उज्जैन के कनासिया में हर छठे घर में फौजी: 5 हजार की आबादी वाले गांव में 800 फौजी, पीढ़ियों से कर रहे देशसेवा; प्रशिक्षण दे रहे रिटायर – Ujjain News

उज्जैन के कनासिया में हर छठे घर में फौजी:  5 हजार की आबादी वाले गांव में 800 फौजी, पीढ़ियों से कर रहे देशसेवा; प्रशिक्षण दे रहे रिटायर – Ujjain News




उज्जैन जिले का कनासिया गांव किसी सैन्य बटालियन से कम नहीं है। करीब 5 हजार की आबादी वाले इस गांव में हर छठे घर से कोई न कोई सदस्य सेना में सेवा दे चुका है या वर्तमान में देश की रक्षा में तैनात है। कई परिवार ऐसे हैं जहां दो-दो और तीन-तीन युवा एक साथ सेना में हैं। कनासिया गांव आज पूरे प्रदेश में देशभक्ति और सैन्य परंपरा की मिसाल बन चुका है। उज्जैन जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर तहसील तराना क्षेत्र में स्थित कनासिया गांव में वर्ष 1963 से ही सेना में भर्ती होने का जुनून देखने को मिलता है। गांव के 81 वर्षीय सालिगराम पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने सेना की वर्दी पहनी। इसके बाद उनके दो भाई-सोहन देथलिया और रणछोड़ लाल भी थल सेना में भर्ती हुए। तीनों भाइयों ने 1965 और 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाई। सेवा से निवृत्त होने के बाद तीनों भाइयों ने गांव लौटकर युवाओं में सेना के प्रति जोश और जज्बा भरा। इसका नतीजा यह है कि अब तक गांव के करीब 800 युवा थल सेना, जल सेना और वायु सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। आज भी देश के लिए तैयार हैं रिटायर्ड जवान रिटायर्ड फौजियों का कहना है कि हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उन्होंने स्वेच्छा से आवेदन किया था कि देश को जब भी जरूरत पड़ेगी, वे फिर से सेवा देने को तैयार हैं। इसके साथ ही अग्निवीर भर्ती में भी गांव के 8 युवाओं का चयन हुआ है। रिटायर्ड जवानों का कहना है कि यदि सरकार अग्निवीरों को स्थायी सेवा का अवसर दे, तो गांव से बड़ी संख्या में युवा सेना में जाने को तैयार हैं। गांव के मैदान में रोज 100 युवा कर रहे ट्रेनिंग
सालिगराम ने बताया कि सेना से रिटायर्ड कई जवान अब गांव के युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। रोज सुबह करीब 8 बजे गांव के मैदान में 100 से अधिक युवा इकट्ठा होते हैं। यहां थल, जल और वायु सेना से जुड़े रिटायर्ड जवान युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण, दौड़, अनुशासन और सेना भर्ती की तैयारी कराते हैं। देश को 800 जवान दिए, फिर भी सुविधाओं का अभाव
रिटायर्ड हवलदार विनोद पटेल ने बताया कि वे वर्ष 2001 में थल सेना में भर्ती हुए थे और 17 साल की सेवा के बाद स्वेच्छा से रिटायर हुए। उनके परिवार के 3 सदस्य सेना में, 5 पुलिस में और 3 शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं। ऐसे कई परिवार कनासिया गांव में हैं। गांव में सबसे अधिक खाती पटेल समाज के लोग रहते हैं। खेल मैदान और प्रशिक्षण की सुविधा नहीं
विनोद पटेल का कहना है कि गांव ने देश को 800 जवान दिए, लेकिन आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। खेल मैदान, संसाधन और प्रशिक्षण की सुविधाएं नहीं हैं। इसके बावजूद यहां के युवा अपने दम पर अभ्यास कर इतिहास रच रहे हैं। यदि शासन-प्रशासन इस गांव की ओर ध्यान दे, तो यहां के युवा न सिर्फ सेना में बड़े पदों तक पहुंच सकते हैं, बल्कि देश के लिए मेडल और सम्मान भी जीत सकते हैं।



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