Live: मध्य प्रदेश में UGC के नए नियमों के खिलाफ हल्ला बोल, जमकर लग रहे नारे, पुतला भी फूंका

Live: मध्य प्रदेश में UGC के नए नियमों के खिलाफ हल्ला बोल, जमकर लग रहे नारे, पुतला भी फूंका


यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद साल 2026 में विश्व विद्यालय और कॉलेज में जातिगत भेदभाव को खत्म करने और समानता को बढ़ाने के लिए नए नियम बनाए, लेकिन इसके बाद लगातार देश भर में आंदोलन और विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. सवर्ण वर्ग के लोग धरना दे रहे हैं. कई छात्र संगठनों की तरफ से ये कहा जा रहा है कि ये नियम बढ़ावा देते हैं. जबलपुर और इंदौर में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन हुए. अब गुना में भी आक्रोश देखने को मिला है.

गुना में यूजीसी के नए नियमों का हुआ विरोध
गुना के हनुमान चौराहे पर आज शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर भारी जनाक्रोश देखने को मिला, जहां सवर्ण आर्मी के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. नगरपालिका के समीप आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में यूजीसी के नए और प्रस्तावित प्रावधानों को बच्चों के भविष्य के लिए जहर समान बताते हुए केंद्र सरकार के निर्णय का पुरजोर विरोध किया गया.

आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर सरकार मंचों से जातिवाद को खत्म करने और देश को न बंटने देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर यूजीसी जैसे संस्थानों के माध्यम से ऐसे कानून थोपे जा रहे हैं, जो समाज में भेदभाव की खाई को और गहरा कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों ने नए नियमों को अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, ये नए प्रावधान न केवल छात्रों के सुनहरे भविष्य को तबाह कर रहे हैं, बल्कि भारतीय संविधान की मूल भावना और अनुच्छेद 14 द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार का भी खुला उल्लंघन कर रहे हैं. लोगों के बीच व्याप्त गुस्सा उस समय और मुखर हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सरकार ऐसी विभाजनकारी अवधारणाओं को तुरंत वापस ले.

सवर्ण आर्मी ने राष्ट्रपति के नाम का एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा
विरोध प्रदर्शन के अंत में सवर्ण आर्मी ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा, जिसमें मांग की गई है कि यूजीसी द्वारा लागू किए गए तमाम भेदभावपूर्ण प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए. ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यदि शिक्षा व्यवस्था में समानता सुनिश्चित नहीं की गई और इन ‘काले कानूनों’ को वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में यह विरोध प्रदर्शन और भी तीव्र रूप धारण करेगा. फिलहाल, हनुमान चौराहे पर हुए इस प्रदर्शन ने प्रशासन और सरकार तक जनता की नाराजगी का स्पष्ट संदेश पहुंचा दिया है.

क्या है यूजीसी का नया नियम
रोहित वेमुला और पायल तड़वी के दो केस थे, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को गाइडलाइन जारी करने का निर्देश दिया था. इसके बाद यूजीसी ने हर कॉलेज और विश्व विद्यालय में एक कमेटी बनाने का नियम बनाया. इस कमेटी में ST, SC, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है, जबकि सवर्णों को इससे बाहर रखा गया है. यह कमेटी लोगों की शिकायत सुनेगी. इसमें सवर्णों को कहीं शामिल नहीं किया गया है.



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