2 घंटे में उजड़ा संसार! गोद में 8 दिन की मासूम, पिता ने उठाया सवाल- मां की मौत का जिम्मेदार कौन?

2 घंटे में उजड़ा संसार! गोद में 8 दिन की मासूम, पिता ने उठाया सवाल- मां की मौत का जिम्मेदार कौन?


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Balaghat Jansunwai: बालाघाट में हर मंगलवार की तरह जनसुनवाई हो रही थी, यहां पर मनीष भंडारकर अपनी भाभी के साथ एक 8 दिन के नवजात को लेकर पहुंचे थे. दरअसल, प्रसव के दो घंटे बाद ही प्रसूता की मौत हो गई थी, वह सवाल पूछ रहे हैं कि उनकी पत्नी के मौत का जिम्मेदार कौन है?

Balaghat Jansunwai: मध्य प्रदेश के बालाघाट में हर मंगलवार की तरह 20 जनवरी को भी जनसुनवाई चल रही थी. ऐसे में जिले भर से लोग अपनी समस्या लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे. कलेक्टर ऑफिस के सभागार के सामने लोगों की लाइन थी, सभी अपनी समस्याओं को कलेक्टर साहब के सामने रखने आए थे. लोकल 18 रिपोर्टर की नजर नवजात को लेकर कतार में खड़ी महिला पर पड़ी. ऐसे में लोकल 18 ने उनसे बातचीत की और समझने की कोशिश की, आखिर नन्ही सी जान को लेकर जनसुनवाई में आने की जरूरत क्यों पड़ी, तब उन्होंने दबी आवाज में बताया भैय्या नन्ही मासूम के सिर से महज दो घंटे के भीतर मां का साया उठ गया. इसे अनाथ बनाने वाला और कोई नहीं बल्कि ये सिस्टम है. इसी की शिकायत के लिए हम यहां आए है. ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकल 18 ने उनके परिजनों से बातचीत की, जानिए उन्होंने क्या बताया…

जनसुनवाई में मासूम को लेकर पहुंचे परिजन
बालाघाट में हर मंगलवार की तरह जनसुनवाई हो रही थी, यहां पर मनीष भंडारकर अपनी भाभी के साथ एक 8 दिन के नवजात को लेकर पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी शिवकुमारी भंडारकर के गर्भावस्था का समय पूरा हो चुका था. ऐसे में उन्हें हल्का दर्द हुआ. तब वह जिले लालबर्रा स्थित सरकारी अस्पताल में लेकर पहुंचे. वह सिर्फ उनकी सामान्य जांच के लिए गए थे. लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें प्रसव करने के लिए कहा. अब मनीष ने कहा कि इन्हें जिला अस्पताल ले जाना चाहते हैं. लेकिन अस्पताल ने जल्दबाजी की और उनका प्रसव करवाया. उनका आरोप है कि बिना लेबर पेन के ही उनका प्रसव करवाया गया. तब उनकी जिंदगी में खुशियां आई लेकिन कुछ ही देर में ये खुशियां मातम में बदल गई. दरअसल, उनकी पत्नी के शरीर से हैवी ब्लीडिंग होना शुरू हुई. तब उन्होंने उनकी पत्नी को रेफर कर दिया. इसके बाद रास्ते में ही ब्लीडिंग तेज हो गई और उनकी जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई.

अस्पताल प्रबंधन पर पति ने लगाए गंभीर आरोप
मृतका के पति मनीष ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी की डिलीवरी टॉर्च के मोबाइल में हुई. वहां पर शट डाउन था. ऐसे में उन्हें रेफर करना चाहिए था लेकिन उन्होंने लापरवाही पुर्वक डिलीवरी की. हम बालाघाट जाना चाहते थे लेकिन वहां के डॉक्टर ने कहा यहां पर ही डिलीवरी हो जाएगी. 11 जनवरी को दोपहर दो बजे डिलीवरी हुई और मामला बिगड़ता देख डॉक्टर ने 4 बजकर 10 मिनट में ही रेफर करने के लिए कहा. उस अस्पताल ने नवजात का वजन भी नहीं करवाया था. अब वह चाहते है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिसने लापरवाही बरती है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए.

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मनीष की पत्नी की मौत के बाद 8 दिन के बच्चे की देखरेख उनकी बड़ी मां करती है. उनका साढ़े चार साल का बच्चा है. मनीष अपनी नौकर छोड़ अपने परिवार की देखरेख के लिए आए थे. ऐसे में अब उनके पास भी रोजगार नहीं है. बच्चों के पालन पोषण के लिए अब वह क्या करें उन्हें समझ नहीं आ रहा है. आपको बता दें कि उनकी पत्नी शिवकुमारी भंडारकर लालबर्रा बीआरसी ऑफिस में एमआरसी पद पर कार्यरत थी.

उनकी बहन ने बताया कि फिलहाल नवजात के देखभाल वह कर रही है. उनका आरोप है कि प्रसव के बाद डॉक्टर ने दो घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा और जब मामला बिगड़ गया तब उन्होंने रेफर किया. उन्होंने आरोप लगाया है कि अगर उनकी बहन को समय पर डॉक्टर रेफर कर देते तो मासूमों के सिर से उनकी मां का साया न उठता. ऐसे में प्रशासन उन लोगों पर कड़ी कार्रवाई करें.

अब परिजनों ने ये भी आरोप लगाया है कि सीएचसी सेंटर में सुविधाएं नहीं है. न ब्लड बैंक है न ही बुनियादी सुविधाएं. ऐसे में नवजात के पिता पूछ रहे हैं कि मेरी पत्नी की मौत का जिम्मेदार कौन है. अब उनके परिजनों ने जनसुनवाई में आवेदन दिया है. मनीष ने बताया कि अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

जिम्मेदार ने क्या कहा
लोकल 18 ने मामले का दूसरा पक्ष जानने के लिए लालबर्रा बीएमओ डॉक्टर ऋतु धुर्वे से बात की उन्होंने बताया कि घटना के दो दिन पहले ही हॉस्पिटल शिफ्ट किया था. वहीं, उस दिन लाइट भी नहीं थी.  इनवर्टर बैठा हुआ था. उनका बीपी लगातार कम हो रहा था. ऐसे में उन्हें रेफर कर दिया गया था. लेकिन उनकी ब्लीडिंग नहीं हुई थी. वहीं, उनकी प्रेग्नेंसी रिस्की थी. यह उनका चौथा बच्चा था. इसके अलावा सिस्टर ने ही उनकी डिलिवरी की थी. बालाघाट जिले में ज्यादातर सीएचसी में गायनिक ही नहीं है.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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मां गई, सवाल बाकी! 8 दिन की मासूम को गोद में लेकर जनसुनवाई पहुंचा पिता



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