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Ujjain Dirty Water News: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौत के बाद उज्जैन में भी नल के पानी को लेकर हड़कंप मच गया है. शहर के कई इलाकों में नलों से गंदा पानी और कीड़े निकलने की शिकायतें सामने आ रही हैं.
Ujjain News: मध्यप्रदेश के उज्जैन में नगर निगम और पीएचई विभाग की एक चौंकाने वाली कार्यप्रणाली सामने आई है. दूषित पानी की सप्लाई से परेशान लोगों ने जब शिकायत दर्ज कराई, तो समस्या का समाधान करने की बजाय अधिकारियों ने सार्वजनिक नल का कनेक्शन ही काट दिया. इस फैसले के बाद इलाके के सैकड़ों लोग पीने के पानी के लिए तरस गए हैं. अब क्षेत्रीय पार्षद नगर निगम से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं.
दरअसल, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों और दर्जनों लोगों के बीमार होने की घटना के बाद उज्जैन नगर निगम ने दावा किया था कि शहर में कहीं भी गंदा पानी सप्लाई नहीं होने दिया जाएगा. नगर निगम ने सभी पानी की टंकियों की सफाई, पुरानी पाइपलाइन बदलने और दूषित जल की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे किए थे. इतना ही नहीं, शासन के निर्देश पर 13 जनवरी से पीएचई विभाग द्वारा जल सुनवाई भी शुरू की गई थी. लेकिन हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है.
कई वार्ड के रहवासी परेशान
महाश्वेता नगर, आदर्श नगर, कार्तिक चौक, सिंहपुरी, मगर मुंहा और गेबी हनुमान गली सहित कई इलाकों में लगातार गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है. सबसे गंभीर मामला गणगौर दरवाजा क्षेत्र से सामने आया, जहां सार्वजनिक नल से कीड़े युक्त पानी निकलने लगा. जब वार्ड पार्षद अंकित दुबे ने इस पर आपत्ति जताते हुए शिकायत दर्ज कराई, तो पाइपलाइन सुधारने की बजाय पीएचई अधिकारियों ने नल कनेक्शन ही काट दिया.
पाइपलाईन हो गईं जर्जर
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकल 18 की टीम मौके पर पहुंची और जांच की तो सामने आया कि अधिकांश पाइपलाइन नालों और नालियों से होकर गुजर रही हैं. कई स्थानों पर पाइप फटी हुई थीं, जिससे सीवरेज का पानी सीधे पीने के पानी की लाइन में मिल रहा है. पार्षद अंकित दुबे ने बताया कि पुराने शहर के वार्ड 21 और 22 में करीब 50 साल पहले डाली गई पाइपलाइन अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
इस पूरे मामले में जल कार्य समिति प्रभारी प्रकाश यादव ने दावा किया था कि शहर में बिसलेरी जैसा शुद्ध पानी सप्लाई हो रहा है. वहीं महापौर मुकेश टटवाल ने कीड़े युक्त पानी पर सफाई देते हुए कहा कि पाइपलाइन में पेड़ों की जड़ें घुस गई थीं, इसलिए कनेक्शन काटा गया. उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित क्षेत्र में बोरिंग से पानी की व्यवस्था की गई है, जबकि मौके पर किसी भी तरह की बोरिंग नजर नहीं आई. नगर निगम इंदौर की घटना के बाद शहरभर में सतर्कता बरतने और हर स्तर पर निगरानी का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है. कई इलाकों में आज भी लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. हालात ऐसे ही रहे, तो उज्जैन में भी इंदौर जैसी गंभीर घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें