Public Opinion: फिर फंसा पेंचवैली का पेंच…राजधानी से आज भी डिस्कनेक्ट बालाघाट! क्या है वजह?

Public Opinion: फिर फंसा पेंचवैली का पेंच…राजधानी से आज भी डिस्कनेक्ट बालाघाट! क्या है वजह?


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Balaghat Rail Connectivity: बालाघाट जिला वन और खनिज संपदा से सरकार को करोड़ों का राजस्व देता है, लेकिन आज भी राजधानी से सीधी रेल कनेक्टिविटी को तरस रहा है. पेंचवैली एक्सप्रेस को बालाघाट होते हुए गोंदिया तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी निरस्त हो गया. ट्रेन न होने से छात्रों और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. बस किराए में मनमानी और लंबा सफर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है. अब ट्रेन नहीं चली तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है.

Pench Valley Public Opinion: मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला वन और खनिज संपदा से भरपूर है. यहां से इमारती लकड़ी, मैंगनीज और तांबे का खनन होता है, जिससे सरकार को हर साल अच्छा-खासा राजस्व मिलता है. इसके बावजूद हालात ये हैं कि बालाघाट आज भी प्रदेश की राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर से सीधी रेल कनेक्टिविटी के लिए संघर्ष कर रहा है.

एक ट्रेन की मांग, लेकिन जवाब में सिर्फ इंतजार
बालाघाट से भोपाल या इंदौर जाने वाले यात्रियों को आज भी सीधी ट्रेन नहीं मिलती. सितंबर में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की महाप्रबंधक के बालाघाट दौरे के दौरान पेंचवैली एक्सप्रेस को बालाघाट से चलाने की मांग उठी थी, लेकिन उस वक्त इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया गया. इसके बाद जिले में सियासत गरमा गई और ब्रॉडगेज रेल संघर्ष समिति ने बालाघाट जंक्शन पर ज्ञापन सौंपा. सांसद स्तर पर भी रेलवे अधिकारियों से मुलाकात कर मांग रखी गई.

7 नवंबर 2025 का प्रस्ताव भी हुआ निरस्त
7 नवंबर 2025 को बिलासपुर रेल जोन की ओर से ट्रेन को बालाघाट होते हुए गोंदिया तक बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया था. लेकिन चार महीने बीतने के बाद अब यह प्रस्ताव भी तकनीकी कारणों का हवाला देकर निरस्त कर दिया गया है. इससे बालाघाटवासियों की निराशा और बढ़ गई है.

कहां फंसा पेंचवैली एक्सप्रेस का पेंच
पहले पेंचवैली एक्सप्रेस अमला तक चलती थी. फिर इसे सिवनी और जुलाई 2025 में नैनपुर तक बढ़ाया गया. फिलहाल ट्रेन नैनपुर-सिवनी-छिंदवाड़ा-भोपाल होते हुए इंदौर जाती है. मंडला और बालाघाट दोनों जिलों की मांग है कि ट्रेन उनके रास्ते चले, लेकिन प्रतिनिधियों के आपसी विरोध के चलते मामला अटका हुआ है.

छात्र बोले बस संचालक कर रहे मनमाना किराया वसूल
लोकल 18 से बातचीत में छात्रों ने बताया कि सैकड़ों स्टूडेंट रोज पढ़ाई के लिए भोपाल और इंदौर जाते हैं. ट्रेन न होने की वजह से उन्हें गोंदिया या सिवनी तक 90 किलोमीटर बस से जाना पड़ता है. त्योहारों और परीक्षाओं के समय बस का किराया दो से ढाई गुना तक बढ़ा दिया जाता है. थकान का असर पढ़ाई और परीक्षा पर भी पड़ता है.

ट्रेन नहीं चली तो आंदोलन की चेतावनी
ब्रॉडगेज रेल संघर्ष समिति के अनुप सिंह बैस का कहना है कि ट्रेन खाली मंडला की ओर जाती है, जिससे रेलवे को नुकसान हो रहा है. अगर इसे बालाघाट होते हुए गोंदिया तक चलाया जाए तो यात्रियों को सुविधा मिलेगी और रेलवे का राजस्व भी बढ़ेगा. मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन किया जाएगा.

फिर उठेगी रेल की मांग
रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य मोनिल जैन का कहना है कि बालाघाट की मांग पूरी तरह जायज है. ट्रेन को गोंदिया से चलाने और रायपुर से दिल्ली तक नई ट्रेन की मांग को दोबारा मजबूती से उठाया जाएगा.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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