अनूपपुर जिले के कोतमा वन परिक्षेत्र के आमाडांड गांव में एक मादा भालू ने दो नन्हे शावकों को जन्म दिया है। हाल ही में क्षेत्र में हुए वन्यजीवों की मौत की घटनाओं के बाद इन नए मेहमानों का आना वन विभाग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। विभाग ने शावकों की सुरक्षा के लिए इलाके की घेराबंदी कर दी है। खंडहर बना भालू का बसेरा कोतमा वन परिक्षेत्र अधिकारी हरीश तिवारी ने बताया कि ग्राम पंचायत भवन के पास स्थित एक पुराने खंडहरनुमा मकान में मादा भालू ने अपना डेरा जमाया है। ग्रामीणों ने भालू को घर के अंदर जाते देखा था, जिसके बाद शावकों के रोने की आवाजें सुनाई दीं। सूचना मिलते ही बीट प्रभारी और वन कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची और जन्म स्थल को सुरक्षित घोषित कर दिया। इस खंडहर में कई कमरे आपस में जुड़े हुए हैं, जिससे भालू को छिपने के लिए सुरक्षित जगह मिल गई है। ग्रामीण पर भालू का हमला, दहशत का माहौल शावकों के जन्म के बीच पंचायत भवन के पास ही एक अन्य भालू ने 40 वर्षीय ग्रामीण मुकेश केवट पर अचानक हमला कर दिया। हमले में घायल मुकेश को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज जारी है। ग्रामीणों का अंदेशा है कि यह भालू शावकों की सुरक्षा को लेकर आक्रामक हो गया होगा या मादा भालू के साथ का ही नर भालू होगा। क्षेत्र में दो तेंदुए और एक भालू शावक की मौत गौरतलब है कि पिछले एक महीने के भीतर इस क्षेत्र में दो तेंदुए और एक भालू शावक की मौत हो गई थी। परिक्षेत्र सहायक राजमणि सिंह ने बताया कि वन अमला और सुरक्षा श्रमिक लगातार मौके पर निगरानी रख रहे हैं ताकि भालू परिवार और ग्रामीणों के बीच किसी भी टकराव को रोका जा सके।
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