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Shivpuri News: धीरे-धीरे उनका काम बढ़ने लगा. पहले जहां वह बाइक से सीमित गांवों तक ही पहुंच पाते थे, वहीं आज वह एक ऑटो से करीब एक दर्जन गांवों में रोजाना घूमते हैं. इस चलती-फिरती दुकान से वह हर रोज करीब तीन हजार रुपये तक की आमदनी कर लेते हैं.
शिवपुरी. यह कहानी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के खड़ोय गांव के किसान अरविंद साहू की है, जिन्होंने समय और मौसम के साथ अपने कारोबार को बदलकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति समय के अनुसार खुद को नहीं बदलता, वह पीछे रह जाता है लेकिन जो हालात को समझकर निर्णय लेता है, वही सफलता की नई राह बनाता है. अरविंद साहू ने इसी सोच को अपनाकर यह साबित कर दिया कि संसाधन सीमित हों और अगर सोच बड़ी हो, तो सफलता जरूर मिलती है. पहले अरविंद साहू के परिवार की आय का एकमात्र साधन खेती ही था लेकिन खेती से होने वाली आमदनी सीमित थी और मौसम पर निर्भर रहती थी. ऐसे में उन्होंने यह महसूस किया कि अगर खेती के साथ कोई छोटा व्यवसाय शुरू किया जाए, तो परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है. इसी विचार के साथ उन्होंने गर्मियों के मौसम में कुल्फी बेचने का काम शुरू किया. शुरुआत में वह मोटरसाइकिल से गांव-गांव जाकर कुल्फी बेचते थे, जिसे गांव के लोग प्यार से ‘चलती-फिरती दुकान’ कहने लगे.
गर्मी के मौसम में उनका यह प्रयोग सफल रहा लेकिन जैसे ही मौसम बदला और ठंड शुरू हुई, कुल्फी की मांग कम हो गई. ऐसे समय में कई लोग हार मान लेते हैं लेकिन अरविंद साहू ने हालात को समझा और अपने कारोबार को मौसम के अनुसार बदल लिया. उन्होंने ठंड और सामान्य मौसम में लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पानी टिक्की, आलू टिक्की, फिंगर और चाऊमीन जैसे फास्टफूड आइटम बेचना शुरू किया. खास बात यह है कि वह ये सभी चीजें गांव में ही ताजा बनाकर लोगों को खिलाते हैं, जिससे स्वाद और गुणवत्ता बनी रहती है.
ऑटो से घूमते करीब एक दर्जन गांव
धीरे-धीरे उनका काम बढ़ने लगा. पहले जहां वह मोटरसाइकिल से सीमित गांवों तक ही पहुंच पाते थे, वहीं आज वह एक ऑटो के माध्यम से करीब एक दर्जन गांवों में रोजाना घूमते हैं. इस चलती-फिरती दुकान से वह प्रतिदिन लगभग 3000 रुपये तक की आमदनी कर लेते हैं. यह कमाई उनके लिए खेती के साथ एक मजबूत सहारा बन चुकी है. गांव के लोगों के बीच उनकी दुकान बेहद लोकप्रिय हो गई है. बच्चे हों या बुजुर्ग, सभी उनके आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं. उनका व्यवहार सरल और प्रेमपूर्ण है, जिससे ग्राहक उनसे जुड़े रहते हैं. अरविंद साहू रोजाना करीब 12 गांवों का चक्कर लगाते हैं और हर गांव में अपनी मेहनत और ईमानदारी की खुशबू छोड़ जाते हैं.
अरविंद साहू की कहानी प्रेरणा
अरविंद साहू की यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो यह सोचते हैं कि छोटे स्तर पर किया गया काम सफल नहीं हो सकता. उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, समझदारी और समय के अनुसार लिए गए फैसले किसी भी व्यक्ति को आत्मनिर्भर बना सकते हैं. आज वह अपनी आमदनी से संतुष्ट हैं और अपने परिवार का अच्छे से भरण-पोषण कर रहे हैं. उनकी चलती-फिरती दुकान न सिर्फ रोजगार का साधन है बल्कि ग्रामीण उद्यमिता की एक प्रेरक मिसाल भी है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.