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Success Story: इस अफसर ने 10 साल में किसानों को जागरूक कर 150 गांव की किस्मत बदल दी. करीब 5000 हेक्टेयर में लोग ड्रिप और मल्चिंग विधि से सब्जियों की खेती कर रहे हैं. कई गुना मुनाफा कमा रहे हैं. जानें कौन हैं सागर के वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी और उनका कारनामा…
Sagar News: सागर में सबसे बड़ी समस्या पानी की है. इस वजह से यहां किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अब कुछ समय से यहां के किसान कम पानी में भी नए-नए प्रयोग वाली खेती कर रहे हैं. आज हम सागर के ऐसे अधिकारी की बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने 10 साल में किसानों को जागरूक कर 150 गांव की किस्मत बदल दी. आज करीब 5000 हेक्टेयर में लोग ड्रिप और मल्चिंग विधि से टमाटर, बैंगन सहित अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं, जिससे किसानों को कम पानी में बंपर उत्पादन मिलता है. वह सामान्य फसल की तुलना में 4 से 6 गुना तक मुनाफा कमा लेते हैं.
वरिष्ठ उद्यानकी अधिकारी विदेश प्रजापति बताते हैं कि 2014 में सागर आने के बाद उन्होंने देखा कि यहां की कुछ इलाकों में टमाटर की खेती नॉर्मल कल्टीवेटर तरीके से की जाती थी. यहां के गांव भी इसके लिए पहचाने जाते थे, लेकिन किसानों को उतना उत्पादन नहीं मिल पाता था. उन्होंने 2 साल तक किसानों को समझाया, लेकिन कोई भी ड्रिप और मल्चिंग से खेती करने को तैयार नहीं था. आखिरकार 2016 में चनौआ के किसान राजू कर्मी ने ढाई एकड़ से शुरुआत की. विभाग के द्वारा उन्हें 55% का ड्रिप और मल्चिंग खरीदने के लिए अनुदान भी दिया गया.
उस साल टमाटर की खेती में अधिकांश किसानों को बहुत नुकसान हुआ था, लेकिन राजू ने ढाई एकड़ से 10 लाख के टमाटर बचे थे. करीब 5 लाख का मुनाफा मिला था. किसानों ने जब यह देखा तो अगले साल इस गांव के दर्जनों किसानों ने थोड़ी-थोड़ी करके ड्रिप मल्चिंग पर खेती की शुरुआत की और अब 8 साल बाद रहली ब्लॉक में कम से कम 150 गांव में किसान ड्रिप मल्चिंग से खेती करने लगे. 4 से 5 हजार हेकटेयर जमीन पर ड्रिप मल्चिंग तकनीक से टमाटर, मिर्च, बैंगन, तरबूज, खरबूज की खेती करने लगे हैं.
इस किसान से शुरुआत
ऐसे ही एक नवलपुर के किसान कुंदन लोधी हैं, जिन्होंने कोरोना कल में ड्रिप मल्चिंग से खेती की शुरुआत की थी. इसके अगले दो साल बाद उन्होंने 10 एकड़ खुद की जमीन पर और 10 एकड़ ठेके पर जमीन लेकर एक करोड़ का टमाटर बेचा था. रहली ब्लॉक में 10 दोनों ऐसे गांव हैं, जहां 70% किसान गेहूं, चना की पारंपरिक फसलों को छोड़कर सब्जी वाली खेती इस विधि से करने लगे हैं. ड्रिप मल्चिंग से खेती करने पर 70% पानी की कम जरूरत होती है. अच्छी फसल हो जाती है. इसमें घुलनशील फर्टिलाइजर का इस्तेमाल होता है, जो पूरा पौधे को मिलता है. खरपतवार नहीं होता. साथ ही जो मल्चिंग होती है, उससे पौधे को डबल एनर्जी मिलती है. 2-ढाई महीने में फलने वाला पौधा 45 दिन में ही फल देने लगता है.
कौन हैं विदेश प्रजापति?
विदेश प्रजापति श्योपुर जिले के रहने वाले हैं. इन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई सरकारी स्कूल से की थी. इसके बाद ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन हॉर्टिकल्चर कॉलेज मंदसौर से किया. 5 साल तक हैदराबाद और गुजरात में रहकर प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की. वहां सीड डिपार्टमेंट में प्रोडक्शन मैनेजर थे. 2013 में उन्होंने सरकारी जॉब के लिए अप्लाई किया. 2014 में नौकरी लगने के बाद सागर आ गए. 2014 से ही वह सागर जिले की रहली विकासखंड में वरिष्ठ उद्यानकी अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं.
पढ़ाने के लिए भाइयों ने छोड़ी पढ़ाई
विदेशी प्रजापति के लिए यह सब इतना आसान नहीं था. क्योंकि वह गरीब परिवार से आते हैं. वो तीन भाई हैं, जिसमें विदेशी सबसे छोटे हैं. आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पढ़ाई का बोझ बढ़ाने की वजह से पहले इनके बड़े भाई ने पढ़ना छोड़ दिया और दोनों भाइयों को पढ़ने लगे. बाद में मंझले भाई ने भी पढ़ाई छोड़ दी. फिर दोनों बड़े भाई मेहनत मजदूरी करके विदेश को पढ़ाने लगे. उन्होंने भी मेहनत करके उनके भाइयों द्वारा दी गई कुर्बानी को बेकार नहीं जाने दिया और अब वह उद्यान की अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें