चटख होने लगी धूप, लहलहाती सरसों और मसूर की फसल को खा जाएंगे ये खतरनाक कीट, जानें उपाय

चटख होने लगी धूप, लहलहाती सरसों और मसूर की फसल को खा जाएंगे ये खतरनाक कीट, जानें उपाय


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Agriculture News: ठंड में माहू का असर कम रहता है, लेकिन तापमान बढ़ते ही यह तेजी से फैलता है. मसूर और सरसों की समय पर बुवाई करने वाले किसानों को कम नुकसान होगा. लेकिन, देर में बुवाई करने वाले किसान सतर्क रहें. अगर प्रकोप दिख तुरंत ये काम करें…

Agri Tips: मध्य प्रदेश समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इस समय रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसल मसूर और सरसों खेतों में लहलहाती नजर आ रही है. अच्छी बढ़वार के बाद अब फसल फलियों के बनने की अवस्था में पहुंच चुकी है. इससे किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद है. हालांकि, मौसम में हो रहे बदलाव ने चिंता बढ़ा दी है. बढ़ते तापमान के साथ ही फसल पर माहू कीट का प्रकोप फैलने लगा है, जो पैदावार को नुकसान पहुंचा सकता है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड में माहू का प्रभाव काफी कम रहता है, लेकिन जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि होती है, यह कीट तेजी से सक्रिय हो जाता है. खासतौर पर मैदानी इलाकों में सरसों और मसूर की फसलें माहू के हमले के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं. माहू पौधों की कोमल पत्तियों और टहनियों से रस चूसता है, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और फलियों में दाने ठीक से नहीं भर पाते.

इस खाद का प्रयोग करें
सीधी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने बताया, यदि किसान समय रहते सही प्रबंधन अपनाएं तो माहू के प्रकोप से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है. उन्होंने बताया कि मसूर की फसल में पोटाश और वाटर सॉल्यूबल खाद का प्रयोग करने से पौधों की ताकत बढ़ती है और दाने बेहतर तरीके से भरते हैं. इसके अलावा 00.50 और 52.34 जैसे उर्वरकों का संतुलित उपयोग फसल की सेहत बनाए रखने में मददगार साबित होता है.

देर से बुवाई वालों को ज्यादा खतरा
डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि जिन किसानों ने मसूर की बुवाई समय पर यानी अक्टूबर के मध्य में कर ली थी, उन्हें माहू के प्रकोप से अधिक नुकसान होने की संभावना कम है. वहीं, देर से बुवाई करने वाले किसानों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी. यदि माहू का हमला शुरुआती अवस्था में हो और केवल एक वर्ग मीटर क्षेत्र में कुछ पौधों तक सीमित हो तो जैविक कीट नियंत्रण जैसे निमास्त्र का उपयोग प्रभावी हो सकता है.

हालांकि, यदि माहू का प्रकोप तेजी से फैल जाए और बड़ी संख्या में पौधे प्रभावित होने लगें, तो सार्वांगिक कीटनाशकों का छिड़काव करना आवश्यक हो जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को नियमित रूप से अपनी फसल का निरीक्षण करना चाहिए. समय पर उर्वरकों और कीटनाशकों का संतुलित व सही उपयोग कर किसान मसूर की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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