समुद्र, नदी नहीं… तालाब की मछलियों को लगती है सबसे ज्यादा ठंड, कसरत नहीं कराई तो होगा बड़ा नुकसान

समुद्र, नदी नहीं… तालाब की मछलियों को लगती है सबसे ज्यादा ठंड, कसरत नहीं कराई तो होगा बड़ा नुकसान


Fish Farming Tips: 24 घंटे पानी में रहने वाली मछलियों को भी सर्दी के मौसम में ठंड लगती है. इतना ही नहीं, ज्यादा ठंड पड़ने पर मछलियां बीमार भी हो जाती हैं और उनकी ग्रोथ रुक जाती है. अक्सर लोगों को लगता है कि पानी में रहने वाली मछलियों को भला ठंड कैसे लग सकती है, लेकिन फिशरीज एक्सपर्ट बताते हैं कि मछलियां ठंडे खून वाली जीव होती हैं, यानी उनके शरीर में खुद से गर्मी पैदा करने की क्षमता नहीं होती. यही वजह है कि मौसम का सीधा असर उनके शरीर पर पड़ता है. जैसे ही सर्दी बढ़ती है, मछलियों का व्यवहार बदलने लगता है. वे अपनी खुराक कम कर देती हैं और तालाब या जलाशय में अपनी रहने की जगह भी बदल लेती हैं.

तालाब की मछलियों को ज्यादा लगती है ठंड
LOCAL 18 से बातचीत में मछली पालक और फिशरीज एक्सपर्ट नंदकिशोर पटेल बताते हैं कि नदी, समुद्र और झील में रहने वाली मछलियों की तुलना में तालाब की मछलियों को ज्यादा ठंड लगती है. समुद्र और नदियों में पानी बहता रहता है, इसलिए वहां तापमान बहुत ज्यादा नहीं गिरता. साथ ही वहां की मछलियां ठंड बढ़ते ही दूसरी जगह चली जाती हैं. लेकिन, तालाब का पानी रुका होता है, जो जल्दी ठंडा हो जाता है. ऐसे में तालाब में पलने वाली मछलियां ज्यादा प्रभावित होती हैं.

ठंड बढ़ते ही बदल लेती हैं जगह
नंदकिशोर पटेल बताते हैं कि मछलियां अपनी प्रजाति के अनुसार तालाब में तीन स्तरों पर रहती हैं. कुछ मछलियां सतह पर रहती हैं, कुछ पानी के बीच में तो कुछ तालाब की तली में. लेकिन, जैसे ही ठंड बढ़ने लगती है, सतह और बीच में रहने वाली मछलियां नीचे तली की ओर चली जाती हैं. वजह यह कि तालाब की तली का पानी ऊपर की तुलना में थोड़ा सामान्य तापमान वाला रहता है.

25 डिग्री से नीचे जाते ही बढ़ने लगती है परेशानी
नवंबर महीने से ही तालाब का पानी ठंडा होना शुरू हो जाता है. खासकर सुबह-शाम के वक्त तापमान में ज्यादा गिरावट आती है. मछलियों के लिए आदर्श तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस माना जाता है. जैसे ही पानी का तापमान 25 डिग्री से नीचे जाता है, मछलियां बेचैन होने लगती हैं. इससे उनमें तनाव बढ़ता है और तनाव का सीधा असर उनकी ग्रोथ और सेहत पर पड़ता है.

मछलियों को दी जाती है ‘गर्माहट’
ठंड से बचाने के लिए मछली पालक कई देसी और वैज्ञानिक उपाय अपनाते हैं. नंदकिशोर पटेल बताते हैं कि छोटे तालाबों में ग्राउंड वॉटर यानी बोरिंग का ताजा पानी डाला जाता है. जमीन से निकलने वाला पानी गुनगुना होता है, जो ठंडे तालाब के पानी में मिलकर तापमान को सामान्य कर देता है. सुबह और शाम पंप की मदद से मछलियों पर यह पानी डाला जाता है, जिसे मछली पालक “मछलियों को नहलाना” भी कहते हैं.

बड़े तालाबों में कराई जाती है मछलियों की कसरत
जब तालाब का आकार बड़ा होता है, तब बोरिंग का पानी डालना संभव नहीं होता. ऐसे में मछलियों को गर्माहट देने के लिए उन्हें कसरत कराई जाती है. इसके लिए तालाब में जाल डाला जाता है. जाल पड़ते ही मछलियां तेज-तेज तैरने लगती हैं. इससे उनके शरीर में हलचल बढ़ती है और पानी में भी उथल-पुथल होती है, जिससे ठंडा पानी कुछ हद तक सामान्य हो जाता है. कुछ जगहों पर तालाब में भैंसों को भी उतारा जाता है. बड़े जानवर को देखकर मछलियां इधर-उधर तेजी से तैरने लगती हैं. इससे न सिर्फ पानी में हलचल होती है, बल्कि मछलियों की ग्रोथ भी बेहतर होती है.

एक्सपर्ट की सलाह
फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि सर्दियों में मछलियों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है. समय पर पानी बदलना, तापमान पर नजर रखना और हलचल बनाए रखना मछलियों को बीमार होने से बचा सकता है. अगर सही देखभाल की जाए, तो सर्दी के मौसम में भी मछलियों की सेहत बनी रहती है और मछली पालकों को नुकसान से बचाया जा सकता है.



Source link