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Bipin Saurabh Cricketer: रणजी ट्रॉफी 2025-26 के प्लेट ग्रुप फाइनल मुकाबले के दूसरे दिन बिहार की टीम ने अपनी पहली पारी को आगे बढ़ाते हुए मजबूत बढ़त हासिल कर ली है. इस ख़िताबी मुकाबले में बिहार ने अपनी पहली पारी में 135.5 ओवर में 522 रन बनाकर मणिपुर के सामने बड़ा लक्ष्य रखा है. इसमें सबसे अधिक 143 रन औरंगाबाद के विपिन सौरभ के बल्ले से निकला
राजधानी पटना के मोईन-उल-हक़ स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी 2025-26 के प्लेट ग्रुप फाइनल मुकाबले के दूसरे दिन बिहार की टीम ने अपनी पहली पारी को आगे बढ़ाते हुए मजबूत बढ़त हासिल कर ली है. पहली पारी में 135.5 ओवर में 522 रन बनाकर मणिपुर के सामने बड़ा लक्ष्य रखा है. इसमें विकेटकीपर बल्लेबाज बिपिन सौरभ ने जिम्मेदारी भरी प्रभावी पारी खेलते हुए 189 गेंदों पर 143 रन बनाए. इसमें 12 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. टीम में यह सर्वाधिक रन रहा.

बिहार की पहली पारी में बिपिन सौरव ने गजब की जुझारूपन भरी बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया. उन्होंने मैच के दोनों दिन क्रीज पर डटे रहकर टीम को मजबूत आधार दिया. पहले दिन बिपिन सौरभ ने 75 रनों की अहम पारी खेली, वहीं दूसरे दिन उन्होंने 68 रन और जोड़ते हुए अपनी पारी को आगे बढ़ाया. इस दौरान उन्होंने कुल 189 गेंदों का सामना किया, यानी अकेले करीब 32 ओवर खेला. बॉलरों के सामने वह चट्टान की तरह खड़े नजर आए. मैदान पर उन्होंने गेंदबाज़ों को पसीने छुड़ा दिए. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिपिन सौरभ ने पहली पारी में लगभग 08 घंटे तक बल्लेबाजी की.

औरंगाबाद के रहने वाले विकेटकीपर और बल्लेबाज बिपिन सौरभ जब मैदान पर उतरते हैं तो गेंदबाज के पसीने छूट जाते हैं. पिछले सीजन में इन्होंने मोईनुल हक में ही स्टेडियम पार छक्का लगाया था. 26 साल का यह खिलाड़ी दो से तीन बार आईपीएल के ऑक्शन में भी शामिल हो चुका है. हालांकि, चयन नहीं हो पाया. साल 2015 में बिहार अंडर 19 में चयन होने के बाद से लगातार अपनी बेहतर प्रदर्शन से नई ऊंचाइयों को छूते गए है.
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बिपिन सौरभ की पहचान विस्फोटक बल्लेबाज के तौर पर होती है. बीसीएल के एक सीजन में पांच मैचों में दो शतक, एक अर्धशतक के साथ सबसे ज्यादा 299 रन बना चुके हैं. इतना ही नहीं, सबसे ज्यादा 19 छक्के भी जड़े. इसी टूर्नामेंट में इनकी रन मशीन की उपाधि मिली.

साथी खिलाड़ी बताते हैं कि बिपिन जब खेलता है तो बिपिन स्कोर बोर्ड नहीं देखता है. बस हर गेंद को बाउंड्री के बाहर पहुंचाने के चक्कर में रहता है. हालांकि, कई मुकाबलों में उन्होंने सूझ बुझ और समझदारी भरी बल्लेबाजी भी की. इसी वजह से उन्हें रन मशीन कहा जाता है. कई मुकाबलों में उन्होंने बेहतरीन परियां खेली है. आज के मैच में भी उन्होंने इसका परिचय दिया.

बिपिन सौरव बेहद गरीब मध्यम परिवार से ताल्लुक रखते हैं. इनके पिता एक छोटा सा प्राइवेट स्कूल चलाते हैं. आर्थिक बाधा के बावजूद भी बिपिन के पैर कभी नहीं डगमगाए. 2015 में बिपिन ने दिल्ली का रुख किया. दिल्ली में बिपिन जिस मैदान पर अभ्यास करते थे, वहीं पर अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिए सुबह-शाम स्टेडियम में गार्ड का काम भी किया करते थे.

बिपिन के सात शुरुआती दिनों में खेल चुके अशोक पांडे बताते हैं कि बिपिन ने अपने घर में सीमेंट का पिच तैयार किया था, वहीं पर दिन रात प्रैक्टिस करता था. इसके अलावा सोन नदी के किनारे बालू पर अपने कमर में रस्सी से टायर बांधे 5 किमी तक दौड़ता था. आर्थिक तंगी के बावजूद भी बिपिन ने संघर्ष जारी रखा और कभी हार नहीं माना. गांव के लोग प्यार से उसे टुन्ना पुकारते हैं.