Last Updated:
Balaghat News: 3 दिसंबर 2021 को सेना के एक सीक्रेट ऑपरेशन के दौरान तोमेश्वर राहंगडाले कुछ काम कर रहे थे कि तभी एक हादसा हुआ और उनकी जान जोखिम में आ गई. उनकी जान पर बन आई थी.
बालाघाट. कहते हैं कि फौजी कभी रिटायर नहीं होता. बस अपनी वर्दी का रूप बदल लेता है. एक ऐसा ही उदाहरण मध्य प्रदेश के बालाघाट में मौजूद है. बात है साल 2021 की, जब मिलिट्री के सीक्रेट ऑपरेशन के दौरान तोमेश्वर राहंगडाले गंभीर रूप से जख्मी हो जाते हैं और उनकी रीढ़ की हड्डी और पसलियां टूट जाती हैं. बिल्कुल मौत की दहलीज पर खड़े तोमेश्वर दो साल तक बिस्तर पड़े रहे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जिंदगी की जंग भी जीत ली. हालांकि कुछ मजबूरियां रहीं कि न चाहते हुए भी उन्हें वीआरएस लेना पड़ा लेकिन देशभक्ति का ऐसा जज्बा कि ठीक होने से पहले ही समाजसेवा का काम शुरू कर दिया, इसलिए कहते हैं कि फौजी कभी रिटायर नहीं होता है.
बात 3 दिसंबर 2021 की है, जब सेना के एक सीक्रेट ऑपरेशन के दौरान तोमेश्वर कुछ काम कर रहे थे कि तभी एक बड़ा हादसा हुआ और उनकी जान जोखिम में आ गई. हादसा इतना बड़ा था कि उनकी जान पर बन आई थी. उन्हें एयरलिफ्ट किया गया और दिल्ली एम्स लाया गया. हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी और सीने की पसलियां टूट गई थीं. लंबे समय तक चले इलाज के बाद उनकी जान तो बच गई लेकिन उनकी जिंदगी कठिन हो गई. करीब दो साल तक वह बिस्तर से उठ तक नहीं सके और उन्हें 31 दिसंबर 2023 को वीआरएस लेना पड़ा. धीरे-धीरे वह ठीक होने लगे लेकिन डॉक्टर ने उन्हें आगे की ओर झुकने के लिए हमेशा के लिए मना कर दिया, फिर भी देशभक्ति का जुनून ऐसा था कि ठीक होने के साथ ही उन्होंने समाजसेवा शुरू कर दी.
रेलवे में जेई की नौकरी मिली
तोमेश्वर राहंगडाले ने लोकल 18 को बताया कि सेना से रिटायर होने के बाद रेलवे में जेई की नौकरी मिली लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा, इसलिए वह एक साल से मेडिकल लीव पर हैं. इसी के साथ वह अपने इलाके के लोगों की मदद के लिए आगे रहते हैं और दूसरों की समस्या को अपनी समस्या समझते हैं. उन्हें मिलने वाली पेंशन से वह दूसरों की मदद करते हैं. किसी को अस्पताल ले जाना हो या फिर किसी का कोई सरकारी काम, वह हमेशा आगे रहते हैं. उनका कहना है वह अपने गांव की सड़क बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे में सवाल सिस्टम से भी, जिसने देश के लिए अपनी जान जोखिम डाली, उसके गांव में आजादी के इतने सालों बाद भी सड़क तक नहीं बन पाई.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.