकर प्रेमपूर्वक खिलाते. उनका कहना है कि इस पूरी यात्रा में कहीं भी कोई कष्ट नहीं आया, मानो स्वयं भोलेनाथ हर कदम पर साथ चल रहे हों.

दोस्त का मिला साथ फिर निकले लक्ष्य पर 
श्रद्धालु राजकुमार वर्मा (60 वर्ष) निवासी जम्मू ने बताया कि वे पेशे से एसी और मोबाइल व्यवसायी हैं. दो वर्ष पहले उनके पैर में गंभीर दुर्घटना हुई थी, जिसमें रॉड डाली गई थी, लेकिन शिव भक्ति ने उन्हें वह शक्ति दी कि दर्द भी रास्ता नहीं रोक सका. वहीं दूसरे श्रद्धालु मोहन सिंह (58 वर्ष), जो ई-रिक्शा व्यवसाय से जुड़े हैं, बताते हैं कि उन्होंने कभी इतना पैदल चलने की कल्पना तक नहीं की थी. लेकिन मित्र राजकुमार की पत्नी के प्रोत्साहन और माता वैष्णो देवी के आशीर्वाद ने उन्हें इस कठिन यात्रा के लिए तैयार कर दिया.

जानिए क्या लिया संकल्प 
इस यात्रा के पीछे सिर्फ दर्शन नहीं, बल्कि एक गहरी पीड़ा और बड़ा संकल्प छिपा है. दोनों भक्तों का दावा है कि जम्मू में शिव के असंख्य भक्त होने के बावजूद, आज तक वहां शिव पुराण कथा का आयोजन नहीं हुआ. कथा सुनने के लिए लोगों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है. इसी पीड़ा को संकल्प में बदलते हुए इन दोनों मित्रों ने ठाना कि वे जम्मू की धरती पर शिव पुराण कथा जरूर करवाएंगे. इसी उद्देश्य से वे कुबेरश्वर धाम पहुंचकर पंडित प्रदीप मिश्रा से स्वयं निवेदन करेंगे कि वे जम्मू आकर शिव पुराण कथा करें. यह यात्रा सिर्फ पैरों से तय की गई दूरी नहीं, बल्कि आस्था, साहस और भक्ति की वह कहानी है, जो बताती है कि जब मन में श्रद्धा हो और संकल्प अडिग हो, तो भोलेनाथ स्वयं रास्ते बना देते हैं.



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