5 शस्त्र, अडिग हौसला और आज़ादी की ज्वाला, स्वतंत्रता सेनानी सरजू की वीरगाथा

5 शस्त्र, अडिग हौसला और आज़ादी की ज्वाला, स्वतंत्रता सेनानी सरजू की वीरगाथा


Last Updated:

Freedom Fighter Sarju Prasad Dauaa Story : आज हम आपको उस स्वतंत्रता सेनानी की वीरता की कहानी बताने जा रहे हैं जिससे अंग्रेज भी थर-थर कांपते थे. दरअसल, छतरपुर के सरजू प्रसाद दउआ जो अपने साथ पांच शस्त्रों को लेकर चलते थे. जिससे अंग्रेज भी इनसे दूर भागते थे. आइए जानते हैं इनकी कहानी 

Freedom Fighter Sarju Prasad Dauaa Story : आज हम आपको एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया था. दरअसल, छतरपुर जिले के चरण पादुका सिंहपुर में 14 जनवरी 1931 को एक आमसभा का आयोजन किया गया था. जिसके सभापति सरजू प्रसाद दउआ थे. इस सभा की सूचना नौगांव पॉलिटिकल एजेंट लॉर्ड फिशर को लगी तो वह सरजू प्रसाद दउआ को पकड़ने आया. इसके बाद अंग्रेजों से डटकर मुकाबला हुआ. जिसमें सैकड़ों की संख्या में इंसान और पशु-पक्षी मारे गए. हालांकि, सरजू प्रसाद दउआ को अंग्रेज नहीं पकड़ पाए. इस वीभत्स घटना को बाद में जलियांवाला बाग हत्याकांड नाम भी दिया गया.

जीवन-भर अंग्रेजों का किया विरोध
गिलौहां गांव के रहने वाले अजय प्रताप यादव बताते हैं कि हमारे परदादा सरजू प्रसाद दउआ एक स्वतंत्रता सेनानी थे. वह जीवन-भर अंग्रेजों के विरोध में आमजन को इकठ्ठा कर देश की आजादी के लिए लड़ते रहे. 14 जनवरी 1931 को  छतरपुर के सिंहपुर गांव के उर्मिल नदी के किनारे आम सभा का आयोजन किया गया था. जिसके सभापति हमारे पर दादा यानी कि सरजू प्रसाद दउआ ही थे. किसी ने इस आमसभा की सूचना नौगांव पोलिटिकल एजेंट लॉर्ड फिशर को दे दी. इसके बाद लार्ड फिशर ने इस आम सभा को घेर लिया और अंधाधुंध गोलियां चलवाई .

दोस्त सुंदरलाल सेठ को गोली मार दी

जिसमें अनगिनत पशु-पक्षी और सैकड़ो की संख्या में इंसान मारे गए थे. हालांकि , सरजू प्रसाद दउआ अंग्रेजों के हांथ नहीं लगे. इसके बाद अंग्रेज इनके गांव गिलौहां पहुंचे जहां पूरे गांव की घेराबंदी कर दी. सरजू प्रसाद के घर में भी लूटपाट की जो भी मिला सब लूट कर ले आए. अंग्रेजों ने गिलौहां गांव में सरजू प्रसाद के दोस्त सुंदरलाल सेठ को गोली मार दी.

अपने दोस्त को बचाने के लिए वह महोबा के अस्पताल गए वहां उनका इलाज कराया हालांकि इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई. वहीं दूसरी तरफ अंग्रेजों को पता चला कि सरजू प्रसाद दवा सुंदरलाल सेठ का इलाज करवाने महोबा अस्पताल गया है तो वह पीछे-पीछे यहां भी आ गए और सुंदर सरजू प्रसाद दउआ को गिरफ्तार कर लिया. सरजू प्रसाद को गिरफ्तार करने के बाद इन्हें 4 साल की जेल भी कर दी गई.

जेल से छूटने के बाद निरंतर आज़ादी के लिए अपने मित्रों को इकट्ठा करके युद्ध की रणनीति बनाते रहे. सालों संघर्ष के बाद देश को आजादी मिली तो उन्हें लगा कि उनका प्रयास और मित्रों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया.‌ आजादी के समय भी सरजू प्रसाद जीवित रहे. इस तरह वह अपने पूरे जीवनकाल में देश की आजादी के लिए संघर्ष करते रहे. अजय बताते हैं कि हमारे पर दादा सरजू प्रसाद हमेशा अंग्रेजों के खिलाफत करते थे और वह हमेशा लोगों को एकजुट होकर अंग्रेजों के विरुद्ध आजादी की चिंगारी जलाते थे.

अपने पास 5 शस्त्र रखते थे 
अजय बताते हैं कि हमारे परदादा सरजू प्रसाद जिन्होंने अंग्रेजों के गले काटे थे. हमारे पर दादा के पास पांच शास्त्र रहते थे और इन्हीं शस्त्रों से वह अंग्रेजों से लड़ाई लड़ते थे. इन शस्त्रों में उनके पास तलवार, तेगा, तमंचा, भाला और दो-तीन प्रकार की बंदूके भी रहती थी जो फोल्ड होकर दो-तीन शस्त्र के रूप में बन जाती थीं. ऐसे हमारे पूर्वज बताते थे यही हम आपको भी बता रहे हैं.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

homemadhya-pradesh

5 शस्त्र, अडिग हौसला और आज़ादी की ज्वाला, स्वतंत्रता सेनानी सरजू की वीरगाथा



Source link