मैहर जिले के शासकीय हाई स्कूल भटिगंवा में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान छात्रों को विशेष भोज (मिड-डे मील) रद्दी कागजों और पुरानी किताबों के फटे पन्नों पर परोसा गया। इस घटना ने स्कूल प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, गणतंत्र दिवस पर आयोजित इस विशेष भोज में बच्चों को हलुआ और पूड़ी दी गई। छात्रों को जमीन पर बिठाया गया और उनके सामने थाली या पत्तल के बजाय पुरानी कॉपियों और किताबों के पन्ने फाड़कर बिछाए गए। इन गंदे और स्याही लगे कागजों पर ही भोजन परोसा गया, जिसे बच्चों ने मजबूरी में खाया। विशेषज्ञों के मुताबिक, अखबार या लिखे हुए रद्दी कागज पर खाना रखकर खाना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। प्रिंटिंग स्याही में लेड और अन्य हानिकारक रसायन होते हैं, जो गर्म भोजन के संपर्क में आने पर पेट में जा सकते हैं और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। डीपीस बोले- वस्तुस्थिति पता लगाने निर्देश दिए
सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के लिए बर्तन खरीदने और उनके रखरखाव के लिए सरकार अलग से बजट आवंटित करती है। इसके बावजूद, राष्ट्रीय पर्व पर बच्चों को कागज पर भोजन परोसे जाने से स्कूल की व्यवस्था और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। इस पूरे मामले पर डीपीसी विष्णु त्रिपाठी ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने तत्काल वीडियो बीआरसी को भेजकर मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। त्रिपाठी ने कहा कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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