चौकी प्रभारी- पैसों का बहुत भूखा है: कॉन्स्टेबल-पीड़ित का 13 मिनट का ऑडियो, रुपए के लिए थाने में क्या होता है, सबकुछ – Chhindwara News

चौकी प्रभारी- पैसों का बहुत भूखा है:  कॉन्स्टेबल-पीड़ित का 13 मिनट का ऑडियो, रुपए के लिए थाने में क्या होता है, सबकुछ – Chhindwara News




छिंदवाड़ा के मोहखेड़ थानाक्षेत्र के उमरानाला पुलिस चौकी से जुड़ा ऑडियो सामने आया है। ऑडियो में चौकी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर पारसनाथ आर्मो और चौकी स्टाफ पर झूठे मामलों में फंसाकर अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं। इसमें कई दिनों तक थाने में बिठाकर, मारपीट कर पीड़ित से लाखों रुपए की वसूली की बात कही जा रही है। ऑडियो में महाराष्ट्र सीमा और फॉरेस्ट एरिया का हवाला उमरानाला चौकी महाराष्ट्र सीमा से सटी होने और फॉरेस्ट एरिया के नजदीक होने के चलते बड़े वाहनों का लगातार आना-जाना रहता है। इसी क्षेत्र में पिछले दिनों सागौन की पकड़ी गई खेप के एक मामले को लेकर पीड़ित अमन और चौकी में पदस्थ आरक्षक मुकेश जाट के बीच हुई बातचीत का यह ऑडियो बताया जा रहा है। ऑडियो में यह भी दावा किया गया है कि कुछ मामलों में जानबूझकर डराने के लिए पीड़ितों को चमकाया गया और झूठी कहानी गढ़ी गई, हालांकि भास्कर डिजिटल इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है। पहले पढ़िए 13 मिनट के ऑडियो के अंश… पीड़ित : हम लोगों से उन्होंने पूरा पैसा लिया है। हमें कहां छोड़ रहे थे वो, बाहर तक नहीं जाने दे रहे थे। आरक्षक मुकेश: हमको सिर्फ 4 हजार दिए और 6 हजार ASI को दिए। समझ गए, सुरेंद्र यादव को 6 हमको 4। पीड़ित : इन्होंने पैसों के लिए पूरी कहानी बनाई थी, ऐसा कोई मैटर था ही नहीं। आरक्षक मुकेश: प्रभारी के साथ अब जो-जो भी शामिल रहे हों। हमको तो बताया कि कल 70 हजार रुपए मिले हैं। उसमें भी हरामखोर प्रभारी बोल रहा था कि लेना है तो लो, नहीं तो भाड़ में जान दो। पीड़ित : डेढ़ लाख रुपए लिए उन लोगों ने। भैया आपको तो सब मालूम था, मेरा कोई मैटर नहीं था, बस गाड़ी छुड़वाने के चक्कर में मैं फंस गया। आपने तो मेरी थाने में बहुत मदद की। आरक्षक मुकेश : मैंने तो तुम्हें और तुम्हारे रोहित को हर बात बताई। उस दिन भी प्रभारी के कहने पर चमकाने के लिए तुम्हें पाइप से मारा था। पीड़ित : हां आपने, पाइप जमीन पर मारा था, उस टाइप से आपने मुझे मारा भी नहीं था। आरक्षक मुकेश : हां मैंने वैसा मारा भी नहीं था। पीड़ित : मैंने तो उन्हें पूरी हकीकत बताई, पर उन्होंने पैसे के लिए मुझे लपेटा। आरक्षक मुकेश : रोहित को तो एक-एक बात बोली थी, वह भी इसमें कुछ नहीं करवा पाया। पीड़ित : ठीक है भैया, मैं इसमें आपको मैनेज कर लूंगा। आपको तो पूरी कहानी मालूम है। जो काम करते हैं, उन लड़कों को पकड़ा और छोड़ दिया। सिर्फ मेरी ही कहानी बनाई। आरक्षक मुकेश: तुम्हारा सुभाष से कैसा, क्या था। हमें जो जानकारी लगी थी, उसमें करीब 2.30 के करीब का खेल हुआ है। हम लोगों को सिर्फ 70 हजार रुपए का बताया गया। पीड़ित: अच्छा.. आर्मो, तुम्हारे टीआई साहब ने पैसा तो हमसे पूरा लिया है। आरक्षक मुकेश: अच्छा, आर्मो। पीड़ित : पैसों के लिए ही तो उन्होंने हमें तीन दिन बैठाया। आरक्षक मुकेश : तुमसे कितना लिया था। पीड़ित : कुल मिलाकर 4 लोगों के 1.5 लाख रुपए लिए हैं। आरक्षक मुकेश : यह सुना है कि सागौन बिका है, उसमें से भी लिए हैं। पीड़ित : सागौन का मैटर ही नहीं है भैया। आरक्षक मुकेश: हमको तो वहीं से जानकारी ऐसी मिली थी कि बाद में सागौन बिका तो उसमें से भी रोहित नाम का था, उसने और आर्मो साहब… दोनों ने मिलकर। पीड़ित : नहीं, ऐसा नहीं है। मैं तो बता रहा हूं कि मेन आदमी, इन लोग जो पकड़ कर लाए थे मोटा सा लड़का… एक अभिनव सूर्यवंशी, जिसको ढूंढ रहे थे, जिसने मोबाइल बंद कर दिया था। मेन उनका काम था।