जान बचाने के लिए देश छोड़कर भागे थे खिलाड़ी, सरकार ने किया क्रिकेट को बर्बाद!

जान बचाने के लिए देश छोड़कर भागे थे खिलाड़ी, सरकार ने किया क्रिकेट को बर्बाद!


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बांग्लादेश क्रिकेट में सरकार के हस्तक्षेप से देश में इस खेल पर संकट गहरा गया है. ऐसा ही कुछ एक जमाने में धाकड़ टीम रही जिम्बाब्वे के साथ हुआ था, जब वहां की सरकार ने क्रिकेट को बर्बाद कर दिया. हालात इतने खराब हो गए कि खिलाड़ियों को देशद्रोही बना दिया गया और उन्हें जान बचाकर देश छोड़कर भागना पड़ गया था.

जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम, 2003 विश्व कप

नई दिल्ली: आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में बांग्लादेश का भारत में नहीं खेलने की घटना को क्रिकेट इतिहास में काले अध्याय के रूप देखा जाएगा. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने ये फैसला पूरी तरह से राजनीतिक दबाव में लिया. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की इस सनक के कारण देश में क्रिकेट का अस्तित्व अब संकट में हैं. क्योंकि टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेने से कारण अब आईसीसी की तरफ से उसे कई तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा. ऐसा पहली बार नहीं है, जब किसी देश में वहां की सरकार के कारण क्रिकेट की बर्बादी हुई है.

ऐसा ही कुछ 90 के दशक के अंत और 2000 की शुरुआत की बेहतरीन टीमों में से एक रही जिम्बाब्वे के साथ हुआ था. इस टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ी थे जो आज भी लेजेंड माने जाते हैं. जिम्बाब्वे में क्रिकेट के पतन की शुरुआत रॉबर्ट मुगाबे की सरकार बनने के बाद हुआ. तत्कालीन राष्ट्रपति मुगाबे के हस्तक्षेप के कारण सब बर्बाद हो गया. उस दौर में जिम्बाब्वे एक ऐसी टीम थी जो भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों को धूल चटाने का दम रखती थी. इस टीम में एंडी फ्लावर, हीथ स्ट्रिक, ग्रांट फ्लावर, मरे गुडविन और एलिस्टर कैंपबेल जैसे दिग्गज खिलाड़ी थे. हालात इतने खराब हो गए कि कुछ खिलाड़ियों को रातों-रात देश छोड़कर भागना पड़ा था.

कैसे हुआ जिम्बाब्वे क्रिकेट का पतन?

साल 2003 में रॉबर्ट मुगाबे सरकार ने कुछ नए कानून लागू किए. इसमें कोटा सिस्टम भी था. सरकार ने क्रिकेट बोर्ड पर दबाव डाला कि टीम में खिलाड़ियों का चयन योग्यता के बजाय नस्ल यानी रंग के आधार पर हो. बोर्ड में सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियां होने लगीं. इसके कारण क्रिकेट में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया. हालत तब और बिगड़ गए जब खिलाड़ियों की सैलरी तक रोक दी गई. क्रिकेट में मची इस उथल-पुथल के कारण साल 2003 में टीम के खिलाड़ी विद्रोह पर उतर आए.

दरअसल हुआ ये कि 2003 विश्व कप के दौरान एंडी फ्लावर और हेनरी ओलोंगा सरकार के विरोध में ब्लैक आर्म बैंड पहनकर मैदान पर उतरे. इन खिलाड़ियों ने कहा कि वे जिम्बाब्वे में लोकतंत्र की हत्या का शोक मना रहे हैं और विरोध में उन्होंने ब्लैक आर्म बैंड पहना है. फिर क्या था सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण इन खिलाड़ियों को देशद्रोही बना दिया गया. इसके कारण उन्हें रातों-रात अपनी जान बचाकर देश छोड़कर भागना पड़ा.

एक साथ 15 खिलाड़ियों ने दिया इस्तीफा

इस घटना के बाद साल 2004 में हालात तब और बिगड़ गए जब हीथ स्ट्रिक को कप्तानी से हटा दिया गया. खिलाड़ी बोर्ड और सरकार की नीतियों से तंग आ चुके थे और विरोध में 15 और सीनियर खिलाड़ियों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया. इसके बाद सीन एर्विन, नील जॉनसन और मरे गुडविन जैसे शानदार खिलाड़ियों ने भी जिम्बाब्वे छोड़ दिया.

नतीजा ये हुआ कि जिम्बाब्वे ने स्वेच्छा से अपने टेस्ट स्टेटस छोड़ दिया, क्योंकि उनके पास टीम ही नहीं बची थी. हालांकि, अब धीरे-धीरे स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन जिम्बाब्वे क्रिकेट का वो पुराना दौर शायद ही लौट पाए. जिम्बाब्वे क्रिकेट के इस घटना से ये पता चलता है कि कैसे सरकार के हस्तक्षेप के कारण कैसे एक बेहतरीन टीम का पतन हो गया, जिसकी राह पर अभी बांग्लादेश चल रहा है.

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Jitendra Kumar

अक्टूबर 2025 से नेटवर्क 18 समूह में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत. पत्रकारिता में 9 साल का अनुभव. एबीपी न्यूज डिजिटल में स्पोर्ट्स बीट से करियर की शुरुआत। इंडिया टीवी और नवभारत टाइम्स ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित संस्…और पढ़ें

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