एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के दौरान जारी किए जा रहे आंकड़ों ने बवाल मचा दिया है। जिले से लेकर प्रदेश तक विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता हैरत में पड़ गए। वे आपत्ति लेने के लिए चुनाव आयोग के पास गए तो अफसरों के कन्फ्यूजन तो दूर कर दिया, लेकिन कांग्रेस ने फिर सख्ती बरतते हुए बूथ लेवल तक मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। दरअसल, मामला फॉर्म-7 का है, जिसमें दावे-आपत्ति शामिल होते है। खंडवा जिले की बात की जाए तो यहां दावे आपत्ति के कॉलम यानी फार्म-7 में 87 हजार वोटर्स की संख्या जोड़ दी गई हैं। अचानक से दावे और आपत्ति की इतनी संख्या से एसआईआर पर नजर डाले कांग्रेस नेता हैरान हो गए। क्योंकि ग्राम स्तर पर एक बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) एक दिन में 5 से ज्यादा दावे-आपत्ति नहीं दे सकता हैं। ऐसे में चार-पांच दिन के भीतर जिले भर में 87 हजार दावे-आपत्तियों के डेटा ने कांग्रेस प्रमुखों को निर्वाचन आयोग की दहलीज तक भिजवा दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले- फॉर्म-7 का दुरुपयोग हो रहा खंडवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पालसिंह पुरनी ने कहा कि, जिले में एसआईआर सर्वे के दौरान जो डेटा रोजाना जारी किया जा रहा है। उसमें फॉर्म-7 के कॉलम में 87 हजार की संख्या बताई जा रही है। जब एक दिन में एक बीएलए 5 से ज्यादा दावे-आपत्ति नहीं दे सकता है तो फिर इतनी संख्या कहां से आ गई। यह सरासर फॉर्म-7 का दुरूपयोग हो रहा है। पुरानी ने कहा कि जब हमने आपत्ति ली तो निर्वाचन आयोग ने बताया कि यह डेटा तो निराकृत हो चुके लोगों का है। अब सवाल यह है कि आयोग ऐसा क्यों कर रहा है। हमने आपत्ति ली तो यह तर्क दिया गया। अन्यथा कल जाकर आयोग तो कह देगा कि 87 हजार दावे-आपत्ति आए थे, इसलिए इनके नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे है या फिर जोड़े जा रहे है। निराकृत के डेटा को फॉर्म-7 में जोड़ दिया गया इलेक्शन कमीशन ने एसआईआर सर्वे के दौरान पाया कि खंडवा जिले में कुल 87 हजार वोटर्स ऐसे है, जिनके फॉर्म सब्मिट नहीं हुए है। इनमें कई वोटर्स ऐसे है, जो मृत हो चुके है या फिर ट्रेस नहीं हो पाए है। कुछ लोग और कहीं शिफ्ट हो गए है और इनरोल्ड का आंकड़ा है। इन्हें फिलहाल मतदाता सूची से हटा दिया गया है और नई मतदाता सूची जारी कर दी गई है। अब जो वोटर छूट गए है, या गलती से जुड़ गए है, वे या उनके खिलाफ कोई अन्य व्यक्ति दावा-आपत्ति ले रहा है, वर्तमान में यह प्रक्रिया चल रही है। अफसर बोले- कॉलम मिस्टेक से ऐसा हुआ है उप जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेश सांवले ने बताया कि, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने फॉर्म-7 के डेटा पर आपत्ति ली थी। उन्हें इस बारे में अवगत करा दिया गया है कि उक्त 87 हजार का डेटा फॉर्म-7 का नहीं है। यह तकनीकी कारणों से 7 नंबर कॉलम में दर्ज हो गए है, इसमें तत्काल सुधार करवाकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष को अपडेट लिस्ट दे दी गई हैं। बता दूं कि, 20 जनवरी की स्थिति में फॉर्म-7 के तहत 790 आपत्तियां आई थी, जिनमें 521 का निराकरण कर दिया गया है। फिलहाल कोई कन्फ्यूजन नहीं है।
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