रीवा की महारानी को मिली थी वाघेश्वरी की उपाधि, क्वीन एलिजाबेथ से थी गहरी दोस्ती

रीवा की महारानी को मिली थी वाघेश्वरी की उपाधि, क्वीन एलिजाबेथ से थी गहरी दोस्ती


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रीवा की महारानी प्रवीण कुमारी ने मुंबई में रहकर संगीत, नृत्य की कला को सीखा था। वह उस समय मुंबई पढ़ने गई थीं, जब पर्दा की सबसे ज्यादा प्रथाएं थीं। इसके अलावा उनकी क्वीन एलिजाबेथ से अच्छी दोस्ती थी।

रीवा राजघराने में एक ऐसी महारानी थीं जिन्हें बघेल रियासत की वाघेश्वरी कहा जाता था. उनका नाम है प्रवीण कुमारी, क्योंकि उन्होंने कई बड़े बड़े जंगली जानवरों का शिकार किया था. शिकार के फोटो और बाघ की खाल आज भी रीवा के बघेला संग्रहालय में मौजूद है. उनके साहस और शौर्य के मुरीद देशी और विदेशी सैलानी भी थे. रीवा के इतिहासकार असद खान बताते हैं कि विवाह से पूर्व वो भोज-कच्छ के जंगलों में घोड़े पर सवार होकर भाले से जंगली जानवरों का शिकार किया करती थीं और वो इस कला में माहिर थीं.

रीवा के महाराजा से हुआ था प्रवीण कुमारी का विवाह
1943 में रीवा के महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव से प्रवीण कुमारी का विवाह हुआ। उनकी उत्कृष्ट शिकार कला के लिए वो पूरे भारतवर्ष की रियासतों में जानी जाती थीं. रीवा के राजाओं ने जंगल और जंगली जानवरों का संरक्षण भी किया है. 1955 के बाद से महारानी प्रवीण कुमारी ने भी पूरी तरह से शिकार करना बंद कर दिया था.

बिरजू महाराज से ली नृत्य की शिक्षा
जिस समय पर्दा की सबसे ज्यादा प्रथाएं थीं उस जमाने में भी महारानी प्रवीण कुमारी के पिता और कक्ष के महारजा ने सब को पीछे छोड़कर उनको शिक्षा और संगीत की तालीम दिलाने के लिए आगे लाए और मुंबई में उन्होंने रहकर न सिर्फ पढ़ाई की बल्कि संगीत,नृत्य और शिकार कला की प्रवीणता को पूरा किया. उन्होंने पंडित गंधर्व महाराज से गीत की शिक्षा ली तो वहीं पंडित रविशंकर प्रसाद से सितार वादन तथा बिरजू महाराज से नृत्य की शिक्षा ली थीं. शिकार की कला अपने पिता से सीखी थी.

क्वीन एलिजाबेथ को रीवा से सफेद बाघिन भेजने का दिया था ऑफर
पुराने जमाने में शिकार रईसों का शौक हुआ करता था. शिकार राजा-महाराजाओं के लिए शौर्य पराक्रम के साथ स्टेटस सिंबल हुआ करता था. रीवा के इतिहास को लेकर कई किताबें लिख चुके इतिहासकार असद खान बताते हैं कि महारानी एलिजाबेथ और रीवा की महारानी प्रवीण कुमारी के बीच अच्छी दोस्ती थी. प्रवीण कुमारी को जब यह पता चला कि महारानी एलिजाबेथ को सफेद बाघिन पसंद आई तो उन्होंने फैसला लिया कि रीवा के गोविंदगढ़ से एक सफेद बाघिन क्वीन एलिजाबेथ को भिजवाई जाएगी. हांलाकि ये ऑफर ही रहा, क्योंकि उस समय बाघिन को भेजना इतना आसान नहीं था.

महारानी एलिजाबेथ तो रीवा नहीं आ सकीं, लेकिन प्रवीण कुमारी ने बंकिघम पैलेस जाकर ब्रिटेन की महारानी से मुलाकात की थी. 1951 में क्वीन एलिजाबेथ के कुछ परिचित रीवा आए थे जो महरानी के शिकार कला के मुरीद हो गए थे.

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