उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड रोड से प्रभावित 7 गांवों के किसानों की बुधवार शाम को हुई बैठक बेनतीजा रही। बैठक में किसानों को अफसर वहीं पुराने नियम बताते रहे। इसको लेकर किसानों की एडीएम शाश्वत शर्मा से भी बहस हो गई।
शाम को हुई मीटिंग में प्रभावित 7 गांव से करीब 15 से 20 किसान बैठक में शामिल होने आए थे, जिन्हें एसडीएम कृतिका भीमावद ने जमीन सौदों के हिसाब से मुआवजा तय करने और उसमें एक हेक्टेयर पर 75 हजार बढ़ाने की बात कही। इससे किसान और नाराज हो गए। किसान बाजारी मूल्य के आधार पर मुआवजा और सड़क की हाइट कम करने की अपनी बात ही रखते रहे। एडीएम शाश्वत शर्मा ने किसानों को साल 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के नियम बताते हुए बाजार मूल्य पर मुआवजा देना संभव नहीं होने की बात कही। इस पर किसानों ने लिखित रूप से अपनी मांगे अफसरों के सामने रखी और अल्टीमेटम के देकर वहां से चल दिए। किसानों ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि यदि अफसरों का ऐसा ही रूख रहा तो हम ग्रीन फील्ड रोड नहीं बनने देंगे। किसान नेता राजेश सोलंकी व नरेंद्रसिंह आंजना ने बताया कि बैठक में कोई निष्कर्ष नहीं निकला। भोपाल में हाई लेवल मीटिंग, उज्जैन का भी जिक्र
जमीन अधिग्रहण को लेकर सामने आ रहे विरोध को देखते हुए बुधवार को मप्र सरकार ने हाई लेवल मीटिंग रखी। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पीडब्ल्यूडी मंडी राकेश सिंह और लघु उद्योग मंत्री चेतन कश्यप की मौजूदगी में हुई मीटिंग में किसान संघ के पदाधिकारियों ने भूमि अधिग्रहण के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा। भारतीय किसान संगठन ने भारत एग्रो इकोनॉमिक्स की उदयपुर बैठक में पारित हुए भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव सामने रखे। भाकिसं प्रदेशाध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने बताया कि भूमि अधिग्रहण में किसानों को 2 गुना के बजाय 4 गुना मुआवजा देने की बात रखी है। प्रांत संगठन मंत्री मध्य भारत प्रांत भरत सिंह पटेल ने बताया कि बैठक के दौरान उज्जैन-जावरा और उज्जैन-इंदौर ग्रीन फील्ड रोड को लेकर हो रहे किसानों के विरोध पर भी चर्चा हुई।
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