अपनी दस सूत्री मांगों को लेकर एमपी पीएससी कार्यालय के सामने धरना दे रहे अभ्यर्थियों का चार दिवसीय धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। धरना 27 जनवरी तक किया जाएगा। नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के संयोजक राधे जाट ने बताया कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को धरना स्थल पर संविधान का पाठ किया गया। वहीं आज सुबह झंडा वंदन भी किया जाएगा। जाट ने कहा कि हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो हम 27 से आगे भी धरना देंगे। तेरह महीने पहले 18 से 23 दिसंबर 2024 जनवरी तक धरना दिया था। मुख्यमंत्री ने हमें चर्चा के लिए बुलाया लेकिन हमारी मांगें पूरी नहीं की। इसलिए इस बार हम हाई कोर्ट से अनुमति लेकर धरना दे रहे हैं। सड़क पर धरना देने बैठे तो पुलिस से हुज्जत पुलिस के मुताबिक धरना दे रहे स्टूडेंट को हाईकोर्ट से निर्देश हैं कि वे यातायात बाधित नहीं करेंगे, ताकि पिछली बार की तरह ट्रैफिक डायवर्ट करने की नौबत न आए। लेकिन रविवार को छात्रों की संख्या बढ़ने पर गार्डन और फुटपाथ पर धरना दे रहे स्टूडेंट सड़क तक आ गए। इसे लेकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से उनकी बहस भी हुई। हालांकि स्टूडेंट ने कहा कि धरना पुलिस की निगरानी में दे रहे हैं। चारों ओर से आने-जाने वालों को कोई दिक्कत नहीं होने दे रहे हैं। 10 सूत्री मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन 27 जनवरी तक जारी रहेगा। धरने में कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे हैं, जिनमें छात्राएं भी शामिल हैं। अभ्यर्थियों ने आयोग परिसर के बाहर ही बिस्तर बिछा लिए हैं। अलाव जलाकर रात वहीं बिताई जा रही है। इस आंदोलन को अभ्यर्थियों ने ‘न्याय यात्रा 2.0’ नाम दिया है। जाट ने कहा कि पिछली बार के वादों से सीएम मुकर गए थे। लेकिन हमें जेल भेज दिया, केस भी दर्ज कर दिया। इससे बच्चों का सरकार से भरोसा टूटा है। अबकी बार विश्वासघात न हो इसकी हमारी पूरी तैयारी है। जाट ने आगे कहा कि हमारे धरने की बात सामने आने के बाद कोचिंग संचालकों ने जानबूझकर स्टूडेंट के टेस्ट रख लिए हैं, ताकि वे यहां शामिल नहीं हो सके। छात्रों को भी कई तरह से रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन हम स्टूडेंट की मांगों को पूरा कराने के लिए अनिश्चितकालीन धरना जारी रखेंगे। रणजीत किसानवंशी, MPPSC अभ्यर्थी ने कहा कि वर्ष 2024 में उन्होंने बड़ा छात्र आंदोलन किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री और MPPSC प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई, जहां मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया गया था। जुलाई में आयोग को रिमाइंड ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन इसके बाद उन पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। अक्टूबर-नवंबर में दोबारा ज्ञापन दिया गया, फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ।
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