40 साल से नहीं खरीदा सिलेंडर, फिर भी रोज गैस पर बन रहा खाना, क्या है राज

40 साल से नहीं खरीदा सिलेंडर, फिर भी रोज गैस पर बन रहा खाना, क्या है राज


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Sagar News: किसान श्याम सुंदर ठाकुर ने लोकल 18 से कहा कि साल 1981 में उनके दादा कल्याण सिंह ने घर पर गोबर गैस लगवाई थी. उस समय यह गांव में सबसे पहली गोबर गैस थी. इसके बाद हमारे घर में चूल्हे की जगह गोबर गैस से खाना बनना शुरू होने लगा.

सागर. अगर हम कहें कि मध्य प्रदेश के सागर का 12-15 लोगों का एक परिवार पिछले 45 सालों से खाना पकाने के लिए गैस का उपयोग करता है लेकिन आज तक उन्होंने सिलेंडर नहीं खरीदा है, तो शायद इसे सुनकर आप हैरान हो सकते हैं. ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई परिवार गैस का उपयोग भी कर रहा और उसे पैसे भी खर्च नहीं करने पड़ रहे हैं लेकिन यह सच है. परिवार का खाना गैस पर ही तैयार होता है, मगर घरेलू या कमर्शियल गैस की बजाय उनके द्वारा प्राकृतिक गोबर गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है. आज के समय में हर रसोई में गैस सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी की वजह से ही भोजन जल्द और आसानी से तैयार हो पाता है लेकिन गैस सिलेंडर के बढ़ रहे दाम किचन के बजट का बोझ भी बढ़ा रहे हैं. बरसों से चली आ रही गोबर गैस की तकनीक को अपनाकर लोग सिलेंडर के झंझट को खत्म कर सकते हैं. खासतौर पर जिन किसान भाइयों के पास गाय या भैंस हैं, वे इसको अपना सकते हैं.

सागर के किसान श्याम सुंदर ठाकुर लोकल 18 को बताते हैं कि साल 1981 में उनके दादा कल्याण सिंह ने अपने घर पर गांव में सबसे पहले गोबर गैस लगवाई थी. उस समय हमारे घर में चूल्हे की जगह गोबर गैस से खाना बनना शुरू हुआ था और वह सिलसिला आज भी चला आ रहा है. हमारे परिवार में 12 से 14 सदस्य हैं. जॉइंट फैमिली है और पूरा खाना सुबह-शाम का इसी गोबर गैस पर पकता है. 40 साल से ज्यादा का समय हो गया है, हमारे यहां रोजाना गोबर गैस पर ही खाना बनता है. आज तक कभी सिलेंडर नहीं आया.

किसान ने गिनाए गोबर गैस के फायदे
उन्होंने आगे कहा कि गोबर गैस की वजह से दो-तीन फायदे सीधे-सीधे होते हैं, जैसे- एक तो सिलेंडर खरीदने के लिए पैसे खर्च नहीं करने पड़ते हैं, साथ ही चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए पेड़-पौधे भी पूरी तरह से सुरक्षित हैं. पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हो रहा. गोबर गैस पर खाना बनने की वजह से अपच या अन्य तरह की समस्या नहीं होती जबकि घरेलू गैस सिलेंडर की मदद से जो खाना पकता है, वह स्वास्थ्य के लिए उतना ठीक नहीं रहता, जितना गोबर गैस का होता है.

इस्तेमाल गोबर का फिर से इस्तेमाल
किसान आगे कहते हैं कि गोशाला से गोबर उठाकर सीधा गैस की टंकी में डालते हैं और पानी मिलाकर घोल देते हैं. हम लोग रोजाना प्रतिदिन 70 किलो गोबर को 80 लीटर पानी में मिलाते हैं. इससे रोजाना उपयोग के लिए आराम से गैस निकलती रहती है. घर के सबसे पीछे हिस्से में टैंक बनाया गया है. पाइप के माध्यम से यह गैस सीधे किचन में जाती है. गोबर से जब गैस निकल जाती है, तो इसे 8-10 दिन के लिए खुले में डाल देते हैं. जब यह सूख जाता है, तो इसे खेत में डालते हैं. यह मिट्टी में उर्वरक शक्ति बढ़ाता है. इसी गोबर को केंचुआ खाद में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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