ड्राइवर के चक्कर में अपन फंस गए। आरक्षक मुकेश: 1.5 तुम चारों से लिए या 6 से लिए। पीड़ित : हम चारों से लिए। आरक्षक मुकेश: तुम 4 से 1.5 लिए, फिर उन 2 से भी अलग लिए। पीड़ित : ये जानकारी अपन को नहीं है। आरक्षक मुकेश : उनसे भी लिए हैं, क्योंकि उनके ऊपर तो कुछ भी नहीं बनाया है। पीड़ित : हां, जो मेन आदमी थे सागौन वाले, उनके ऊपर कुछ नहीं किया इन लोगों ने। आरक्षक मुकेश : अभी कहां हो तुम। पीड़ित : घर पर हूं, मैं आपका नंबर तलाश रहा था, लेकिन मिल नहीं पा रहा था। उसने गलत किया, मैंने सारी हकीकत बताई फिर भी। आरक्षक मुकेश : किसको। पीड़ित : आपके टीआई साहब को। आरक्षक मुकेश : वो पैसों का बहुत भूखा है पीड़ित : हां, उसने पैसों के लिए ही तो मुझे लपेटा है। ठीक है। आरक्षक मुकेश : रोहित को एक-एक चीज बताई थी। वह तो नौकरी के पहले से साथ वाला है मेरा। उसे तुम्हारी पूरी जानकारी दी थी। पीड़ित : भैया, आपको तो पूरी हकीकत पता है कौन क्या काम करता है। आरक्षक मुकेश : रोहित को बोला भी था कि इन लोगों ने अनावश्यक बिठाकर रखा है। फोन लगवाओ। चार दिन हो गए, अपराधी टाइप बिठाकर रखा है। मारा कुटाई कर रहा है। रोहित भी हौ-हौ करता रहा, इतने दिन हो गए, लेकिन कुछ नहीं किया। पूरे मैटर को दो महीने हो गए। तुम्हारी सत्ता होने के बाद भी तुम्हारे लड़कों को चार दिन अंडरवियर में बिठाकर रखा। पीड़ित : मैंने भैया से बात की है। मुझसे पैसे लिए, चलो जाने दो। लिया तो लिया, लेकिन जिन्होंने ये काम किया, उन्हें पकड़ा नहीं। बाहर की बाहर उसने सब कर लिया। आरक्षक मुकेश : हां, बाहर लिए न। डेढ़ तुम लोगों से लिए। मेरे हिसाब से 60 समथिंग उन लोगों से लिए। मैंने तो 2.30 का सुना है। मांगा होगा दोनों से 50-50। दिए होंगे 40-40। ऐसा करके डेढ़ और 80… 230 हो गए। पीड़ित : मैंने तो साहब को सीधे बता दिया था कि इन लोगों का काम है। मैं तो सिर्फ जो गाड़ी पकड़ाई है, उसके लिए आया हूं। उन्हें पकड़ने के बाद ऐसे ही छोड़ दिया। मुझे तो पता भी नहीं था कि गाड़ी में सागौन है या क्या… यदि मैं आता नहीं तो कुछ होता भी नहीं। चुनाव में लड़के लोग सपोर्ट कर देते हैं, इसलिए आ गया, नहीं तो आता ही नहीं। मेरी तो गाड़ी भी नहीं थी। जो सागौन का काम करते हैं, वे संजय भैया के रूम के ऊपर ही तो रहते हैं। पता होने के बाद भी उन्हें तक लेकर नहीं आए। बाहर की बाहर सेटअप कर लिया। आपके थाना प्रभारी ने मुझे जबरन घसीटा है। आरक्षक मुकेश : वह तो पूरा सेटअप था। थाना प्रभारी नहीं चौकी प्रभारी। टीआई नहीं हैं, टू स्टार हैं। पीड़ित : हां जो भी हो चौकी प्रभारी, तीन दिन रहा वहां मैं। बहुत गलत किया जा रहा था। इतना गंदा नहीं लूटना चाहिए किसी को। वहां छोटे-छोटे मैटर में लूटा जा रहा है। आरक्षक मुकेश : तीन नहीं चार दिन। गलत है मैं तो शुरू दिन से कह रहा हूं। रोहित को पहले दिन ही कहा था, क्या करें अब। रोहित की चैटिंग तुम्हें दिखा दी। वह यही बोलता रहा। भैया को बता दिया है, भैया अभी यहां हैं, वहां हैं। भैया से अब ज्यादा नहीं बोल सकते। पीड़ित : जिस दिन मैं छूट रहा था, उस दिन भैया को पता चला। उड़ाने वालों ने तो खूब उड़ाया। आरक्षक मुकेश: इस मामले में बदनाम ज्यादा हुए, क्योंकि 4 दिन चौकी में, थाने में रहना अच्छी बात नहीं है।