UGC नियमों पर बवाल! MP में भाजपा-कांग्रेस भिड़ी, 2028 चुनाव पर बड़ा असर

UGC नियमों पर बवाल! MP में भाजपा-कांग्रेस भिड़ी, 2028 चुनाव पर बड़ा असर


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मध्य प्रदेश में UGC के नए समानता नियमों से घमासान मचा है. भोपाल, इंदौर से लेकर पूरे प्रदेश में सड़क पर उतर कर सवर्ण समाज विरोध प्रदर्शन कर रहा है. जहां करणी सेना ने भारत बंद का ऐलान किया. नियम जाति भेदभाव रोकने के लिए हैं, लेकिन जनरल कैटेगरी इसे रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन बता रहा है. कांग्रेस ने सभी वर्गों की अनदेखी का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने चुप्‍पी साध ली है. केवल केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भेदभाव नहीं होगा जो हो रहा है वह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है.

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UGC के नए नियमों को लेकर मध्‍य प्रदेश के कई जिलों में घमासान मचा है.

भोपाल.  मध्य प्रदेश में UGC के नए समानता नियमों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, जहां विरोध प्रदर्शनों से घमासान मचा हुआ है और भाजपा-कांग्रेस के बीच हलचल तेज हो गई है. ये नियम, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए, अब एमपी की राजनीति का केंद्र बन गए हैं. भोपाल से इंदौर तक सवर्ण समाज और करणी सेना जैसे संगठनों के प्रदर्शन, पुतला दहन और भारत बंद के ऐलान से साफ है कि यह मुद्दा जाति आधारित वोट बैंक को प्रभावित कर रहा है. भाजपा की दुविधा उजागर हो रही है. वहीं कांग्रेस इसे सरकार की असफलता बताकर युवा और सवर्ण वोटर्स को साधने की कोशिश कर रही है. एमपी में 50 से अधिक विश्वविद्यालयों पर असर पड़ेगा, जहां समता समितियां बनेंगी, लेकिन फर्जी शिकायतों का डर राजनीतिक रूप से सवर्ण असंतोष को हवा दे रहा है. 2028 विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि एमपी में जाति पॉलिटिक्स पहले से संवेदनशील है और युवा वोटर्स (18-35 आयु वर्ग) 40% से अधिक हैं.

यह विवाद एमपी की राजनीति को नए सिरे से आकार दे सकता है, जहां सामाजिक न्याय और सवर्ण अधिकारों का टकराव चुनावी रणनीति का हिस्सा बन रहा है. इंदौर के डीएवीवी कैंपस में करणी सेना का विरोध और जबलपुर में महिलाओं का बिल जलाना सवर्ण समाज की एकजुटता दिखाता है, जबकि भोपाल में दलित-पिछड़ा संगठनों का समर्थन पिछड़े वर्गों की गोलबंदी का संकेत है. भाजपा की चुप्पी से पार्टी में फूट पड़ रही है, जहां कुछ नेता इसे सुप्रीम कोर्ट निर्देश बता रहे हैं, लेकिन सवर्ण कार्यकर्ताओं का असंतोष 2018 चुनावों जैसी स्थिति दोहरा सकता है. कांग्रेस नेता उमंग सिंघार का बयान कि सरकार सभी वर्गों की राय ले, विपक्ष को मुद्दा दे रहा है. एमपी में 2019-2024 के बीच जाति भेदभाव शिकायतों में 118% बढ़ोतरी से साफ है कि नियम जरूरी हैं, लेकिन क्रियान्वयन में असंतुलन राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा रहा है. इससे एमपी के शिक्षा क्षेत्र में सांस्कृतिक बदलाव आएगा, लेकिन चुनावी मैदान में भाजपा को सवर्ण वोट खोने का खतरा है, जबकि कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय की लड़ाई बना सकती है.

“मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. UGC के नए नियमों का किसी भी तरह से दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा. किसी के साथ कोई उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा. यह पूरी प्रक्रिया न्यायपालिका के दायरे में है. नए नियमों का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि किसी का उत्पीड़न.
– धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय शिक्षा मंत्री)

देश में कई अलग-अलग वर्ग हैं, सरकार को कानून बनाते समय सभी वर्गों का ध्यान रखना चाहिए. सरकार ऐसे कई चौपाल करती है लेकिन जब बात कानून बनाने की आती है तो क्यों सभी की राय नहीं ली जाती. बिना किसी से बात किए, पूछे और सीधे ऐसे कानून नियम लागू करना, क्‍या ठीक है? आखिर सरकार ऐसा करके क्‍या बताना चाहती है?
-उमंग सिंघार (मध्य प्रदेश कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष)

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

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