214 दिन की बंदी… जबलपुर की इस जेल में नेताजी हुए थे दो बार बंद, आज भी मौजूद वारंट

214 दिन की बंदी… जबलपुर की इस जेल में नेताजी हुए थे दो बार बंद, आज भी मौजूद वारंट


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Netaji Subhash Chandra Bose: नेताजी सुभाष चंद्र बोस का संस्कारधानी जबलपुर से गहरा नाता रहा है. जहां नेताजी दो बार जबलपुर की सेंट्रल जेल में बंद हुए थे. जबलपुर की सेंट्रल जेल अंग्रेजों की पसंदीदा जेल मानी जाती थी. जिसमें क्रांतिकारियों को बंद कर दिया जाता था. इसी को लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी जबलपुर की सेंट्रल जेल में दो बार बंद किया गया था. दरअसल नेताजी सुभाष चंद्र बोस

Netaji Subhash Chandra Bose: नेताजी सुभाष चंद्र बोस का संस्कारधानी जबलपुर से गहरा नाता रहा है. जहां नेताजी दो बार जबलपुर की सेंट्रल जेल में बंद हुए थे. जबलपुर की सेंट्रल जेल अंग्रेजों की पसंदीदा जेल मानी जाती थी. जिसमें क्रांतिकारियों को बंद कर दिया जाता था. इसी को लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी जबलपुर की सेंट्रल जेल में दो बार बंद किया गया था. दरअसल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस देश की आजादी के लिए बिगुल फूंक रहे थे.

यहीं बातें अंग्रेजों को रास नहीं आ रही था. जहां अंग्रेजों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 22 दिसंबर 1931 को जबलपुर सेंट्रल जेल में डाल दिया था. उन्होंने सेंट्रल जेल में 209 दिनों तक जेल में रखा गया. इसके बाद दोबारा 16 जुलाई 1932 को उन्हें जबलपुर सेंट्रल जेल लाया गया. जहां वे 5 दिन जेल में रहे. इस तरह नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जबलपुर की सेंट्रल जेल में 214 दिनों का वक्त गुजारा.

बैरक में रहकर नेताजी ने बनाई थी कई योजनाएं
हालांकि जिस जेल में नेताजी को बंद किया गया, आज उस जेल को नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल के नाम से जाना जाता हैं. इसके अलावा जिस बैरक में नेताजी को बंद रखा गया, उस बैरक को म्यूजियम बना दिया गया है और बैरक को सुभाष म्यूजियम (वार्ड) के नाम से जाना जाता हैं. इसी बैरक में रहकर नेताजी ने कई योजनाएं बनाई थी. जिसके चलते देश की आजादी के लिए उन्होंने अहम योगदान दिया था.

बैरक में नेताजी का जेल वारंट से लेकर जंजीर मौजूद
नेताजी की बैरक में जेल प्रहरियों की वर्दी, बेल्ट, तिजोरी ब्रिटिश शासन काल की घड़ी और जंजीरें भी रखी हुई है. इसके अलावा नेताजी के हस्ताक्षर वाला जेल रजिस्टर और उनके नाम का वारंट भी जेल में आज भी सुरक्षित है. खास बात यह हैं कि बैरक की दीवारों में नेताजी की तस्वीर भी लगाई गई है. जो जेल के बंदियों ने अपने हाथों से बनाया है. इसके अलावा नेताजी ने जबलपुर में ही कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत भी हासिल की थी.

आम लोगों के लिए खुल चुका है यह म्यूजियम 
नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने बताया सेंट्रल जेल की म्यूजियम को शनिवार और रविवार को आम लोगों के लिए भी खोला जाता है. जहां दूर दराज से लेकर स्कूल के बच्चे आते हैं और नेताजी के म्यूजियम को देखते हैं. इसके अलावा कई क्रांतिकारी भी जबलपुर की सेंट्रल जेल में रह चुके हैं.

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Deepti Sharma

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इस जेल के वारंट में दर्ज नेताजी का 214 दिन का संघर्ष, यादें म्यूजियम में मौजूद



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