मुख्य बात यह है कि अगर किसी को तीन-चार दिन थाने में रख रहे हो तो अपराध सिद्ध भी तो करो। पीड़ित : वही, बात गोरे-गोरे से वो मुंशी से भी मैंने कही थी। मैंने कहा- मुझे गलत यहां पर रखा है। उन्होंने सीधे पहले ही दिन कहा था- साहब से बात कर लो…ले-देकर काम हो जाएगा। अगर मैं पहले ही दिन पैसे की बात कर लेता तो उसी दिन छूट जाता। किसी ने पहले पैसे की बात नहीं की। बात कर लेता तो काम हो जाता। आरक्षक मुकेश: वह बहुत पैसों का भूखा है। उधर, बहुत से ऐसे लोग हैं। फेस टू फेस मिलोगे तो नाम गिनवा दूंगा। भैया के पास जा सकते हो तो नाम, नंबर सबकुछ उपलब्ध करवा दूंगा। आपके टीआई ने 2 लाख रुपए लेकर छोड़ा गया पीड़ित: आपके सामने जबलपुर गया था। आप भी गए थे। लड़की का मामला बनाकर उस व्यक्ति से टीआई ने जबरन 2 लाख रुपए लूटा है। जब लड़की का छेड़खानी वाला मामला कह रहा था तो उसके ऊपर मामला बनाना था न। आरक्षक मुकेश: किसको। पीड़ित : अरे, आपके साथ जबलपुर गया था, उसे लेने। आरक्षक मुकेश : उस मामले में मुझे 10 का नोट नहीं दिया था। उसमें जो बंदे को लाने गाड़ी गई थी। लड़का खुद व्यवहारिकता में आ गया था, उस मामले में मुझे 1 रुपया नहीं दिया था। पीड़ित : मेरे समाज वाला, मेरे रिलेशन में लगाता है, मुझे तो बाद में पता चला कि इन्होंने उसके साथ इतना गलत किया। वो जॉब वाला था। जॉब न चला जाए, इस लफड़े के चक्कर में, इसलिए रुपए दे दिए, नहीं तो वह नहीं देता। इन्होंने मारपीट कर उससे पैसे लिए। आरक्षक मुकेश : इसका ज्ञान प्रीतम माहोरे ने ही तो दिया था कि वह जॉब वाला है। पैसे वाला है। हम तो उसे लेकर आ रहे थे, जब तक वह चौकी नहीं पहुंचा, ये मुझे बार-बार फोन लगा रहे थे। इसमें 2 लाख 20 हजार लिए इससे। 2.20 में 1.10 चौकी में रखे। 1.10 उस औरत को दिए, फिर उसने जितना भी प्रीतम का दिया हों। वो 1.10 में से 10 दिए राधेश्याम ठाकुर मुंशी को। मुंशी ने 2 हजार दिए वो आरक्षक रोहित को और इस मामले में जिसने फ्री में ऐसी-तैसी कराई मुकेश जाट, उसको एक का सिक्का नहीं दिया। पीड़ित : उस दिन भी जब मुझे मारने के लिए कहा, आपने मुंह मोड़ लिया था। मजबूरी में आपने चौकी प्रभारी के कहने पर मारा। आरक्षक मुकेश : मैंने तो चैंबर में जाकर बोला था कि उस लड़के का कुछ नहीं है। सुभाष का जरूर कहा था। तुम्हारा तो फेवर किया था। मैंने कहा था कि मोहल्ले का है, इसलिए साथ में रहता है। मैंने तो यह भी बताया था कि जबलपुर भी मेरे साथ वहा गया था। हमारे प्रभारी को तो पैसों का भूत चढ़ा है। पीड़ित : हां, मैंने सुना है। फोन आया था। छोड़ना मत उसे। भैया ने बताया था। आरक्षक मुकेश : तुम तो रोहित से फोन कर पूछो। मैंने उसे क्या-क्या कहा। चैटिंग भी दिखाऊंगा। पीड़ित अमन का आरोप पीड़ित अमन ने भास्कर से चर्चा में बताया कि अप्रैल माह में उसे चार दिन तक चौकी में बैठाकर रखा गया था। इसके बाद चार लोगों से पैसे लेकर छोड़ा गया। पहले मुझ पर सागौन तस्करी का मामला बनाने की तैयारी थी, बाद में 151 की कार्रवाई कर दी गई। उसने बताया कि यह ऑडियो करीब दो माह पुराना है, जब उन्होंने अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर चौकी में पदस्थ आरक्षक को कॉल किया था। चौकी प्रभारी ने आरोपों से किया इनकार चौकी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर पारसनाथ आर्मो से संपर्क किया गया तो उन्होंने ऐसे किसी भी मामले से साफ इनकार करते हुए कहा कि इस तरह का कोई प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है। वहीं, ऑडियो में बातचीत करने वाले आरक्षक मुकेश जाट को कॉल करने पर उनका मोबाइल नंबर बंद मिला।



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