अनुज गौतम, सागर: सागर सहित पूरे मध्य प्रदेश में इन दिनों गेहूं की फसल लहलहा रही है. बसंत ऋतु के आगमन के साथ खेतों में खड़ी गेहूं की बालियां हवा के साथ झूमती नजर आ रही हैं, लेकिन इसी खूबसूरत नज़ारे के बीच किसानों की चिंता भी तेजी से बढ़ रही है. वजह है गेहूं की फसल में अचानक दिखने लगा पीलापन. यह समस्या सिर्फ एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश से गेहूं के पीले पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं.
प्रदेशभर में सर्वे, सामने आए चौंकाने वाले कारण
भारत सरकार के किसान कल्याण एवं कृषि मंत्रालय के अधीन आने वाले पेस्ट इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट कार्यालय के कृषि वैज्ञानिक इस समय पूरे मध्य प्रदेश में सर्वे कर रहे हैं. इस सर्वे में कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो किसानों के लिए जानना बेहद जरूरी है.
तेज बारिश ने बिगाड़ा मिट्टी का संतुलन
सहायक निदेशक डॉ. सुनीत कटियार बताते हैं कि रबी सीजन की बुवाई से पहले जब खेतों में मक्का, सोयाबीन और मूंग की फसल अंतिम अवस्था में थी, उस दौरान कई जिलों में अंधाधुंध बारिश हुई. इस बारिश के कारण मिट्टी से जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट बह गए.नतीजा यह हुआ कि गेहूं की फसल को ग्रोथ, करले बनने और अच्छे दाने आने के लिए जिन पोषक तत्वों की जरूरत होती है, उनकी कमी दिखाई देने लगी.
सलाह लेने पर दिख रहा तुरंत असर
डॉ. कटियार बताते हैं कि जहां किसान कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों से सलाह लेकर जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट का सही मात्रा में स्प्रे कर रहे हैं, वहां 3-4 दिन के भीतर ही फसल में हरियाली लौटती दिखाई दे रही है. इससे साफ है कि सही समय पर सही इलाज से फसल को बचाया जा सकता है.
किसानों की सबसे बड़ी गलती
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक दूसरी बड़ी वजह किसानों द्वारा की जा रही लापरवाही है. बंपर पैदावार के लालच में कई किसान अंधाधुंध और गलत तरीके से फर्टिलाइजर का उपयोग कर रहे हैं. इससे मिट्टी का संतुलन बिगड़ रहा है और फसल की ग्रोथ प्रभावित हो रही है. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान बिना मिट्टी परीक्षण और बिना वैज्ञानिक सलाह के खाद या उर्वरक का प्रयोग न करें.
किन तत्वों की हो रही है कमी?
सर्वे में गेहूं की फसल में जिंक, सल्फर, पोटैशियम, फॉस्फोरस, नाइट्रोजन और बोरान की कमी सामने आई है. कुछ पोषक तत्वों की पूर्ति सिंचाई से हो जाती है, लेकिन कई जगह माइक्रोन्यूट्रिएंट का स्प्रे करना जरूरी हो गया है.
जड़ के पास दिख रहा कीट प्रभाव
डॉ. सुनीत कटियार ने यह भी बताया कि कुछ क्षेत्रों में रूट एफिड का असर भी देखने को मिला है. यह कीट जड़ों के पास दिखाई देता है और पौधे की ताकत को कमजोर कर देता है. ऐसे मामलों में समय रहते पहचान और उपचार जरूरी है.
किसानों के लिए साफ संदेश
कृषि वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि फसल में पीलापन दिखते ही घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत विशेषज्ञों से संपर्क करें. संतुलित खाद, सही मात्रा और सही समय पर उपचार ही गेहूं की अच्छी पैदावार की कुंजी है.